खुशखबरी... सूखे मध्यप्रदेश पर इस बार बरसेगी राहत की बारिश
- देशभर में झमाझम बरसेगा मानसून, सामान्य होगी बारिश
- निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट ने जारी किया अनुमान
- देश के किसी भी हिस्से में नहीं पड़ेगा सूखा
- एक जून से 30 सितंबर तक चलता है मानसूनी सीजन
- पिछले साल कम बरसे थे बादल, 95 प्रतिशत हुई थी बारिश
- दक्षिण भारत में कम रह सकती है बारिश
दीपक राय की लाइव रिपोर्ट...
पिछले वर्ष सामान्य से कम बारिश के कारण सूखा झेल रहे मध्यप्रदेश के लिए खुशखबरी है। इस बार झमाझम बारिश होगी। मौसम की जानकारी देने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने यह अनुमान लगाया है। अनुमान के मुताबिक देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य बारिश होगी। स्काइमेट का कहना है कि इस साल देश के किसी भी हिस्से को सूखा नहीं पड़ेगा। सूखे पडऩे का अनुमान शून्य प्रतिशत है। गौर हो कि 18 अपै्रल तक भारतीय मौसम विभाग भी अपने अनुमान जारी करेगा।
जबलपुर में भारी बारिश
मध्य भारत में भी अच्छी बारिश का अनुमान है। मध्यप्रदेश के जबलुपर, मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक, इंदौर, रायपुर में भारी बारिश होगी। गुजरात के राजकोट, अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत में सामान्य बारिश का अनुमान है।
यह है संभावनाएं
सामान्य बारिश 55 प्रतिशत
सामान्य से थोड़ा कम 20 प्रतिशत
सामान्य से अधिक 5 प्रतिशत
यह होता हो सामान्य मानसून
मानसून दीर्घावधि (एलपीए) 96-104 फीसदी तक बारिश को सामान्य बारिश माना जाता है। 96 प्रतिशत से कम एलपीए को सामान्य से कम माना जाता है। 104 से 110 प्रतिशत एलपीए को सामान्य से अधिक माना जाता है। पिछले वर्ष कम बारिश हुई थी। एलपीए औसत 95 प्रतिशत ही रहा था। 1 जून से 30 सितंबर तक 887.5 मिलीमीटर बारिश को सामान्य बारिश माना जाता है। भारत में औसत बारिश या एलपीए सन 1951 स 2000 के बीच हुई बारिश का औसत है जो कि 89 सेंटीमीटर है।
पिछले वर्ष 5 फीसदी कम हुई थी बारिश
पिछले वर्ष दीर्घावधि मॉनसून अनुमान में 5 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी। 887.5 मिलीमीटर की सामान्य बारिश के मुकाबले पिछले साल 841.3 मिमी बारिश हुई थी। वर्तमान में देश के 91 बड़े जलाशयों में पानी का स्तर 36 फीसदी ही बचा
पहले सूखा और अब ओलावृष्टि लेकिन
किसानों को अब तक नहीं मिली मदद
मप्र में सूखा पडऩे के कारण अक्टूबर 2017 में शिवराज सरकार ने केंद्र की मोदी सरकार से 2800 करोड़ रुपए के सूखे राहत देने का मांग पत्र भेजा था। यह राशि केंद्र ने अब तक नहीं दी। केंद्र सिर्फ 820 करोड़ रुपए का राहत पैकेज देने को राजी हुआ है, जबकि किसानों को अब तक राहत राशि नहीं मिली।
लगातार घटे बारिश के दिन
वर्ष औसत वर्षा के दिन
1951-80 44.3
1990-99 43.8
2000-09 40.6
कब-कब कितनी बारिश (जून से सितंबर, औसत मानसून)
2012 877.8 मिमी
2013 841.7 मिमी
2014 635.8 मिमी
2015 572.8 मिमी
2016 496.4 मिमी
मध्यप्रदेश : 2017 में बढ़ा था संकट
- 856.6 मिमी बारिश औसत है मप्र में, लेकिन सिर्फ 639.5 मिमी बारिश ही हुई
- 35 जिलों में सामान्य से कम हुई बारिश
- 29 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई
- 22 जिलों में सामान्य बारिश हुई
- 2009 की एक रिपोर्ट के अनुसार 2003-04 के अलावा पिछले दस वर्षों
- 1986-87, 1987-88, 2000-2001, 2002-2003, 2004-05 और 2007-08 में गंभीर सूखा पड़ा

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