Header Ads

ads header

Breaking News

सरला हत्याकांड : बुरी तरह घिर सकते हैं दिग्विजय, राजनीतिक यात्रा खत्म न हो जाए


Sarla mishra ex congress politician madhya pradesh with rajeev gandhi

  • दिग्गी कार्यकाल के चर्चित सरला हत्याकांड केस फिर खुलेगा
  • 21 वर्ष बाद केस फिर खोलने हाई कोर्ट पहुंचा भाई
  • कोर्ट ने डीजीपी से मांगा जवाब

दीपक राय, भोपाल...
एक और कांग्रेस नेता व मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नर्मदा यात्रा कर रहे हैं, यात्रा समाप्ति के बाद उनकी राजनीतिक यात्रा शुरू होने की खबरें हैं।  इस बीच, उनके मुख्यमंत्रित्वकाल में 21 साल पहले हुए सरला मिश्रा हत्याकांड़ की फाइल फिर खुल सकती है। कांग्रेस नेत्री सरला मिश्रा के भाई अनुराग मिश्रा ने शुक्रवार को हाईकोर्ट जबलपुर मे एक याचिका दायर कर कोर्ट से मांग की है कि इस केस को फिर से खोला जाए। अनुराग ने मांग रखी है कि वरिष्ठ अफसरों की टीम से उच्च स्तरीय जांच भी कराई जाए। इस कैस को हाईकोर्ट ने सुनने लायक माना है और राज्य सरकार सहित डीजीपी को नोटिस जारी कर चार सप्ताह मे जवाब देने के निर्देश जारी किए है।

क्या है हत्याकांड
14 फरवरी 1997 को भोपाल में सरला मिश्रा की रहस्यमय हालात में जल गई थीं,ं दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में 19 फरवरी को उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में दिग्विजय सिंह और उनके छोटे भाई लक्ष्मण सिंह के खिलाफ आरोप लगे थे। भाजपा सरला की हत्या को लेकर दिग्विजय सिंह पर आरोप भी लगाती आ रही है।

दिग्विजय शासन में हुई थी मौत 
Sarla mishra ex congress politician madhya pradesh

कांग्रेस नेत्री सरला मिश्रा की मौत संदेहास्पद स्थितियों में हुई थी। वह अपने घर में झुलसी हुई हालत में मिली थीं, लेकिन जांच-पड़ताल में इसे महज एक आत्महत्या मानकर बंद कर दिया गया। जबकि परिवार शुरुआत से ही हत्या का आरोप लगा रहा था। जब यह सब हुआ उन दिनों मध्यप्रदेश पर कांग्रेस का शासन था और वे कांग्रेस की ही नेता मानी जाती थीं।
http://mediadarbar.com/31195/who-burned-sarla-mishra// में 2 जून 2016 को 'सरला मिश्रा की जली लाश को आज भी इंतजार है न्याय का.. हेडिंग से आनन्द मिश्र ने लिखा है - नाम सरला मिश्रा। आयु 41 वर्ष। शिक्षा डबल एम.ए.,एम.एड.,एल.एल.बी. स्नातक पत्रकारिता। परिचय म.प्र. कांग्रेस की दबंग नेता एवं स्वतन्त्रता सेनानी की पुत्री, पौत्री। पद, राजनीति, म.प्र. युवक कांग्रेस की संयुक्त सचिव। हालपता सौ फीसदी जलने के बाद तड़प-तड़प कर हुई मौत। वजह, राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के संयुक्त कुकर्म।
जी हां, यह कहानी है मध्य प्रदेश की बेहद जुझारू और सक्रिय नेता सरला मिश्रा की। सरला की ख्वाहिशें थीं राजनीति में महिलाओं के लिए एक मजबूत डगर बनाना, लीक बनाना, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। हालांकि उसमें गजब का जोश था। कुछ कर डालने का माद्दा था। मप्र युवक कांग्रेस के विभिन्न पदों में रही सरला तब चर्चा में आयी जब मप्र के कुछ युवक कांग्रेसियों ने जबलपुर में कांग्रेसी पार्षद कैलाशशर्मा के ढाई वर्ष के पुत्र लक्की शर्मा पर तेजाब फेंक दिया। तब सरला मिश्रा ने ऐसे नेताओं के खिलाफ आवाज उठाई। इसकी सक्रियता ने पूरे मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि खुद कांग्रेस की राजनीति में एक जबर्दस्त तूफान खड़ा कर दिया। सरला अपना सीना तान कर उस मासूम बच्चे को न्याय दिलाने के लिए खड़ी थी, मगर पूरी राजनीति उसके खिलाफ हो गयी। मगर सरला ने हौसला नहीं खोया। नतीजा यह हुआ कि सरला ने लक्की को लेकर तात्कालिक प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समक्ष पहुंच गई। तो हंगामा हो गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उस बच्चे का उपचार अमेरिका में कराने का निर्णय लिया। इतना ही नहीं, सरला ने इस मामले में अपनी ही पार्टी के ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति वाले नेताओं के खिलाफ भी मोर्चा खोला। हालांकि उस पर इसके खिलाफ हमलों की साजिशें भी बुनी गयीं। लेकिन इसके बावजूद सरला अडिग ही नहीं। नतीजा यह हुआ कि तब आपराधिक प्रवृत्ति के चालीस से अधिक मध्य प्रदेश के युवक कांग्रेस के नेताओं को पार्टी से बाहर निकला था। उस समय श्री मोतीलाल बोरा म.प्र. के मुख्यमन्त्री थे।
राजीव गांधी की मप्र यात्रा में सदैव सरला मिश्रा उनकी टीम की सदस्य रही। उनका 10 जनपथ नई दिल्ली में प्रवेश बगैर रोकटोक था। श्री राजीव गांधी की हत्या के बाद भी यह क्रम बना रहा। लगातार 20 वर्षो तक कांग्रेस पार्टी के लिये सेवा में देने के बाद भी उन्हें उचित स्थान नहीं मिला।
सन् 1993 में दिग्विजय सिंह को मुख्यमन्त्री बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे उनकी राइटहैंड भी कहलाती थी किन्तु दिग्गी ने कभी भी उन्हें विधायक राज्यसभा का टिकिट नहीं दिलाया, जबकि वे अपने भाई लक्ष्मण सिंह को तो विधायक,सांसद बनवाते रहे। सन् 1997 में सरला मिश्रा की सब्र का बांध टूट गया। वे इन्हीं बातों को लेकर एक दिन मुख्यमन्त्री निवास दिग्विजय सिंह से मिलने पहुंची और तैश में आकर बोली- महाराजा मैं तेरे को अंतिम मौका दे रही हूं। अभी भी वक्त है, सम्भल जा, वरना मैं तो तुझे छोडूंगी नही।
इसी के कुछ दिनों के बाद 14 फरवरी 1997 को स्थानीय कुछ नेता सायं 5.30 बजे सरला को उनके आवास से एक कार्यक्रम के बहाने लेकर गये तथा बाद में वह 100 प्रतिशत जली अवस्था मे लौटी। संभवत उसे सी.एम. हाउस या उसके आस-पास ही जलाया गया। दूसरे दिन से लेकर 27 फरवरी तक भाजपा ने विधानसभा नहीं चलने दी। अंत में गृहमंत्री चरणदास महंत विधानसभा के अंदर सरला मिश्रा हत्याकाण्ड की सी. बी. आई. जांच की घोषणा की किन्तु नोटीफिकेशन न करने के कारण आज तक सी. बी. आई. जांच प्रारंभ नहीं हो सकी।
वर्तमान प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को भी इस हत्याकाण्ड की जानकारी है एवं हमने उन्हें अगस्त 2014 से लेकर लगातार पत्र लिखें, किन्तु वे भी वैसे ही निकले जैसे अन्य नेता हैं। शिवराज सिंह चौहान, बाबूलाल गौर, डॉ गौरीशंकर शैजवार, गोपाल भार्गव, विश्वास सारंग के साथ मुख्यमन्त्री आवास में बैठक (23 जुलाई 2015) के बाद शिवराज ने हम से कहा था कि मिश्रा जी मैं आपके साथ हूं मेरी प्रधानमन्त्री जी से बात हो चुकी है। यही बात म.प्र. संगठन मन्त्री अरविन्द मे भी कही थी कि मिश्रा जी मैं अन्न की कसम खाता हू्ं इसकी जांच सीबीआई से होगी। मेरी मोदी जी से बात हो चुकी है।
लेकिन शर्म की बात है कि इस मामले में एक भी सरकार ने कोई भी कान नहीं दिया। जबकि यह सारे दल इस समय आम आदमी के मन में महिलाओं को लेकर सम्मान, शील की भाव का प्रदर्शित करने में संलग्न है।

No comments