सीएम की मौजूदगी में RSS के आनुषांगिक संगठनों ने कहा कि उनको काम करने में दिक्कत इसलिए आ रही है कि अफसर सुनते नहीं।
भोपाल.लंबे समय बाद हुई भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में दो अप्रैल को बंद के दौरान हुई दलित हिंसा पर काफी बात हुई। ग्रुप के सदस्यों ने इस वर्ग के प्रभाव वाली सीटों के साथ दूसरी कमजोर विधानसभा सीटों के जीतने का सुझाव दिया तो राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने उनसे ही कहा कि वे जीत का रोडमैप बनाकर दें। खुद जाएं और देखें की क्या करने से सीट मजबूत होगी।
भाजपा प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे की गैरमौजूदगी के कारण शारदा विहार आवासीय विद्यालय में यह बैठक रामलाल ने ली। इससे पहले यहीं पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा की समन्वय बैठक दो घंटे चली। इसमें रामलाल के अलावा संघ के सह सरकार्यवाह कृष्णगोपाल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, संगठन महामंत्री सुहास भगत व सह संगठन महामंत्री अतुल राय मौजूद थे। सीएम और रामलाल की मौजूदगी में ही विहिप ने बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने पर आपत्ति की।
बताया जा रहा है कि 2018 के विधानसभा और 2019 के चुनावों के मद्देनजर सीएम चाहते थे कि यह समन्वय बैठक हो। इसीलिए इसमें आरएसएस से जुड़े सात अनुषांगिक संगठनों को बुलाया गया था। इनसे सभी क्षेत्रों में कामकाज का ब्यौरा लिया गया। इनसे कहा गया है कि आने वाले एक साल बेहद अहम हैं। भारतीय किसान संघ को जिम्मा दिया गया है कि आने वाले दिनों में कोई बड़ा किसान आंदोलन न हो पाए। पूरी टीम किसानों से संवाद करके उनकी बात सरकार तक पहुंचाए।
अनुषांगिक संगठनों ने अधिकारियों के रवैये पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आरएसएस के आनुषांगिक संगठनों ने कहा कि उनको काम करने में दिक्कत इसलिए आ रही है कि अफसर सुनते नहीं है। इसीलिए सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पा रहा है। इसी दौरान ये सवाल भी उठा कि किसानों और कामगारों से जुड़े दो संगठन पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं।
प्रभारी मंत्री-विधायक फिर निशाने पर- जिलों के प्रभारी मंत्री व विधायक फिर कोर ग्रुप के निशाने पर रहे। सदस्यों ने कहा कि वे जिलों में नहीं जा रहे। लिहाजा तय हुआ कि प्रभारी मंत्री जिलों में जाएं तो पहले कार्यकर्ताओं की बैठक लें। इसके बाद अफसरों मिलें।
एक हजार से ऊपर की ग्राम पंचायतों में रात रुकें नेता : तोमर
केंद्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि नेताओं को 1000 से अधिक आबादी की ग्राम पंचायतों में विधायकों के साथ बाकी लोगों को भी कम से कम एक रात रुकना चाहिए। यह ग्राम स्वराज का हिस्सा है। देश भर में ऐसी 21 हजार के करीब ग्राम पंचायतें चिह्नित की गई हैं, जिसमें पहुंच बनानी है।
भाजपा प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे की गैरमौजूदगी के कारण शारदा विहार आवासीय विद्यालय में यह बैठक रामलाल ने ली। इससे पहले यहीं पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा की समन्वय बैठक दो घंटे चली। इसमें रामलाल के अलावा संघ के सह सरकार्यवाह कृष्णगोपाल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, संगठन महामंत्री सुहास भगत व सह संगठन महामंत्री अतुल राय मौजूद थे। सीएम और रामलाल की मौजूदगी में ही विहिप ने बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने पर आपत्ति की।
बताया जा रहा है कि 2018 के विधानसभा और 2019 के चुनावों के मद्देनजर सीएम चाहते थे कि यह समन्वय बैठक हो। इसीलिए इसमें आरएसएस से जुड़े सात अनुषांगिक संगठनों को बुलाया गया था। इनसे सभी क्षेत्रों में कामकाज का ब्यौरा लिया गया। इनसे कहा गया है कि आने वाले एक साल बेहद अहम हैं। भारतीय किसान संघ को जिम्मा दिया गया है कि आने वाले दिनों में कोई बड़ा किसान आंदोलन न हो पाए। पूरी टीम किसानों से संवाद करके उनकी बात सरकार तक पहुंचाए।
अनुषांगिक संगठनों ने अधिकारियों के रवैये पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आरएसएस के आनुषांगिक संगठनों ने कहा कि उनको काम करने में दिक्कत इसलिए आ रही है कि अफसर सुनते नहीं है। इसीलिए सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पा रहा है। इसी दौरान ये सवाल भी उठा कि किसानों और कामगारों से जुड़े दो संगठन पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं।
प्रभारी मंत्री-विधायक फिर निशाने पर- जिलों के प्रभारी मंत्री व विधायक फिर कोर ग्रुप के निशाने पर रहे। सदस्यों ने कहा कि वे जिलों में नहीं जा रहे। लिहाजा तय हुआ कि प्रभारी मंत्री जिलों में जाएं तो पहले कार्यकर्ताओं की बैठक लें। इसके बाद अफसरों मिलें।
एक हजार से ऊपर की ग्राम पंचायतों में रात रुकें नेता : तोमर
केंद्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि नेताओं को 1000 से अधिक आबादी की ग्राम पंचायतों में विधायकों के साथ बाकी लोगों को भी कम से कम एक रात रुकना चाहिए। यह ग्राम स्वराज का हिस्सा है। देश भर में ऐसी 21 हजार के करीब ग्राम पंचायतें चिह्नित की गई हैं, जिसमें पहुंच बनानी है।

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