भेल प्रबंधन बना तानाशाह, दबाई जा रही कर्मचारियों की आवाज
- ऑल इंडिया भेल एम्प्लाईज यूनियन ने किया प्लांट कमेटी का किया बहिष्कार
- कर्मचारी विरोधी होने का प्रबंधन पर लगाया आरोप
- कर्मचारियों की समस्या की ओर नहीं दिया जा रहा ध्यान
- आंदोलन पर जाएगी यूनियन
दीपक राय की रिपोर्ट, भोपाल...
भेल प्रबंधन द्वारा आयोजित की गई प्लांट कमेटी की बैठक का तीव्र विरोध किया गया। ऑल इंडिया भेल एम्प्लाईज यूनियन ने विरोध जताते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया। यूनियन ने साफ किया कि प्रबंधन द्वारा लगातार तानाशाही पूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। बार-बार चेतावनी देने के बाद भी प्रबंधन का व्यवहार जारी है। यूनियन का आरोप है कि प्रबंधन कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहा। इसके कारण अब यूनियन भेल प्रबंधन की किसी भी बैठक में शामिल नहीं होगी। जब तक कि कर्मचारियों की समस्याएं हल नहीं की जाएंगी, यह बहिष्कार जारी रहेगा। यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष एवं इकाई महासचिव रामनारायण गिरी ने बताया कि हम भेल प्रबंधन को फिर आगाह करते हैं कि कर्मचारियों से जुड़ी निम्नलिखित समस्यायों को जल्द से जल्द सुलझाएं नहीं हो यूनियन आंदोलन को मजबूर होगी।
जबरन प्रताडि़त करना बंद करे प्रबंधन
कर्मचारियों पर भेल के कुछ अधिकारियों द्वारा बिना मतलब का प्रताडि़त करने एवं गलत तरीके से कार्य करवाने एवं नहीं करने पर उनकी सी.आर. खराब करने की धमकियां दी जा रही है। यह ठीक नहीं है। गेट पास की समस्या, रेगुलराइज की समस्या बनी हुई है, जिसे अधिकारी अपनी मर्जी से उपयोग कर कर्मचारियों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। मैनेजमेंट इस ओर ध्यान दे नही तो वाद-विवाद की स्थिति ने जिम्मेदारी स्वयं मैनेजमेंट की होगी।
अपने फायदे के लिए चूना लगा रहे अफसर
कारखाने में चंद अफसर अपने फायदे के लिए कारखाने को करोड़ों रुपये का चूना लगाने में लगे हुए हैं। यूनियन के द्वारा ऐसे लोगो के मय सबूत शिकायत की है। प्रबंधन द्वारा उन्हें सजा देने के उन्हें मलाईदार विभागों में ट्रांसफर कर पदोन्नत किया है। मैनजमेंट इस बड़े मुद्दे पर सक्रियता दिखाते हुए जल्द से जल्द छानबीन करे एवं दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही कर जिससे कि अन्य गोलमाल करने वाले अफसरों में भी भय का माहौल व्याप्त हो।
फीस वृद्धि पर मानमानी
भेल प्रबंधन किसी भी मुद्दे पर यूनियन से चर्चा किये बगैर तानाशाही करते हुए फैसले कर रही है चाहे वो स्कूल फीस वृद्धि हो ,चाहे स्कूल बस बंद करने का फैसला हो, चाहे टाऊनशिप में बिजली कटौती का मुद्दा हो , चाहे टाऊनशिप में पानी की सप्लाई का मुद्दा हो,मैनेजमेंट अपनी मनमानी पर उतारू है। कई दिनों से यूनियन की मांग रही है कि कैंटीन में बिना तेल का नाश्ता (नॉन ऑयली फूड) की सप्लाई की जाए लेकिन मैनेजमेंट के द्वारा इस पर भी कोई निर्णय नही लिया गया है जबकि डॉक्टर के द्वारा भी भेल के नाश्ते को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया गया है लेकिन मैनेजमेंट कर्मचारियों की सेहत से खिलवाड़ में लगी हुई है।
वेज रिवीजन सबसे बड़ी समस्या
यूनियन का कहना है कि वेज रिवीजन आज के समय मे बहुत बड़ा मुद्दा है लेकिन मैनेजमेंट ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए अधिकारियों के वेज रिवीजन का सर्कुलर दे दिया, लेकिन कर्मचारियों के वेज रिवीजन के संबंध में कोई चर्चा करने को तैयार नही है। यूनियन मांग करती है कि जल्द से जल्द जॉइंट कमेटी की मीटिंग करके यूनियन के चार्टर ऑफ डिमांड के अनुसार वेज रिवीजन का निर्धारण करे।
कर्मचारियों को धमकी देना बंद करे प्रबंधन
विभिन्न यूनियन के संयुक्त मोर्चे द्वारा बस चालू करने को लेकर शांतिपूर्ण कंपनी से बाहर 4 बजे के बाद आन्दोलन किया था, लेकिन मैनजमेंट ने तानाशाही करते हुए कर्मचारियों को लेटर थमा दिया यूनियन मांग करती है की समस्त कर्मचारी जिन्हें लेटर दिए है उनसे लेटर वापस ले कर कोई कार्यवाही न करे एवं कर्मचारियों को धमकाना बंद करे। जब तक मैनेजमेंट इन सभी मुद्दों का हल नही निकालती एवं अपना तानासाही रवैया नहीं ंछोड़ती यूनियन का मैनेजमेंट के साथ असहयोग ही रहेगा एवं जल्द से जल्द कर्मचारियों को साथ लेकर भोपाल से लेकर दिल्ली कॉरपोरेट आफिस तक बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
यूनियन ने प्रबंधन के सामने रखी यह मांगें
- अनुकंपा नियुक्ति पर जल्द से जल्द फैसला लिया जाए और उसे तत्काल प्रभाव से लागू करें
- कर्मचारियों की असामायिक मृत्यु पर 1 करोड़ रुपये की बीमा पॉलिसी की घोषणा की जाए
- कस्तूरबा हॉस्पिटल की खस्ताहाल व्यवस्था को दुरुस्त करके नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाए एवं स्पेशलिस्ट डॉक्टर एवं अनुभवी नर्सिंग स्टॉफ की नियुक्ति की जाए
- जब तक हॉस्पिटल में सुधार नहीं होता तब तक कस्तूरबा हॉस्पिटल में सिर्फ ओ.पी.डी. रखा जाए एवं आई.पी.डी. के समस्त मरीजो को रेफर किया जाए
- टाउनशिप को सुधारा जाए एवं कर्मचारियों को सुंदर, सुसज्जित एवं सिक्योर टाउनशिप की व्यवस्था की जाए
- कर्मचारियों की समस्याओं का निराकरण तय समय ज्यादा से ज्यादा 7 दिन के अंदर करना सुनिश्चित किया जाए

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