46 हजार स्कूलों को बंद करेगी मप्र सरकार, शिक्षकों पर बेरोजगारी का खतरा
दीपक राय, भोपाल...
मध्यप्रदेश में जल्द ही 46 हजार स्कूल बंद किये जाने की खबरें हैं। फिलहाल इस खबर की पुष्टि तो नहीं हुई है, लेकिन आम आदमी पार्टी ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है। शिक्षा के मामले में फिसड्डी मप्र सरकार अब गुणवत्ता सुधारने के नाम पर 46 हजार से ज्यादा प्राथमिक पाठशाओं को बंद करने जा रही है। इसके लिए सरकार एक स्कूल-एक परिसर की अवधारणा पर काम करने जा रही है। यानी पहली से लेकर 12वीं तक की कक्षाएं एक ही स्कूल भवन में लगेंगी। जहां शिक्षा की सभी सुविधाएं, लाइब्रेरी, लैब एवं विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता रहेगी। हालांकि सरकार का दावा है कि कोई स्कूल बंद नहीं होगा, बल्कि स्कूलों का विलय होगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में एक स्कूल एक परिसर की दिशा में स्कूलों के संचालन पर जोर दिया। स्कूल शिक्षा विभाग ने अगले साल की कार्ययोजना में छोटे-छोटे स्कूलों को पास के बड़े स्कूल में विलय करने की तैयारी कर ली है। हर 20 किमी के दायरे में एक परिसर-एक शाला खोलने के लिए 45 हजार 384 स्कूलों को चिह्नित किया गया है। जिनमें हायर सेकेंडरी के 1941 स्कूल, 2972 हाई स्कूल, 20 हजार 235 मिडिल स्कूल एवं 20 हजार 233 प्राथमिक शालाएं शामिल होंगी। जबकि 40 छात्रों से कम प्रवेश वाले ऐसे 40 हजार 102 प्राथमिक स्कूल एवं 6221 माध्यमिक स्कूलों को चिह्नित किया है, जिन्हं एक परिसर-एक शाला वाले स्कूलों में विलय किया जाएगा। इन स्कूलों में मौजूदा शिक्षकों के तबादले नहीं होंगे। बल्कि उन्हें शिक्षित कर दक्ष बनाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बैतूल में जिले हायर सेकंडीर स्कूल बैतूल बाजार को प्रायोगिक तौर पर विकसित किया है। जिसमें 4 प्राथमिक, 5 माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शामिल होंगे। इस स्कूल में अध्ययन शुरू हो गया है।
ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि इन स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों का क्या होगा जो यहां पढ़ा रहे हैं। उन पर बेरोजगारी का संकट मंडरा रहा है। औसतन 20 किमी के दायरे में इस तरह के स्कूल खुलेंगे। प्रदेश में भर में ग्रामीण क्षेत्र में सड़को का जाल बिछा है। ऐसे में बच्चों को लाने ले जाने के लिए स्कूल बस भी चलेंगी। स्कूल के पास भी बसें रहेंगी। राज्य सरकार स्कूल शिक्षा के ढांचे में बदलाव केंद्र की मोदी सरकार की एकीकृत शिक्षा योजना के तहत कर रही है। जिसके तहत सबको शिक्षा-अच्छी शिक्षा दी जाना है। इसमें नर्सरी से 12वीं तक लागू सर्व-शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और शिक्षक शिक्षा शामिल होगी। इसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना, विद्यार्थियों की शिक्षा-अर्जन की क्षमता में वृद्धि करना, स्कूली शिक्षा में सामाजिक असमानता को दूर करना, स्कूली शिक्षा व्यवस्था में न्यूनतम मानक निर्धारित करना, शिक्षा के साथ व्यवसायीकरण परीक्षण को बढ़ावा देना शामिल है। खास बात यह है कि मोदी सरकार की एकीकृत शिक्षा योजना तत्कालीन यूपीए सरकार ने तैयार की थी, लेकिन तब मप्र ने इस योजना को लागू करने से साफ इंकार कर दिया था। चालू साल में 459 करोड़ की लागत से 582 हायर सेकेण्डरी और 128 हाई स्कूलों के नवीन भवन बनेंगे। साथ ही 102 करोड़ से 2 हजार माध्यमिक और 829 हाई स्कूलों एव हायर सेकेण्डरी स्कूलों में फर्नीचर और प्रयोगशाला की व्यवस्था होगीै। हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी के लिये 11 हजार 700 नए पद मंजूर किए हैं। 629 हाई स्कूल और 329 हायर सेकेण्डरी स्कूलों का उन्नयन किया जा रहा है।

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