जिसने सरलता को पा लिया उसने भगवान को पा लिया : श्री राम सागर
- संगीतमयी श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का समापन
- 5 अप्रैल से 13 अप्रैल तक श्रद्धालुओं ने किया ज्ञान रसपान
- ग्राम रैपुरा, चित्रकूट के शुक्ला परिवार में हुआ आयोजन
- मुख्य यजमान वात्सलमयी पूजनीया माता जी रहीं
- जय प्रकाश शुक्ल व विजय प्रकाश शुक्ल के घर आयोजन
- आचार्य श्री राम सागर जी महाराज ने अपने मुखरबिंद से सुनाई कथा
- अपनी संतानों को अच्छे संस्कार दें
सच्चे मन से स्तुति पर मिटते हैं कष्ट
सच्चे मन से ईश्वर का स्मरण करने से कष्ट निवारण के लिए परमपिता परमात्मा तत्काल उपस्थित हो जाते हैं। जैसे ही कृष्णावतार प्रसंग और और नंदोत्सव प्रसंग आया वैसे ही गोकुल के आनंद की छटा छा गई और सभी श्रोता नंद के आनंद भयो गाते हुए नाचने लगे। ध्रुव चरित्र पर व्याख्यान देते हुए विश्वास से श्रद्धा जाग्रत होने और प्रेम स्वरूपा भक्ति के प्रभाव से ध्रुवत्व पद पाने का आध्यात्मिक विश्लेषण किया।
जीने का तरीका सिखाती है भागवत
महाराज ने कहा कि भागवत कथा जीवन जीने का तरीका सिखाती है। धर्म और सत्य का मार्ग भागवत पढऩे और सुनने से ही समझ में आता है। इसलिए जहां भागवत का पाठ सुनने का अवसर मिले हमें सुनना चाहिए। साथ ही इस पर मनन भी करना आवश्यक है। सत्य थोड़ा परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता। इसलिए हमेशा धर्म और सत्य के मार्ग पर ही चलना चाहिए।
सात्विक प्रवृत्ति के संत थे सुदामा
भगवान तो सद्गुणों पर ही रीझते हैं। सुदामा सात्विक प्रवृत्ति के संत थे। इसलिए हमेशा से ही भगवान कृष्ण के प्रिय रहे। गुणों में ऐसी ही चुंबकिय शक्ति होती है कि उसकी ओर लोग खिंचे चले आते हैं। उन्होंने कहा कि भागवत ब्रह्म है। भागवत पुराण का एक-एक शब्द भगवान के मुंह से निकला है। जो मनुष्य भागवत कथा का श्रवण करता है, उसे मुक्ति मिल जाती है और व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने गोविंद की महिमा का गान करते हुए कहा कि असली राजा वही है, जो अपनी प्रजा को आध्यात्म की ओर प्रेरित करे, यथा दृष्टि बदलने से सृष्टि बदल जाती है। प्रभु कहते हैं कि यदि कोई भाव बदलकर मेरे चरणों मे आए, तो मैं उन्हें अपना लेता हूं। अर्थात जो अपने मन आत्मा को पवित्र कर के ईश्वर शरण में जाए, तो ईश्वर उन्हें अपनी छत्र छाया देते हैं।
जब अत्याचार बढ़ता है प्रभु का अवतार होता है
श्री राम सागर ने कहा कि जब धरती पर पाप और अत्याचार बढ़ता है तब प्रभु धर्म की स्थापना और दुष्टों का संहार करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। भगवान अपने भक्तों के उद्धार के लिए और ऋषि मुनियों को दर्शन देने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। ऋषि मुनि योगी तपस्वी भगवान के दर्शन के लिए हजारों वर्ष कठिन तपस्या मे लीन रहते हैं। उनको दर्शन देने के लिए भी प्रभु धरा धाम पर प्रकट होते हैं।
अपनी संतानों को अच्छे संस्कार दें
महाराज जी ने कहा कि हमें अपनी संतान को अच्छे संस्कार देने चाहिए। उन्हें अपने धर्म संस्कृति और संस्कारों के बारे मे बताना चाहिए कि कैसे भगवान ने अपने माता पिता गुरु मित्र और भाईयों के साथ मिलकर धर्म की रक्षा की।
कब-कब क्या हुआ
शुक्ला परिवार के जयप्रकाश शुक्ला ने बताया कि परिवार की मुख्य यजमान वात्सलमयी पूजनीया माता जी रहीं। जय प्रकाश शुक्ल व विजय प्रकाश शुक्ल के घर आयोजन किया गया। प्रथम दिन 5 अप्रेल को कलश यात्रा एवं भागवत माहात्म, द्वितीय दिवस 6 अप्रैल को कुन्ती स्तुति परीक्षित श्राप, श्रीशुकागमन, तृतीय दिवस 7 अपे्रल को सती चरित्र एवं ध्रुवोपाख्यान का प्रसंग ने धार्मिक माहौल बनाया। चतुर्थ दिवस 8 अप्रेल को भरत चरित्र एवं कृष्ण जन्म, पंचम दिवस 9 अप्रैल को नन्दोत्सव, बाललीला, गोवर्धन लीला का मंचन हुआ। छटवे दिन 10 अप्रेल को कंश वध, रुक्मणि विवाह, सातवे दिन 11 अप्रेल को सुदामा चरित्र, परीक्षितमोक्ष, आठवे दिन 12 अप्रैल को श्रीमद भगवत गीता पाठ एवं अग्निवास किया गया। वहीं 13 अप्रैल को अंतिम दिन हवन, गोदान, पूर्णाहूति के साथ ही भंडारा का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जय प्रकाश शुक्ल, विजय प्रकाश शुक्ल, राजेंद्र प्रसाद पांडेय, रामकांत द्विवेदी ने भक्तों का स्वागत किया।













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