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PHD के बाद 3 अनुभव वाले भी बन सकेंगे गाइड

Ph.D.

दीपक राय की रिपोर्ट,  भोपाल।। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वाले छात्रों के लिए राहत भरी खबर है। विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों में पदस्थ असिस्टेंट प्रोफेसर अब पीएचडी के बाद तीन साल के टीचिंग अनुभव के आधार पर गाइड बन सकेंगे। अभी तक इनके लिए पीएचडी के बाद पांच साल का टीचिंग अनुभव जरूरी था। पीएचडी के आवेदनों की बढ़ती संख्या और गाइड की कमी को देखते हुए विश्वविद्यालय ने पीएचडी एक्ट में संशोधन किया है।

53 फैकल्टी पीएचडी धारक
विवि द्वारा नैक मूल्यांकन के लिए तैयार सेल्फ स्टडी रिपोर्ट के अनुसार इस समय विवि के यूटीडी व यूआईटी में कार्यरत करीब 53 फैकल्टी पीएचडी धारक हैं। इनमें 44 नियमित और 9 अस्थाई फैकल्टी हैं जो पीएचडी हैं। पीएचडी धारकों में सबसे कम संख्या प्रोफेसर्स की है, जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर सबसे ज्यादा पीएचडीधारी है।


21 असिस्टेंट प्रोफेसर हैं पीएचडी धारक
विवि के अधिकारियों का कहना है कि जिस संख्या में छात्र पीएचडी के लिए आवेदन कर रहे हैं, उसके अनुपात में गाइड की संख्या कम है। यूजीसी के नियमानुसार एक गाइड एक समय में अधिकतम 8 रिसर्च स्कॉलर को ही पीएचडी करा सकता है। विवि के पास करीब 21 असिस्टेंट प्रोफेसर हैं जो पीएचडी हैं लेकिन इनमें से ज्यादातर के पास पांच साल का अनुभव नहीं है। इस समस्या को देखते हुए विवि ने विवि अधिनियम के अध्यादेश 11 में संशोधन किया है।
नियम यूजीसी के अनुसार ही रहेंगे
परीक्षा नियंत्रक डॉ. एके सिंह के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर के ही नियम में संशोधन किया गया है। प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के लिए गाइड बनने के नियम पूर्ववत रहेंगे। असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए भी बाकी के नियम यूजीसी के अनुसार ही रहेंगे।


यह हैं गाइड बनने के नियम
-पीएचडी के बाद तीन साल के टीचिंग अनुभव के साथ ही जिस विषय में पीएचडी की है उसमें कम से कम पांच रिसर्च पेपर प्रतिष्ठित जर्नल मे प्रकाशित होना अनिवार्य है। या फिर दो इंडियन या एक इंटरनेशनल पेटेंट होना चाहिए।
-प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर- जिस विषय में पीएचडी की है उसमें कम से कम पांच रिसर्च पेपर प्रतिष्ठित जर्नल मे प्रकाशित होना अनिवार्य है। या फिर दो इंडियन या एक इंटरनेशनल पेटेंट होना चाहिए।

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