लाठियों को तेल पिला रहीं हुरियारिनें
बरसाने की होली की तैयारी शुरू
10 क्विंटल टेसू के फूल का आर्डर
मध्य प्रदेश के ग्वालियर से भी जाते हैं फूल
लठमार होली का भी खुमार रहता है चरम पर
बरसाना, ईएमएस। उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मी के बीच होली की तैयारी शुरू हो चुकी है। बरसाना की विश्वप्रसिद्ध होली के लिए 10 क्विंटल टेसू के फूलों का ऑर्डर दिया गया है। यह फूल कोलकाता, ग्वालियर और हाथरस से मंगाए जा रहे हैं। इनसे करीब दो हजार लीटर टेसू का रंग तैयार होगा। श्यामा श्याम के अनूठे प्रेम की रसभरी होली का आनंद लेने को समूचा ब्रज मंडल उत्सुक है।
लठमार रंगीली होली की तैयारी भी शुरू हो गई है। इस होली की खास बात यह है कि लाडली मंदिर में प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल किया जाता है। टेसू से रंग बनाया जाता है। इस बार 10 टन टेसू के फूलों की मांग की गई है। 22 फरवरी से इसकी तैयारी शुरू कर दी जाएगी। टेसू के फूल मिलते ही इन्हें सुखाया जाएगा। इसके बाद इन्हें तीन दिन तक पानी में डालकर गलाया जाता है। तीन दिन बाद और होली से एक दिन पहले बड़े-बड़े कड़ाहों में इन फूलों को गरम पानी में डालकर उबाला जाता है। रंग केसरिया आए और उसकी पकड़ मजबूत हो, इसके लिए इसमें कुछ मात्रा में चूना मिलाया जाता है। इसके साथ ही सुगंध के लिए इत्र मिलाया जाता है। इस तरह तैयार रंग को बड़े बड़े 10-12 ड्रमों में भर दिया जाता है।
लाठियों को तेल पिला रहीं हुरियारिनें
नंदगांव के हुरियारों पर अपनी प्रेमपगी लाठियां बरसाने के लिए बरसाने की हुरियारिनों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। दैनिक जागरण से बात करते हुए हुरियारिन इंदु गौड़ ने बताया कि दूध, बादाम, फल आदि का सेवन शुरू कर दिया है। वहीं, लाठियों को तेल पिलाने और चलाने का अभ्यास प्रारंभ कर दिया है।
10 क्विंटल टेसू के फूल का आर्डर
मध्य प्रदेश के ग्वालियर से भी जाते हैं फूल
लठमार होली का भी खुमार रहता है चरम पर
बरसाना, ईएमएस। उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मी के बीच होली की तैयारी शुरू हो चुकी है। बरसाना की विश्वप्रसिद्ध होली के लिए 10 क्विंटल टेसू के फूलों का ऑर्डर दिया गया है। यह फूल कोलकाता, ग्वालियर और हाथरस से मंगाए जा रहे हैं। इनसे करीब दो हजार लीटर टेसू का रंग तैयार होगा। श्यामा श्याम के अनूठे प्रेम की रसभरी होली का आनंद लेने को समूचा ब्रज मंडल उत्सुक है।
लठमार रंगीली होली की तैयारी भी शुरू हो गई है। इस होली की खास बात यह है कि लाडली मंदिर में प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल किया जाता है। टेसू से रंग बनाया जाता है। इस बार 10 टन टेसू के फूलों की मांग की गई है। 22 फरवरी से इसकी तैयारी शुरू कर दी जाएगी। टेसू के फूल मिलते ही इन्हें सुखाया जाएगा। इसके बाद इन्हें तीन दिन तक पानी में डालकर गलाया जाता है। तीन दिन बाद और होली से एक दिन पहले बड़े-बड़े कड़ाहों में इन फूलों को गरम पानी में डालकर उबाला जाता है। रंग केसरिया आए और उसकी पकड़ मजबूत हो, इसके लिए इसमें कुछ मात्रा में चूना मिलाया जाता है। इसके साथ ही सुगंध के लिए इत्र मिलाया जाता है। इस तरह तैयार रंग को बड़े बड़े 10-12 ड्रमों में भर दिया जाता है।
लाठियों को तेल पिला रहीं हुरियारिनें
नंदगांव के हुरियारों पर अपनी प्रेमपगी लाठियां बरसाने के लिए बरसाने की हुरियारिनों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। दैनिक जागरण से बात करते हुए हुरियारिन इंदु गौड़ ने बताया कि दूध, बादाम, फल आदि का सेवन शुरू कर दिया है। वहीं, लाठियों को तेल पिलाने और चलाने का अभ्यास प्रारंभ कर दिया है।

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