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राहुल से हाथ मिलाएंगे अखिलेश

rahul gandhi and akhilesh yadav

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में अगले हफ्ते होगा चुनावी गठजोड़
लखनऊ।
यूपी में चुनावी रणभेरी बजने के साथ ही सूबे का सियासी पारा गरमा गया है। चुनाव की घोषणा के एक दिन बाद ही बसपा ने 100 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी। बीजेपी की भी शुक्रवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शुरू हो गई है। यूपी चुनावों के लिहाज से इस बैठक को अहम माना जा रहा है। इन सबके बीच कांग्रेस की तरफ से सीएम पद की उम्मीदवार शीला दीक्षित ने अखिलेश के समर्थन की बात कहकर स्पष्ट कर दिया है कि सपा और कांग्रेस के बीच गठजोड़ की संभावनाएं बन रही हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक सपा और कांग्रेस के बीच अगले सप्ताह की शुरुआत में गठबंधन पर मुहर लग सकती है। इस बात की संभावना भी व्यक्त की गई है कि अखिलेश यादव इस सिलसिले में जल्दी ही राहुल गांधी से दिल्ली में मुलाकात कर सकते हैं। राहुल गांधी फिलहाल विदेश में हैं और उनके सप्ताहांत में दिल्ली लौटने की संभावना है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच नौ जनवरी को मुलाकात हो सकती है।

मजबूत हुआ अखिलेश खेमा
उल्लेखनीय है कि सपा में तख्तापलट के बाद माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर अखिलेश खेमा मजबूत स्थिति में है और कांग्रेस भी इस गुट के साथ गठबंधन की पक्षधर है। अखिलेश पहले भी कांग्रेस के साथ गठबंधन की वकालत करते हुए कहते रहे हैं कि वैसे तो सपा अपने दम पर सत्ता में आएगी, लेकिन कांग्रेस के साथ गठबंधन होने की स्थिति में 300 सीटें जीतने में वे कामयाब होंगे। अब अखिलेश के लिए इसलिए भी कांग्रेस के साथ गठबंधन अहम माना जा रहा है क्योंकि सपा में मचे घमासान के चलते परंपरागत अल्पसंख्यक तबके के वोटों के बिखरने का अंदेशा है और बसपा द्वारा 97 मुस्लिम प्रत्याशी उतारने के बाद सपा के लिए इस वोटबैंक को अपने पाले में रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत के रूप में ऐसे ही किसी सियासी गठजोड़ की अब मजबूरी बन चुकी है।

कांग्रेस खत्म करना चाहती है वनवास
उधर कांग्रेस पिछले 28 वर्षों से राज्य की सत्ता से बाहर है और इस बार के चुनावों में वह किसी भी सूरत में सम्माजनक स्थिति में आना चाहती है। पिछले विधानसभा चुनाव में उसको 27 सीटें मिली थीं। मौजूदा सियासी परिस्थितियों में राज्य में बीजेपी के उभार ने उसे बेचैन कर दिया है। उसको रोकने के लिए अखिलेश के साथ हाथ मिलाने में कांग्रेस को फायदा नजर आ रहा है।

ऐसा होगा गठबंधन
90-100 सीटें कांग्रेस को मिल सकती हैं

बसपा ने जारी की 100 प्रत्याशियों की दूसरी सूची
22 मुस्लिमों को दिए टिकट
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए अपने 100 प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर दी। पार्टी विधानसभा की कुल 403 में से अब तक 200 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी है और इनमें से 58 सीटों पर मुसलमानों को टिकट दिए गए हैं। बसपा की गुरुवार को घोषित 100 प्रत्याशियों की पहली सूची में जहां 36 मुसलमान थे, वहीं दूसरी सूची में इस कौम के 22 लोगों को टिकट दिए गए हैं। प्रदेश की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है और मुस्लिम मतदाता प्रदेश की करीब 125 सीटों पर जीत-हार तय कर सकते हैं। दलित-मुस्लिम-ब्राहमण के समीकरण को लेकर चुनाव जीतने की जुगत लगा रही बसपा ने मुसलमानों के एकजुट वोट की ताकत को समझते हुए इस कौम के लोगों का चुनाव टिकट वितरण में खास ख्याल रखा है।


मैं चोर दरवाजे से राजनीति का आदी नहीं: अमर सिंह
अमर सिंह ने लखनऊ में कहा कि मैं एक साथ पांच विचारधाराओं के साथ नहीं हूं। मैं चोर दरवाजे से राजनीति करने का आदी नहीं हूं। मैं अखिलेश की उन्नति में बाधक नहीं हूं। उनको यशस्वी होने का आशीर्वाद देता हूं। मैं लखनऊ इसलिए ही आया हूं कि पिता-पुत्र में मेल हो।

अखिलेश से मिले शिवपाल
शिवपाल सिंह यादव पार्टी में अपने प्रतिद्वंद्वी, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात करने उनके आवास पर पहुंचे। पिछले रविवार के विवादित राष्ट्रीय अधिवेशन में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाये जाने के बाद शिवपाल ने पहली बार अखिलेश से मुलाकात की। माना जा रहा है कि वह समझौते का कोई फॉर्मूला लेकर पहुंचे थे।

अमर का इस्तीफा संभव
परिवार में झगड़े की जड़ बताये जा रहे पार्टी महासचिव अमर सिंह सपा से इस्तीफा दे सकते हैं। उन्हें ही इस पूरे विवाद का सूत्रधार बताया जा रहा है।

बाप-बेटे में हो सकती है सुलह
समाजवादी पार्टी में सुलह की कोशिशों के बीच मुलायम सिंह यादव को लेकर बात नहीं बन पा रही है।अखिलेश चाहते हैं कि सिर्फ 3 महीने के लिए अध्यक्ष पद उनके पास रहे, फिर मुलायम को दे दिया जाए। क्योंकि उन्हें डर है कि अमर सिंह से प्रभावित होकर वह कुछ ऐसे निर्णय न ले लें, जिससे पार्टी और उनका नुकसान हो जाए। उधर, शिवपाल यादव राज्य की राजनीति और अपनी सीट (जसवंत नगर) छोडऩे को तैयार हो गए हैं। साथ ही अमर सिंह भी पार्टी की कलह सुलझाने के लिए पार्टी छोडऩे को तैयार हैं खैर सुलह को लेकर मुलायम सिंह यादव के घर आज बैठक हुई। मुलायम से मिलने शिवपाल यादव और अमर सिंह पहुंचे। इससे पूर्व शिवपाल यादव आज अखिलेश यादव से भी मिले थे। वहीं आजम खान की कोशिशें भी जारी हैं। 

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