चुनाव- 2018 : कांग्रेस के कई विधायकों का टिकट खतरे में
- चार-पांच चुनाव लड़ चुके बुजुर्गों को टिकट नहीं देगी कांग्रेस
- शिव 'राज' को खत्म करने कांग्रेस ने बनाया प्लान
- युवाओं पर किस्मत आजमाएगी कांग्रेस
दीपक राय, भोपाल...
वर्ष 2003 के बाद से तीन बार विधानसभा में बुरी तरह शिकस्त पाने वाली कांग्रेस में खुदबुदाहट मची है। अब जबकि 2018 के विधानसभा चुनाव करीब हैं ऐसे में वह हर हाल में यह चुनाव जीतना चाहती है। 15 साल बाद राज्य में वापसी के लिए पार्टी ने नया प्लान बनाया है। यह प्लान गुजरात में मिली सफलता के आधार पर बनाया गया है। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस टिकट वितरण में बड़ा बदलाव करेगी।इस बार पार्टी गुजरात की तर्ज पर युवा और नये चेहरों को आजमायेगी। जबलपुर पहुंचे पार्टी के प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने यह प्लान सुझाया है। इसके बाद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को पसीना आ गया। बावरिया ने साफ-साफ कह दिया है कि जो वृद्ध नेता चार या पांच चुनाव लड़ चुके हैं और उम्र में वरिष्ठ नागरिक बन चुके हैं, ऐसे लोगों को विधानसभा में टिकट नहीं दिये जाएंगे।
इस बार कांग्रेस की प्राथमिकता पहले टिकट बांटने की होगी, ताकि उम्मीद्वारों को तैयारी का पूरा समय मिल पाये। खासतौर पर जिन सीटों पर पार्टी का प्रदर्शन ठीक नहीं रहा वहां 6 महीने पहले ही टिकट वितरण का प्रयास होगा।
इसलिए बनाई नई रणनीति
मध्य प्रदेश में 2003 विधानसभा चुनाव में हारने के बाद कांग्रेस 2008 और 2013 के चुनावों में करारी शिकस्त पा चुकी है। दोनों ही बार पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी थी। ऐसे में कांग्रेस इस बार नयी रणनीति के तहत मैदान में उतरती दिख रही है।

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