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PM मोदी का शायराना अंदाज - मैं व्यग्र हूं, अधीर हूं, आतुर हूं

नई दिल्ली। 15 अगस्त के मौके पर अपने मौजूदा कार्यकाल के आखिरी भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शायराना अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने करीब 82 मिनट के अपने भाषण के आखिरी में बताया कि आखिर उन्होंने देश के लिए क्या सपना देखा है और वे क्या करना चाहते हैं? पढ़ें मोदी की कही उन्हीं पंक्तियों को -
हम निकल पड़े हैं प्रण करके, अपना तन-मन अर्पण करके
जिद है एक सूर्य उगाना है, अम्बर से ऊँचा जाना है
एक भारत नया बनाना है, एक भारत नया बनाना है।

अपने मन में एक लक्ष्य लिए, मंज़िल अपनी प्रत्यक्ष लिए

हम तोड़ रहे हैं जंजीरें, हम बदल रहे हैं तस्वीरें
ये नवयुग है, नव भारत है, खुद लिखेंगे अपनी तकदीरें
मैं व्यग्र हूं, अपने नागरिकों की Quality of Life को सुधारने के लिए
मैं अधीर हूं, क्योंकि हमें ज्ञान-आधारित चौथी औद्योगिक क्रांति की अगुवाई करनी है
मैं आतुर हूं, क्योंकि मैं चाहता हूं कि देश अपनी क्षमताओं और संसाधनों का पूरा लाभ उठाए: PM
मैं बेसब्र हूं, क्योंकि जो देश हमसे आगे निकल चुके हैं, हमें उनसे भी आगे जाना है
मैं बेचैन हूं, हमारे बच्चों के विकास में बाधा बने कुपोषण से देश को मुक्त कराने के लिए
मैं व्याकुल हूं, देश के हर गरीब तक समुचित Health cover पहुंचाने के लिए, ताकि वो बीमारी से लड़ सके: PM
हर भारतीय के घर में शौचालय हो- Sanitation for All
हर भारतीय अपने मनचाहे क्षेत्र में कुशलता हासिल कर सके- Skill for All
हर भारतीय को अच्छी औऱ सस्ती स्वास्थ्य सेवा सुलभ हो- Health for All
हर भारतीय को बीमा का सुरक्षा कवच मिले- Insurance for All
हर भारतीय इंटरनेट की दुनिया से जुड़ सके- Connectivity for All
हर भारतीय के पास अपना घर हो- Housing for All
हर भारतीय के घर में बिजली कनेक्शन हो- Power for All
हर भारतीय की रसोई धुआं मुक्त हो- Clean Cooking for All
हर भारतीय के घर में जरूरत के मुताबिक जल पहुंचे- Water for All

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