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मध्यप्रदेश में बैंकों का नॉन परफॉर्मिंग एसेट एक साल में 94% बढ़ा, फिर भी घर और कार के लिए मिल रहा भरपूर कर्ज

भोपाल.  बेशक डूबे कर्ज बैंकों के लिए चिंता का सबब हैं। मध्यप्रदेश में सिर्फ एक साल में ही बैंकों का नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) 94% तक बढ़ चुका है। बैंकों की पूंजी का बेस लगातार घट रहा है, इसके बाद भी बैंकों द्वारा भरपूर कर्ज दिया जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इन बैंकों की पूंजी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। सबसे अहम बात यह है कि एनपीए बढ़ने के बाद भी बैंकों में जमा और कर्ज दोनों में बढ़ोतरी हो रही है। हाल फिलहाल बढ़ते एनपीए के चलते कई बैंकों की पूंजी का बेस काफी घट चुका है। कॉर्पोेरेशन बैंक और यूनियन बैंक जैसी अहम बैंकों की मध्यप्रदेश में पूंजी आधी घट गई है। इसी तरह इंडियन बैंक की पूंजी एक साल में 25% तक घट गई है। आरबीआई ने सबसे अधिक एनपीए वाले प्रदेश के 11 बैंकों को रेड जोन में डाला है। 10 बैंकों को ग्रीन जोन में जरूर रखा गया है, लेकिन एनपीए के लिहाज से वे ज्यादा आरामदायक स्थिति में नहीं हैं। इसलिए उनके डूबे कर्ज की वसूली के लिए लगातार कोशिशें की जा रहीं हैं।
805% बढ़ा एसबीआई का एनपीए : बैंकों में एनपीए एक साल में किस तरह बढ़ा इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक का एनपीए एक साल में 805% बढ़ गया। इसकी वजह यह भी है कि बैंक का कारोबार दूसरी बैंकों की तुलना में बेहद ज्यादा है। पंजाब नेशनल बैंक का एनपीए एक साल में 86% तक बढ़ा। पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन बैंक दो अन्य सरकारी बैंक हैं जिनका एनपीए 50% से ज्यादा बढ़ा। इनकी तुलना में आंध्रा बैंक का एनपीए महज 15% ही बढ़ा।
11 फीसदी बढ़ा बैंकों का कारोबार : मध्यप्रदेश में बैंकों का कारोबार पिछले एक साल में 11.05% तक बढ़ गया। जून-17 तक बैंकों का कुल कारोबार 5,78,280 करोड़ रुपए था। जून-18 तक यह 6,42,172 करोड़ रुपए हो गया। इसमें बैंक के डिपॉजिट 3,68,859 करोड़ रुपए थे, जबकि कर्ज 2,73,313 करोड़ रुपए था। कृषि क्षेत्र के कर्ज 9.20% बढ़कर 92,976 करोड़ रुपए हो गए। पिछले एक साल में कृषि क्षेत्र में बैंकों का एनपीए 7,958 करोड़ रुपए से बढ़कर 9,843 करोड़ हो गया है।
हालत खराब फिर भी बीते साल से ज्यादा कर्ज बांटे : बैंक भले ही डूबते कर्ज से परेशान हैं, लेकिन वे कर्ज देने में पीछे नहीं रहे। पिछले एक साल में बैंकों ने कुल 35,521 करोड़ रुपए के कर्ज बांटे। यह पिछले साल 2017 से 14.94% ज्यादा थे। ठीक एक साल पहले कर्ज में वृद्धि दर 13.81% थी। आरबीआई चाहती है कि बैंक भले ही अपने डूबे कर्ज के लिए प्रोविजनिंग यानी डूबे कर्ज की राशि अलग रखें, लेकिन अपनी दक्षता बढ़ाते रहें।
बैंकों का धन बढ़ा : मध्यप्रदेश में संकट के बाद भी सिंडिकेट बैंक की पूंजी पिछले एक साल में दोगुनी हो गई। यह पिछले साल 1,602 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 3,161 करोड़ हो गया है। इसी तरह विजया बैंक की भी पूंजी भी 77% बढ़ी।
उचित उपाय किए जा रहे हैं : जो बैंक एनपीए के लिहाज से ज्यादा मुश्किल में थे, आरबीआई ने उन्हें प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) की श्रेणी में लिया है। इनकी स्थिति बेहतर करने के लिए सभी उचित उपाय किए जा रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि उनके डिपॉजिट और क्रेडिट बढ़ रहे हैं। केवल एनपीए खातों की प्रोविजनिंग के चलते उन्हें घाटा हो रहा है।  -अजय व्यास, समन्वयक, एसएलबीसी, मध्यप्रदेश
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