खुशखबरी... संविदा भर्तियां बंद, शिक्षकों की भर्ती भी नियमित होगी
- 70 हजार पद खाली है शिक्षकों के मध्यप्रदेश में
- 31 हजार संविदा शिक्षकों की भर्ती मई-जून से शुरू होगी
- बीएड, डीएड, डिग्रीधारियों के आएंगे अच्छे दिन
दीपक राय, की रिपोर्ट ...
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बेरोजगार युवाओं को एक बड़ी खुशखबरी दे रहे हैं। वे संविदा सिस्टम को खत्म कर रहे हैं। इसी कड़ी में शिवराज सरकार अब संविदा की बजाय शिक्षकों के नियमित पदों पर भर्ती करेगी। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। सबसे पहले मई जून में 31 हजार 658 पदों पर भर्ती शुरू होगी। अध्यापकों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन करने की घोषणा हो गई और सरकार ने तत्काल भर्ती से हाथ खींच लिया। नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (आरटीई) के तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वर्तमान में 70 हजार शिक्षकों की कमी है। खाली पदों पर संविदा शिक्षकों की भर्ती की कवायद वर्ष 2013 से चल रही है। चुनावी साल होने के कारण सरकार ने एक बार फिर भर्ती प्रक्रिया में रुचि दिखाई थी, लेकिन चयन परीक्षा से ठीक पहले अध्यापकों के संविलियन का मुद्दा आ गया। सूत्र बताते हैं कि चयन परीक्षा टालने के लिए सरकार ने इसी को आधार बनाया है। नई दुनिया ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक वैसे तो सरकार विधानसभा चुनाव से पहले चयन परीक्षा कराने की तैयारी में थी, लेकिन विभाग ने संविलियन की बात आते ही शिक्षकों के नियमित पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पर काम शुरू कर दिया। हालांकि इसमें छह से सात महीने का समय लग सकता है। दरअसल, मुख्यमंत्री ने अध्यापकों का विभाग में संविलियन करने की घोषणा तो कर दी है, लेकिन नीतिगत निर्णय अभी नहीं हुआ है। यह मामला कैबिनेट में जाएगा, जो तय करेगी कि अध्यापकों का संविलियन शिक्षकों के डाइन कैडर (समाप्त कैडर) को पुनर्जीवित कर किया जाए या नया कैडर तैयार किए जाए। संविलियन का निर्णय होने के बाद शिक्षकों के नियमित पदों पर भर्ती का निर्णय भी कैबिनेट ही लेगी। इस प्रक्रिया में तीन से चार माह लग सकते हैं। इसके बाद नियमित पदों पर भर्ती के नियम तैयार होंगे। इसमें भी दो से तीन माह का समय लगेगा। इसलिए भर्ती अगले साल ही होने की संभावना है। राज्य सरकार पिछले छह साल में शिक्षकों की भर्ती नहीं करा पाई है। चुनावी फायदा उठाने के लिए सरकार ने वर्ष 2013 में भर्ती कराने की घोषणा की थी। इसके बाद भर्ती नियम बनाने और उनमें लगातार संशोधन करने में पांच साल निकाल दिए। अब दूसरे विधानसभा चुनाव आए तो सरकार शिक्षकों की भर्ती को लेकर फिर से गंभीर हो गई। सरकार को चुनाव में इसका फायदा मिलने की उम्मीद है। अब जबकि भर्ती प्रक्रिया रुक गई है, तब भी सरकार के पास वोटरों को बताने के लिए है कि हम संविदा नहीं अब नियमित शिक्षक के पदों पर भर्ती करेंगे। हालांकि ऐसा कहकर फिर अगले चुनाव तक मामला खींचा जा सकता है।

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