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मप्र में बैंकों का एनपीए बढ़कर हुआ 33.62%, वसूली के लिए यूपी के मॉडल पर होगा विचार

भोपाल.कर्ज लेकर समय पर अदायगी न करने के लगातार बढ़ते प्रकरण से परेशान बैंक अब वसूली के उपाय और सख्त करने पर विचार कर रही है। इसके लिए उसने उत्तर प्रदेश में आरआरसी मॉडल तैयार करने वाली बैंक ऑफ बड़ोदा से रिपोर्ट मांगी है। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में 30 मई को होने वाले राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की बैठक में इस पर चर्चा की जाएगी। उसके बाद इसे मप्र में लागू करने के उपायों पर विचार होगा। इसमें बैंकों को कर्ज की अदायगी न करने वालों को कर्जदारों की संपत्ति को तत्काल अटेच करने में मदद करने का प्रावधान है।
क्या है यूपी का मॉडल
फिलहाल राज्य में बैंक सरफेसी एक्ट के तहत जिला प्रशासन के वसूली अधिकारियों को आवेदन भेजती है। यह देखने में आया है कि इस एक्ट के तहत बड़ी संख्या में बैंकों के आवेदन पेंडिंग हैं। उत्तर प्रदेश में बैंकों की शिकायत थी कि बेदखल की कार्रवाई में सुरक्षा देने के लिए पुलिस बड़ी फीस मांगती है। यह बैंकों को भारी पड़ रही है। बैंकों ने यह भी माना है कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति बेहतर है।
हाउसिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा एनपीए
बैंकों के लिए सबसे बड़ी चिंता की वजह है हाउसिंग सेक्टर में बढ़ता एनपीए। पिछले एक साल में इस सेक्टर में एनपी में गई राशि 66.95 फीसदी बढ़ गई है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में यह राशि 539 करोड़ थी, यह इस बार बढ़कर 895 करोड़ हो चुकी है। बैंक सभी डिफॉल्टर के घर अटेच करके उसकी नीलामी कर रहा है। वह इस प्रक्रिया में तेजी लाना चाहता है।
कहां-कितना एनपीए
सेक्टरमार्च-17मार्च-18अंतर
कृषि7398890820.41
एमएसएमई3220404925.73
एजुकेशन1101198.37
हाउसिंग53989566.95
अन्य5756136.67
प्राथमिकता वाले क्षेत्र11,84214,58423.15
गैर प्राथमिकता वाले4,601738760.56
कुल एडवांस16,44321,97133.62
एसएलबीसी मप्र के समन्वयक अजय व्यास के मुताबिक, बैंक एनपीए को निम्नतम स्तर तक लाना चाहती है। इसके लिए वह हर संभव उपाय कर रही है। इसमें राज्य सरकार की मदद से वसूली शामिल है। बैंक जिला प्रशासन से ज्यादा समन्वय बढ़ाना चाहता है।

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