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विधानसभा में माननीयों ने किया बच्चों से भेदभाव!


-43 हजार में से बच्चों पर केवल 4 हजार सवाल ही किये
-तेरहवीं विधानसभा पर शोध अध्ययन से निकले निष्कर्ष

दीपक राय,भोपाल। हमारे विधायक विधानसभा में कई समस्याओं को उठाते हैं, सदन में हल्ला मचाते हैं, लेकिन  देश के भविष्य के बारे में वे चर्चा नहीं करते। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। एक खबर इस समय सामने आई है जबकि कुपोषण के मामले में मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर है। प्रदेश के स्कूल 65 हजार से अधिक शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि लोकतंत्र में संसदीय संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार को चलाने, योजनाएं बनाने और उनकी निगरानी में संसदीय संस्थाओं की कार्यवाही अहम है। यह जितनी मजबूत होगी देश और समाज उतना ही मजबूत होगा। विधानसभा में जितने अधिक सवाल पूछे जाएंगे, जितनी अधिक चर्चा होगी मान सकते हैं कि परिस्थितियां उतनी ही तेज गति से बेहतर होंगी, लेकिन विधानसभा में महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवाल ही नहीं किये जाते। मध्यप्रदेश विधानसभा कार्यवाही पर  सामाजिक शोध संस्था विकास संवाद ने एक अध्ययन किया है। यह अध्ययन मप्र की तेरहवीं विधानसभा को लक्ष्य में रखकर किया गया है। अध्ययन में चौंकाने वाले निष्कर्ष सामने आए हैं। विधानभा से विशेष जानकारी जुटाने वाले  अमिताभ पांडेय ने बताया कि माननीय बच्चों से संबंधित सवालों पर इसलिए सवाल नहीं करते क्योंकि बच्चे वोटर नहीं हैं। विकास संवाद के राकेश मालवीय बताते हैं कि कुपोषण, बच्चियों से अपराध के मामले मध्य प्रदेश में बहुत अधिक होते हैं, ऐसे में विधायकों को इस संवेदनशील विषय पर अधिक चर्चा करनी चाहिए।


कब से कब तक चली विधानसभा
तेरहवीं विधानसभा 11 दिसम्बर 2008 से 10 दिसम्बर 2013 तक चली। इस दौरान कुल 17 सत्र हुए। 257 दिनों की अवधि में कुल 167 विधानसभा दिन की बैठक हुई। इस दौरान कुल 815 घंटे 47 मिनट सदन की कार्रवाही चली। इस दौरान कुल 54 हजार 590 प्रश्न प्राप्त हुए, इनमें से 11 हजार 493 प्रश्न निरस्त कर दिए यानी तेरहवी विधानसभा में कुल 43 हजार 97 प्रश्न पूछे गए, जबकि 1785 पूरक प्रश्न पूछे गए। इस दौरान कुल 8153 सूचनाएं प्राप्त हुईं, इनमें से 486 को शून्यकाल की सूचनाओं में परिवर्तित किया गया।

चार वर्गों में बांटे सवाल
इस अध्ययन में बच्चों से संबंधित सवाल को चार भाग पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा एवं संरक्षण में बांटा गया। स्वास्थ्य पर केवल 160, (0.37त्न)  पोषण पर 648 (0.80त्न)  सुरक्षा एवं संरक्षण पर 229 (0.53त्न)  एवं शिक्षा पर 3054 (7.08त्न) सवाल पूछे गए। इस तरह देखा जाए तो बच्चों से संंबंधित इन चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर कुल 4091 (9.49त्न) सवाल ही पूछे गए।

किस विषय पर सवाल
मानव संसाधन पर 1091, अधोसंरचना पर 942, नीति नियम पर 1719 और भ्रष्टाचार पर 167 प्रश्न शामिल हैं।

अब भी नहीं सुधर रही स्थिति
चौदहवीं विधानसभा में भी बच्चों से संबंधित सवालों की स्थिति में कोई खास बढ़ोत्तरी नहीं हुई। इस सत्र में छह दिन सदन की बैठक चली। इस दौरान कुल 1889 सवाल पूछे गए। इनमें बच्चों के मुद्दों पर कुल 81 सवाल हुए जो सीधे—सीधे बच्चों के अधिकारों से जुड़े हैं।

विपक्ष से ज्यादा सत्ता पक्ष ने पूछे सवाल
(बच्चों से जुड़े सवाल)
पार्टी सवाल
भाजपा 1982
कांग्रेस 1727
बसपा 196
निर्दलीय 81

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