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शिव 'राज' के झूठे वादे चित्रकूट में डुबाएंगे भाजपा की नांव



बारा अमराई गांव की आंगनवाड़ी कई सालों से बंद है। भवन में भूसा भर दिया गया है।


दीपक राय, चित्रकूट से ...
  • चित्रकूट उप चुनाव : भाजपा के खिलाफ लोगों में चरम पर आक्रोश
  • मौजूदा सीट बचाने में सफल हो सकती है कांग्रेस
  • भाजपा के लिए मुश्किल बनी भगवान राम की सीट
  • राम पथ गमन न बनने से संतों में आक्रोश
  • मझगवां से चित्रकूट तक सड़क बदहाल
  • गांवों तक पहुंच के लिए सड़क ही नहीं

भगवान राम के नाम पर वोट हासिल करने वाली भाजपा के लिए राम की वनवासस्थली गले की फांस बन गई है। हम चित्रकूट की बात कर रहे हैं। गौरतलब है कि सतना जिले की चित्रकूट विधानसभा में 9 नवंबर को उप चुनाव की वोटिंग होनी है। इस बीच, यहां पर प्रचार ने तेजी पकड़ ली है। भाजपा ने 20 वर्ष से संघ के लिए कार्य कर रहे शंकर दयाल त्रिपाठी को मैदान पर उतारा है। वहीं, कांग्रेस ने युवा नेता नीलांशु चतुर्वेदी को प्रत्याशी बनाया है। पिछले कई वर्षों से कांग्रेस के खाते में रही चित्रकूट सीट पर भाजपा को नाक के नीचे चने चबाने पड़ रहे हैं। कई गांवों से भाजपा के प्रतिनिधियों को उलटे पैर लौटाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 12 सालों में कई घोषणाएं की, लेकिन विकास आज तक नहीं किया।
विकास की दृष्टि से अतिपिछड़े चित्रकूट के लोगों में शिवराज सरकार के प्रति बेहद गुस्सा है। लोगों का कहना है कि पिछले 15 साल से प्रदेश में भाजपा की सरकार है, लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चित्रकूट में विकास नहीं होने दिया। लोगों का आरोप है कि यहां पर दिवंगत विधायक प्रेम सिंह कांग्रेस से थे, इसलिए शिवराज ने क्षेत्र से पक्षपात किया। मतदाता रोष जताते हुए कह रहे हैं कि हमारे क्षेत्र में न सड़क हैं, न बिजली, न ही पीने योग्य जल है। जंगली क्षेत्र होने के बावजूद जंगली पशुओं द्वारा फसलों की नुकसानी की शिकायत तक नहीं लिखी जाती। पिछले कई वर्षों से फसल नुकसानी का आज तक मुआवजा नहीं मिला।

बारा अमराई गांव की अनीता मिश्रा बेहद गरीबी में जीवनयापन कर रही हैं। उनके पास घर नहीं है, खुले आसमान में रहने को मजबूर हैं। उनके विकलांग बेटे को पेंशन भी नही मिलती।


मुख्यमंत्री के अधूरे वादे

1. राम पथ गमन : 10 साल पहले ऐलान, काम शुरू ही नहीं हुआ
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चित्रकूट में राम पथ गमन का निर्माण कराने की घोषणा वर्ष 2007 में की थी, लेकिन आज तक यह योजना जमीन पर नहीं उतरी। भगवान राम मध्य प्रदेश के जिन रास्तों से होकर गुजरे वहां राम वन गमन पथ बनाया जाना था।

2. सड़क ही नहीं : 20 किमी तक सड़क ही नहीं
चित्रकूट में प्रतिदिन हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं से भरे वाहन आते हैं। सतना से चित्रकूट की दूरी करीबी 70 किमी है। इसी रास्ते से वाहनों का आवागमन होता है, लेकिन मझगवां के बाद करीब 25 किमी तक सड़क ही नहीं है। यहां पर सड़क बनाये जाने का काम चल रहा है, लेकिन पिछले 3 सालों से अब तक सड़क नहीं बनाई जा सकी।

3. गांवों में शिक्षा, सड़क नहीं
चित्रकूट विधान सभा के दर्जनों गांव आज भी सड़क को तरस रहे हैं। ग्राम पंचायत देवरा के बारा अमराई गांव में सड़क ही नहीं है। यहां पर स्कूल में 6 बच्चे पढऩे जाते हैं, जिन्हें दो शिक्षक पढ़ाते हैं। गांव के आंगनवाड़ी केंद्र का भवन तो है, लेकिन यहां किसी ने कब्जा कर रखा है। खास बात यह है कि यहीं से भाजपा ने अपना प्रत्याशी शंकर दयाल त्रिपाठी को टिकट दिया है।

4. रोजगार का संकट : पलायन बढ़ा
वन संपदा से परिपूर्ण व पर्यटन संभावनाओं से भरपूर चित्रकूट में रोजगार का संकट है। यहां के लोग उत्तर प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों में पलायन कर जीवन यापन कर रहे हैं, लोगों का आरोप है कि 15 साल से शिवराज सरकार ने रोजगार के लिए कुछ नहीं किया।

गांव के लोगों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर चित्रकूट उपचुनाव मतदान का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है।

क्या कहते हैं ग्रामीण

6 महीने से बिजली नहीं
हमारे गांव में पिछले 6 महीने से बिजली नहीं है। पूरा गांव अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। गांव के ट्रांसफार्मर को बिजली विभाग के अफसर निकालकर ले गए। मुख्यमंत्री तक को शिकायत की लेकिन, आज तक समस्या का हल नहीं निकला।
- देवेंद्र त्रिपाठी, ग्रामीण

सड़क को तरसे 
हमारे गांव में आने के लिए प्रमुख सड़क से सिर्फ आधा किमी की सड़क बनाई जानी है। सड़क के लिए प्लान भी बनाया गया। प्रमुख द्वार भी बनाया गया, लेकिन आज तक सड़क नहीं है। हमें आधा किमी जाने के लिए 20 किमी घूमकर सफर करना पड़ता है।
- अजय मिश्रा, ग्रामीण

शिक्षा बदहाल
हमारे गांव में स्कूल के लिए भवन नहीं है। एक ग्रामीण द्वारा अपना निजी भवन स्कूल के लिए दान किया गया था, जो अब जर्जर हालत में है। सरकारी बिल्डिंग बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया गया। यह भवन कभी भी गिर सकता है।
-देवेंद्र त्रिपाठी, ग्रामीण

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