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64 हजार शिक्षकों की कमी, 25 हजार शिक्षक पढ़ाने के काबिल नहीं



शिक्षा के मामले में मध्य प्रदेश के हाल बेहाल, प्राइवेट स्कूलों में भी दी जा रही घटिया शिक्षा

दीपक राय की भोपाल से विशेष रिपोर्ट...
  • 114255 स्कूल हैं प्रदेश में
  • 64 हजार शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूल
  • 18 हजार 213 स्कूल 1 शिक्षक के भरोसे
  • 75 हजार 698 अतिथि शिक्षकों के भरोसे स्कूल
  • 5945 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं
  • 5176 स्कूलों में पेयजल की व्यवस्था नहीं
  • 25 हजार 234 शिक्षक पढ़ाने के काबिल नहीं
  • 51 प्रतिशत शिक्षक निजी स्कूलों के अयोग्य


विधानसभा में पेश की गई कैग की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूल 63 हजार 851 शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार आरटीई के प्रावधानों को स्कूलों में लागू करने में असफल रही है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कर सकी। यह खुलासा विधानसभा में पेश हुई कैग की रिपोर्ट से हुआ है। भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का 31 मार्च 2016 का प्रतिवेदन वित्त मंत्री जयंत मलैया ने विधानसभा के पटल पर रखा। इसमें नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा-2009 (आरटीई) का मध्य प्रदेश में क्रियान्यवय को लेकर सवाल उठाये गए हैं। रिपोर्ट में यू-डाइस के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि 2015-16 में 2 लाख 85 हजार शिक्षक थे, जबकि 77 हजार 611 पद खाली थे। आरटीई के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में 2 लाख 20 हजार शिक्षक होने चाहिए, लेकिन सिर्फ 1 लाख 96 हजार शिक्षक ही पदस्थ थे। माध्यमिक शाला में 1 लाख 19 हजार शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन 70 हजार 875 शिक्षक ही हैं। राज्य में 18 हजार 940 प्राथमिक शाला और 13 हजार 763  उच्च माध्य शाला में शिक्षक-छात्र अनुपात में भारी अंतर मिला है। स्कूलों में कई विषय पढ़ाए ही नहीं जा रहे। कला शिक्षा, शारीरिक शिक्षा और कार्य शिक्षा का पाठ्यक्रम पढ़ाया ही नहीं गया।

अयोग्य शिक्षकों के भरोसे बच्चे
शिक्षा के अधिकार कानून के तहत सरकार ने 2013 तक शिक्षकों की नियुक्ति में शिथिलता प्रदान की थी। इसके बाद प्रशिक्षित शिक्षकों की भर्ती की जानी थी, लेकिन वर्तमान तक अयोग्य शिक्षकों के हाथ में बच्चे पढ़ रहे हैं। 2012-13 में 28 हजार अयोग्य शिक्षक थे, लेकिन वर्तमान में यह संख्या 25 हजार 234 है, इन पर सरकार ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है। निजी स्कूलों में 2 लाख 49 हजार शिक्षकों के स्थान पर सिर्फ 1 लाख 26 हजार शिक्षक ही प्रशिक्षित हैं। यहां 51 प्रतिशत शिक्षक अयोग्य हैं।

हे भगवान! ऐसे शिक्षकों के भरोसे शिक्षा
35 जिलों में 1188 शिक्षक प्रशिक्षण पाने के योग्य भी नहीं हैं, क्योंकि 398 शिक्षकों के अंक 50 प्रतिशत से कम हैं। 325  शिक्षक डी ई एल ई डी परीक्षा पास नहीं कर पाये। 109 शिक्षक उच्चतर माध्यमिक परीक्षा पास नहीं थे।


लेकिन भर्ती सिर्फ 25 हजार 356 पदों पर
63 हजार 851 शिक्षकों की कमी से जूझ रही सरकार 25 हजार 356 पदों पर भर्ती करने की बात कर रही है।

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी
प्रदेश के निजी स्कूल भी आरटीई का पालन नहीं कर रहे हैं। निजी स्कूलों के लिए शिक्षकों की पत्रता परीक्षा हेतु कोई परीक्षा नहीं थी, जबकि यह शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अनिवार्य है।

अतिथि शिक्षक भी काबिल नहीं
आरटीई के तहत शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए अतिथि शिक्षक नियुक्त करने का प्रावधान है, लेकिन इसमें भी मनमानी की गई। राज्य में 75 हजार 698 शिक्षक नियुक्त किये गये। यह शिक्षक टीईटी पास नहीं थे। कैग ने टिप्पणी की है कि ऐसे अतिथि शिक्षकों से अच्छी शिक्षा की उम्मीद नहीं की जा सकती।

अयोग्य स्कूलों का कर दिया नवीनीकरण
7 जिलों के निजी स्कूलों किये गये अध्ययन के अनुसार 18 हजार 715 शिक्षक अयोग्य पाये गये। दतिया जिले के जिला शिक्षा अधिकारी ने 2015-16 में 13 निजी स्कूलों की मान्यता नवीनीकृत कर दी जबकि इन स्कूलों में योग्य शिक्षक नहीं थे।


छात्र नहीं, लेकिन मास्ताब तैनात
स्कूल छात्र शिक्षक
65 प्राथमिक शाला 00 136
14 उच्च माध्य शाला 00 27

प्राथमिक स्वीकृत पद कार्यरत शिक्षक रिक्त पद
243342 205409 37933

उच्च माध्य स्वीकृत पद कार्यरत शिक्षक रिक्त पद
119757 938309 25918

प्राथमिक स्वीकृत पद कार्यरत शिक्षक रिक्त पद
243342 205409 37933

उच्च माध्य स्वीकृत पद कार्यरत शिक्षक रिक्त पद
119757 938309 25918

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