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मंदिर समिति के मेंबर प्रदीप पुजारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भस्मारती में बदलाव किया गया है।

उज्जैन.सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद महाकाल मंदिर में शनिवार को भस्मारती अलग तरीके से हुई। सुबह 4 बजे पूजा के पहले शिवलिंग को पूरी तरह कपड़े से ढंका गया। इतना ही नहींं, अभिषेक के वक्त RO के पानी का इस्तेमाल किया गया। बता दें कि शिवलिंग का आकार छोटा (क्षरण) होने से बचाने के लिए एक्सपर्ट कमेटी के 8 सुझावों को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी है। कोर्ट ने कहा कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और याचिकाकर्ता 15 दिन के अंदर इस पर अपने सुझाव या आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं। अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी। नई व्यवस्था को अमल में लाने के लिए महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने पुजारियों के लिए आदेश जारी कर दिए थे।

Q&A में समझें पूरा मामला, सुप्रीम कोर्ट ने महाकाल की पूजा के लिए क्या कहा ?


1) सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज कैसे हुए आरती?
- मंदिर समिति के मेंबर प्रदीप पुजारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भस्मारती में बदलाव किया गया है। शनिवार सुबह पूजा के वक्त RO के जल का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, शिवलिंग को कपड़े से ढंककर भस्म चढ़ाई गई। पहले सिर्फ श्रृंगार वाला हिस्सा ढंका जाता था।
- उन्होंने बताया कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक ही सारी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
2) क्यों यह केस कोर्ट पहुंचा?
- महाकाल के शिवलिंग का आकार (क्षरण) के छोटे होने की बात पहले भी सामने आती रही है। इसके लिए पहले भी मंदिर समिति की तरफ से कोशिशें होती रहींं। पहली बार सुप्रीम कोर्ट मामला पहुंचा। कोर्ट ने कमेटी बनाई, जिसने अपनी रिपोर्ट में पहली बार इस बात की पुष्टि हुई है कि नुकसान हो रहा है।
3) किसने याचिका लगाई?
- उज्जैन की सारिका गुरु ने याचिका लगाई। जस्टिस अरुण मिश्रा और एल नागेश्वर राव की बेंच ने सुनवाई की।
4) कमेटी ने अपनी रिपोर्ट क्या माना?
- एक्सपर्ट कमेटी ने रिपोर्ट में माना कि दूध, दही, घी, शहद, शकर और फूलमाला भी शिवलिंग के क्षरण की वजह हैं। पूजा में रासायनिक पाउडर पर पाबंदी हो, लोहे की जगह प्लास्टिक की बाल्टियां इस्तेमाल की जाएं।

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