भोपाल के एक होनहार इंजीनियर ने स्वच्छता अभियान से प्रेरित होकर बनाईं दो ऐसी डिवाइस, जो पकड़ लेंगी झूठ।
पाल। शहर के एक होनहार इंजीनियर ने स्वच्छता अभियान से प्रेरित होकर दो ऐसी डिवाइस बनाईं हैं, जो यह बताएगी कि टॉयलेट साफ है या नहीं। साफ है तो उसे कितनी बार साफ किया गया है। इंजीनियर अनुराग तिवारी का कहना है कि, प्रधानमंत्री मोदी ने जिस गंदगी मुक्त भारत का सपना देखा है, उसे साकार करने में हम सबको मदद करनी चाहिए। इन डिवाइस को बनाने में यही प्रेरणा काम कर रही थी।
- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता अभियान से प्रेरित होकर होनहार इंजीनियर अनुराग तिवारी ने दो डिवाइस तैयार की है। पहली मॉनिटरिंग यूजेस ऑफ टॉयलेट। दूसरी मेंटेनेंस एंड ऑपरेशन इन स्कूल। यदि इन सॉफ्टवेयर को सरकारी स्कूलों, कार्यालयों, हॉस्पिटल में इस्तेमाल किया जाता है तो टॉयलेट्स के उपयोग और उनके मेंटेनेंस के बारे में रियल टाइम में चेक किया जा सकेगा। ये डिवाइस बताएंगे कि टॉयलेट की सफाई हुई है या नहीं।
- केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय की ओर से सितंबर में स्वच्छथान 1.0 कॉम्पिटीशन का आयोजन किया था। इसमें देश-विदेश के 3 हजार से ज्यादा युवाओं ने भाग लिया। इसमें अनुराग द्वारा तैयार किए गए दोनों सॉफ्टवेयर योजक और स्थिति को दो कैटेगरी में सिलेक्ट किया गया है। इंडियन स्टाइल की टॉयलेट शीट पर एक फुट रेस्ट कवर लगाया जाएगा। इसमें ही गैस सेंसर लगे होंगे। सेंसर को डैश बोर्ड से जोड़ दिया जाएगा। जो बताएगा कि यह टॉयलेट कितनी बार और किस लिए यूज, स्मोक आदि किया गया है। यह सोलर पैनल से चल सकेगा, इसके लिए बिजली की जरूरत नहीं है।
सरकारी स्कूलों के टॉयलेट में अमोनिया गैस सेंसर लगाएंगे
- स्थिति एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। सरकारी स्कूलों के टॉयलेट में अमोनिया गैस सेंसर लगाए जाएंगे। यदि यहां पर गंदगी हुई तो उसकी बदबू से सेंसर जानकारी सॉफ्टवेयर पर भेज देगा। कौन सी टॉयलेट महीने में कितनी बार साफ हुई। टॉयलेट में लगे डिवाइस के माध्यम से डैशबोर्ड पर उपलब्ध होगी। अनुराग ने बताया कि प्रतियोगिता के लिए मंत्रालय की ओर से अपना प्रोजेक्ट सबमिट करने की समय सीमा महज 30 दिन रखी थी। जिसके बाद हमने प्रोजेक्ट पर तेजी से काम करते हुए इसे 15 दिन में पूरी तरह से तैयार कर लिया।
- स्थिति एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। सरकारी स्कूलों के टॉयलेट में अमोनिया गैस सेंसर लगाए जाएंगे। यदि यहां पर गंदगी हुई तो उसकी बदबू से सेंसर जानकारी सॉफ्टवेयर पर भेज देगा। कौन सी टॉयलेट महीने में कितनी बार साफ हुई। टॉयलेट में लगे डिवाइस के माध्यम से डैशबोर्ड पर उपलब्ध होगी। अनुराग ने बताया कि प्रतियोगिता के लिए मंत्रालय की ओर से अपना प्रोजेक्ट सबमिट करने की समय सीमा महज 30 दिन रखी थी। जिसके बाद हमने प्रोजेक्ट पर तेजी से काम करते हुए इसे 15 दिन में पूरी तरह से तैयार कर लिया।
- इस प्रतियोगिता में करीब 3000 से ज्यादा युवाओं ने भाग लिया था। दोनों प्रोजेक्ट को तकनीकी रुप से और मजबूत करने और इसके सभी पहलुओं पर बारीकी रखने के उद्देश्य से एआईसीटीई मेंटरिंग करेगा। इसके लिए स्टूडेंट्स को एआईसीटीई खुद लगभग दो महीने से ज्यादा की ट्रेनिंग देगा।

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