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देश को मिला सबसे बड़ा बांध



-सरदार सरोवर बांध : 57 साल बाद पूरा हुआ निर्माण, 67वें जन्म दिन पर मोदी ने किया उद्घाटन
-दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है सरदार सरोवर
- मोदी बोले- जिनके लिए देश से बड़ा दल था, उन्होंने सरदार सरोवर का विरोध किया, इसे पूरे होने में 57 साल लगा दिए
-गांधीनगर में मां हीराबेन से मोदी ने लिया आशीर्वाद
- बड़वानी में मेधा ने खत्म किया जल सत्याग्रह
- मेधा बोलीं- बिना पुनर्वास मोदी ने उद्घाटन कैसे कर दिया
Prime Minister Modi inaugurates Sardar Sarovar Dam


नर्मदा/अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात की धरती पर साकार हुई अंतरराज्यीय, बहुउद्देश्यीय और ऐतिहासिक सरदार सरोवर नर्मदा योजना राष्ट्र को समर्पित की। अमेरिका के ग्रांड कोली के बाद सरदार सरोवर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है। अपने 67वें जन्म दिन के अवसर पर रविवार को मोदी ने नर्मदा जिले में स्थित केवडिय़ा के नजदीक 144.50 मीटर ऊंचे सरदार सरोवर नर्मदा बांध पर से नर्मदाष्टकम एवं पुरुषासुक्त के गान के साथ सरदार सरोवर में नर्मदा नीर पर फूल चढ़ाए एवं नारियल एवं चुनरी अर्पित कर मां नर्मदा का पूजन किया।
भारत के सिंचाई मंत्री नितिन गडकरी, गुजरात के राज्यपाल ओ.पी. कोहली, मुख्यमंत्री विजय रुपाणी, उप मुख्यमंत्री नितिनभाई पटेल, गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष रमणलाल वोरा और पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल की उपस्थिति में प्रधानमंत्री ने तख्ती का अनावरण किया। प्रधानमंत्री को सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के अध्यक्ष एसएस राठोड़ ने योजना के कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।

क्या बोले मोदी : नर्मदा का पानी पारस, जमीन सोना उगलेगी
सरदार पटेल कुछ और साल जीवित रहते तो 1970 से पहले बांध बन चुका होता। सरदार सरोवर परियोजना में बाधा पैदा करने वालों का कच्चा चि_ा मेरे पास है। यह परियोजना नए भारत के निर्माण में सवा सौ करोड़ भारत वासियों के लिए प्रेरणा का काम करेगी। इस बांध परियोजना से मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के करोड़ों किसानों का भाग्य बदलेगा। पीएम मोदी ने कहा कि नर्मदा का पानी पारस है, जिस प्रकार पारस लोहे को स्पर्श कर सोना बना देता है, उसी प्रकार इस बांध का पानी जिस सूखी जमीन पर जाएगा, वह जमीन सोना उगलने लगेगी। पीएम मोदी ने कहा कि इस परियोजना के लिए वह दो लोगों के आभारी हैं- सरदार वल्लभ भाई पटेल और बाबा साहेब अंबेडकर।

16 हजार करोड़ कमा चुका बांध
ये बांध अब तक 16,000 करोड़ की कमाई कर चुका है। जो इसके निर्माण पर हुए खर्च से तकरीबन दोगुना है।

बांध में इतने गांव दफ्न
30 गेट खुलते ही, मध्य प्रदेश के अलीराजपुर, बड़वानी, धार, खारगोन जिलों के 192 गांव, महाराष्ट्र के 33 और गुजरात के 19 गांव डूब जाएंगे।

57 साल में क्यों बना बांध: रोचक तथ्य
-लौह पुरुष सरदार वल्लभाई पटेल ने गुजरात में सिंचाई के संकट को देखते हुए नर्मदा पर बांध बनवाने की योजना बनाई थी। 1946 में उन्होंने अंतरिम सरकार में आने के बाद इस परियोजना के लिए अध्ययन करवाया
-1959 में बांध के लिए औपचारिक प्रस्ताव बना। 5 अप्रैल, 1961 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसकी आधारशिला रखी
-राज्यों के बीच विवाद होने पर गुजरात एवं मध्य प्रदेश के बीच नवंबर 1963 में समझौता हुआ तथा सितंबर 1964 में डॉ एएन खोसला ने अपनी रिपोर्ट सौंपी
-जुलाई 1968 में गुजरात ने अंतर-राज्यीय जल विवाद कानून के तहत पंचाट गठित कराने की मांग की। अक्टूबर, 1969 में नर्मदा जल विवाद पंचाट बना। 12 जुलाई, 1974 को गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात के बीच बांध को लेकर समझौता हुआ
- 12 सितंबर, 1979 को पंचाट का अंतिम निर्णय। अप्रैल, 1987 में बांध निर्माण का ठेका दिया गया
- 1981 तक इस बांध का निर्माण कार्य प्रारंभ ही नहीं हो सका, पर्यावरण व विस्थापन संबंधी मुद्दों के कारण
-1995 में सुप्रीम कोर्ट ने बांध की ऊंचाई 80.3 मीटर से अधिक करने पर रोक लगाई। 998-99 में बांध को 85 मीटर तक ऊंचा बनाने की अनुमति दी गई
-1996 में बांध का निर्माण कार्य रोक दिया गया था सुप्रीम कोर्ट ने, नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमुख मेधा पाटकर ने पर्यावरण व पुर्नस्थापन की समस्या को बताया था आधार
-सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर, 2000 में परियोजना के चरणबद्ध तरीके से तेजी से निर्माण की अनुमति दी। 2001 में बांध की ऊंचाई 90 मीटर कर दी गई। जून, 2004 तक बांध की ऊंचाई 110.4 मीटर की गई
-8 मार्च, 2006 को नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण (एनसीए) ने बांध की उंचाई बढ़ाकर 121.92 मीटर करने की अनुमति दी
-मार्च, 2008 में बांध से निकलने वाली मुख्य नहर राजस्थान तक पहुंची। 12, जून 2014 को नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण (एनसीए) ने बांध को पूरी ऊंचाई तक बनाने एवं गेट लगाने की अनुमति दी
- मई 2014 तक बांध की ऊंचाई 121 मीटर थी, जो बांध के प्रोजेक्ट के अनुसार अधूरी थी
- इसके बाद मोदी सरकार ने आठ साल पुरानी योजना के तहत इसे 17 मीटर ऊंचा करने सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी ले ली
-10 जुलाई, 2017 को बांध के सभी 30 गेट लगाए गए। सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी, 2017 को परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के काम को तीन माह में पूरा करने का निर्देश दिया।
- 17 सितंबर, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सरदार सरोवर नर्मदा बांध परियोजना का लोकार्पण


एक नजर में बांध को जानें
-पहले 121.92 मीटर थी बांध की ऊंचाई, 1.25 मिलियन क्यूबिक मीटर जल संग्रह थी क्षमता
- 138 मीटर की गई है ऊंचाई, अब 4.75 मिनियन क्यूबिक मीटर जल संग्रह होगा
- 60 हजार करोड़ की लागत से बना है बांध
- 1.8 मिनियन हेक्टेयर गुजरात की जमीन होगी संचित
- 2 लाख 46 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी राजस्थान की
- 10 लाख किसानों को होगा फायदा
-गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र को मिलेगी बिजली
- 57 हजार किमी लंबी नहरों से पानी की सिंचाई होगी गुजरात में
- 43 हजार किमी नहरें अब भी अधूरी हैं, कांग्रेस का यह आरोप है
- बांध में  30 दरवाजे, हर दरवाजे का वजन 450 टन
-हर दरवाजे को बंद करने में एक घंटे का समय लगता है

...और इधर मेधा ने खत्म किया जल सत्याग्रह
बड़वानी से हेमंत गर्ग। चिखल्दा में अनशन कर चुकीं मेधा पाटकर ने डूब प्रभावितों के साथ ग्राम बड़दा से जल सत्याग्रह शुरू किया है। तीसरे दिन रविवार को यह सत्याग्रह समाप्त कर दिया। मेधा ने आगे की रणनीति पर कहा की जलस्तर अगर इसी तरह बढ़ता रहेगा तो हम जल समाधि ले लेंगे। पूर्ण पुनर्वास के बगैर डूब लाना और बांध में पानी भरना अनुचित और अन्याय पूर्ण है जल सत्याग्रह में कांग्रेस के क्षेत्रीय विधायक व उप नेता प्रतिपक्ष भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ आंदोलन को समर्थन देने बड़दा पहुंचे। मेधा पाटकर के अनुसार अब भी पुनर्वास के काम पूरे नहीं हुए लगभग 40000 परिवारों को स्थापित होना बाकी है। राजपुर से विधायक और पूर्व प्रभारी नेता प्रतिपक्ष विधानसभा बाला बच्चन ने कहा कि अभी भी पुनर्वास के काम अधूरे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री ने उद्घाटन करके हठधर्मिता की है।

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