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मिट्टी की सेहत सुधारने जिम्मेदार बने वैज्ञानिक

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  • कृषि वैज्ञानिकों का 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण में बोले कुलपति
  • 9 राज्यों से आये कृषि वैज्ञानिकों ने दी जनहित की जानकारी


दीपक राय, भोपाल। देश के मृदा वैज्ञानिक मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए जिम्मेदारी के साथ अपना कत्र्तव्य निवर्हन करें। मृदा की उर्वरता, मानव स्वस्थ्य व खेती में आप सभी वैज्ञानिक अपना योगदान कैसे दे सकते हैं? इस बारे में भी सोचें। ताकि कृषि उत्पादन को दोगुना किया जा सके। यह बातें जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति विजय सिंह तोमर ने कहीं। वे महाविद्यालय 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में देशभर से आए वैज्ञानिकों को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम सेन्टर ऑफ एडवांस फेकल्टी टेऊनिंग (केफ्ट) के अंतर्गत आयोजित किया गया था। विभागाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय प्रशिक्षण के संचालक डॉ. बी.सच्चिदानंद ने बताया कि इस वर्ष यह 31 वां प्रशिक्षण 'अधिक उत्पादन एवं मानव स्वास्थ्य हेतु मृदा स्वास्थ व उर्वरता का प्रबंधनÓ विषय पर आयोजित किया गया है तथा इसमें 09 राज्यों के 20 विभिन्न विषयों के कृषि वैज्ञानिकों ने भाग लिया। संचालक अनुसंधान सेवायें डॉ. धीरेन्द्र खरे एवं कृषि महाविद्यालय, अधिष्ठाता डॉ. ओमगुप्ता, अधिष्ठाता कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय डॉ. आर.के. नेमा, विभागाध्यक्ष डॉ. एस.डी. उपाध्याय, डॉ. गिरीश झा की उपस्थिति रही। प्रशिक्षण में सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक व्याख्यान दिये गये, प्रशिक्षण के दौरान भारत के विभिन्न कृषि विवि एवं संस्थाओं के ख्यातिलब्ध वैज्ञानिकों द्वारा जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में कृषि में उपयोगी सूक्ष्म जीवों की महत्ता, जैविक खेती, संतुलित खाद का प्रयोग, प्राकृतिक संसाधनों का टिकाऊ उपयोग एवं सूक्ष्म पोषक तत्व मृदा का सही व संतुलित उपयोग विषयों पर व्याख्यान दिये गये, एवं अध्ययन भ्रमण के दौरान जबलपुर की जैव विविधता को जानने हेतु विश्व प्रसिद्ध भेड़ाघाट, बीसा फार्म, राष्ट्रीय खरपतवार अनुसंधान केन्द्र, औषधीय उधान, जैव उर्वरक उत्पादन केन्द्र जैव विविधता का अध्ययन व भारत के प्रथम केन्द्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक का भ्रमण व जानकारी, कृष विज्ञान केन्द्र डिन्डौरी के प्रक्षेत्र भ्रमण व आदिवासी जनजाती का प्रमुख लघु धान फसलें कोदो, कुटकी की किस्में एवं उत्पादन तकनीक, नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विश्वविद्यालय, ट्रॉपीकल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा विस्तार से जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षार्थियों को बोरलॉग इस्ट़ीट्यूट फॉर साऊथ एशिया, खमरिया का भ्रमण, गोबर गैस प्लांट पनागर, बरगी बांध एवं अन्य प्राकृतिक स्थानों का भ्रमण कराया गया। कार्यक्रम का संचालन मृदा वैज्ञानिक डॉ. शेखर सिंह बघेल व आभार प्रदर्शन डॉ. ए.के. द्विवेदी, प्रमुख वैज्ञानिक द्वारा किया गया। 21 दिवसीय प्रशिक्षण में प्रशिक्षार्थियों में से डॉ. आर.पी. जोशी, रीवा एवं डॉ. पूनम इंदूभाई, गुजरात द्वारा अपने अनुभव व्यक्त किये एवं इस प्रशिक्षण की सराहना की। समापन के दौरान ट्रेनिंग का कम्पेंडियम एवं प्रायोगिक तकनीकि साहित्य का विमोचन एवं सभी प्रशिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किये गये। इसी दौरान श्री पीयूष श्रीवास्तव, चीफ रिपोर्टर को एक्सीलेंट टेक्नीकल सपोर्ट हेतु कुलपति प्रो. तोमर द्वारा सम्मानित किया गया। प्रशिक्षण में विभाग के डॉ. एन. जी. मित्रा,  डॉ. बी.एस. द्विवेदी, डॉ. ए. के. उपाध्याय, डॉ. जी. एस. टेगौर, डॉ. राकेश साहू, फूलचंद अमूले, अभिषेक शर्मा, डॉ. विनोद कुमार, गोपाल हलेचा, राज$कुमार काछी एवं मृदा विज्ञान विभाग के सभी कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी रही।

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