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संकट में अन्नदाता, सन्न सरकार, मध्य प्रदेश में सूखे की आहट


  • 15 राज्यों में बहुत कम बरसात
  • 235 जिले देशभर में सूखे की कगार पर (मौमस विभाग)
  • 95 जिलों में ही सूखे का भीषण खतरा (कृषि मंत्रालय)
  • 228 मिमी बारिश कम हुई है मप्र में
  • सभी मप्र के सभी जिलों को भोपाल भेजनी है सूखा संबंधी जानकारी
  • रिपोर्ट को देखकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित स्टेट वाच ग्रुप की बैठक में लिया जाएगा सूखा घोषित करने का निर्णय

draught in madhy pradesh

दीपक राय, भोपाल। इस साल बारिश ने दगा दे दिया। मौसम विभाग की जबरदस्त बारिश की भविष्यवाणी फेल हो गई। देश में मानसून सीजन खत्म होने वाला है, लेकिन 235 जिलों में बहुत कम बारिश हुई है। यहां सूखा का खतरा मंडरा रहा है। देश के 15 राज्यों में सामान्य के मुकाबले बहुत कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार देश के 235 जिले सूखाग्रस्त हैं। मध्य प्रदेश के 27 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। 23 जिलों में भी सूखे का संकट मंडरा गया है। यहां अब तक 677 मिली मीटर बारिश बारिश हुई है, जबकि 905 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। मध्य प्रदेश सरकार ने माना है कि 35 जिलों में सामान्य से 20 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं, 25 जिलों में 25 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इन जिलों में किसानों की धान, सोयाबीन की फसल तबाह हो चुकी है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में 31, 28 और 25 फीसदी तक कम बारिश हुई है। मध्य प्रदेश, मणिपुर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली में तो चिंताजनक स्थिति निर्मित हो चुकी है। इसके प्रदेश की शिवराज सरकार भी चिंता में है। सरकार ने 18 सितंबर तक सभी जिलों से बारिश संबंधी जानकारी मंगाई है। इस जानकारी के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित स्टेट वॉच ग्रुप रिपोर्ट को देखकर सूखा घोषित करने की कार्रवाई करेगा।
कई जिलों में तो खराब हुई फसलों का सर्वे भी प्रारंभ हो चुका है। कृषि बीमा कंपनी ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी हैं। अबतक बीते मानसून सीजन यानि पहली जून से लेकर 13 सितंबर तक देशभर में औसतन 752.7 मिलीमीटर बरसात हुई है, जबकि 802 मिलीमीटर बारिश हो जानी चाहिए थी। यह बारिश औसत के मुकाबले 6.14 फीसदी कम है।



23 जिले, जहां सामान्य बारिश
जबलपुर, कटनी, पन्ना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, सतना, इंदौर, धार, झाबुआ, खरगोन, बड़वानी, खंडवा, बुरहानपुर, उज्जैन, मंदसौर, नीमच, अलीराजपुर, गुना, राजगढ़, आगर-मालवा, रायसेन और सिवनी

27 जिले, जहां बहुत कम बारिश
बालाघाट, छिंदवाड़ा, मंडला, डिंडोरी, नरसिंहपुर, सागर, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, देवास, शाजापुर, मुरैना, श्योपुर, भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, अशोकनगर, दतिया, भोपाल, सीहोर, विदिशा, होशंगाबाद, हरदा और बैतूल

सरकार का अपना राग : बुआई कम हुई, लेकिन सूखे का सकंट नहीं 
सरकार कह रही है कि सिर्फ 95 जिलों में कम बरसात हुई है, जबकि मौसम विभाग ने यह आंकड़ा 235 बताया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय का कहना है कि इस साल खरीफ सीजन में 8 सितंबर तक देशभर में 1,041 लाख हेक्टेयर में खरीफ बुआई हुई है। जबकि औसतन इस दौरान 1,014 लाख हेक्टेयर में खरीफ की खेती होती है। लेकिन कृषि मंत्रालय के ये आंकड़े थोथे साबित हो रहे हैं क्योंकि पिछले वर्ष इस दौरान देशभर में करीब 1,050 लाख हेक्टेयर में खरीफ बुआई हो चुकी थी। खरीफ सत्र 2017-18 में पिछले सप्ताह तक 1,041.17 लाख हेक्टेयर में धान जैसी खरीफ फसल की बुवाई की गई है जो रकबा वर्ष भर पहले के 1,049.87 लाख हेक्टेयर से मामूली कम है।


इन राज्यों में सामान्य से ज्यादा बारिश
तमिलनाडु, उत्तर-पूर्वी राज्य, राजस्थान, गुजरात, दक्षिण पश्चिम, आंध्र प्रदेश, पुदुचेरी और कोंकण


40 जिले सूखा ग्रस्त घोषित करें : कांग्रेस
विधानसभा में विपक्ष के नेता अजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिख कर किसानों के बिजली-बिल और दूसरे कर्ज माफ करने की मांग की है। उन्होंने लिखा है कि प्रदेश के 40 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करें।

चिंताजनक खबर

  • 99 फीसदी बारिश का अनुमान लगाया था मौसम विभाग ने
  • 37प्रतिशत हिस्से में 20 फीसदी तक घटा मानसून 
  • देशभर में औसत 752 मिमी बारिश हुई, जबकि  802 मिमी होनी थी
  • मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र में बारिश की भारी कमी
  • मप्र के 27 जिलों में सामान्य से कम बारिश
  • वर्षा 580.4 मिमी दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की सामान्य औसत वर्षा 726.4 मिमी है
  •  रतलाम में हुई सर्वाधिक बरसात
  • देश के 25 फीसदी इलाकों में मानसून सामान्य से 59 फीसदी तक कमजोर
  • देशभर के 36 डिविजन में से 8 डिविजन में 20 से 59 फीसदी तक कम बारिश 
  • 22 डिविजन में सामान्य, 6 में सामान्य से 20 फीसदी तक ज्यादा बारिश



किस राज्य में कितनी कम बारिश
राज्य बारिश में कमी
उत्तर प्रदेश -31%
दिल्ली -36%त्न
हरियाणा -28%
पंजाब -18%
मध्य प्रदेश -25%
केरल -19%
कर्नाटक -11%
मणिपुर -42%
चंडीगढ़ -15%
गोआ -22%
आंध्र प्रदेश -15%
तेलंगाना -13%
उड़ीसा -11%
हिमाचल प्रदेश -12त्न
छत्तीसगढ़ -14%

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