इंसानियत शर्मासार, सड़क किनारे डिलिवरी
झाबुआ,।
मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल झाबुआ में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। जिले के धन्ना गांव की 25 वर्षीय गर्भवती शंभूबाई की डिलीवरी सड़क पर ही हो गई। गरीब परिवार के पास वाहन भी नहीं था और उन्हें एम्बुलेंस बुलाने के लिए 108 नंबर के बारे में जानकारी ही नहीं थी। शुक्रवार सुबह जब प्रसव पीड़ा हुई तो घर वाले पैदल ही अस्पताल ले जाने के लिए निकले। आधे रास्ते में दर्द बढ़ा और सड़क किनारे ही डिलीवरी हो गई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने 108 एम्बुलेंस पर फोन किया, लेकिन वाहन नहीं आया। आखिर में पुलिस कंट्रोल रूम ने एक व्यक्ति को अस्पताल भेजकर एम्बुलेंस भेजने को कहा। करीब डेढ़ घंटे बाद जननी एक्सप्रेस आई, लेकिन शर्मसार करने वाली बात यह है कि इस दौरान दर्जनों लोग वाहन से यहां से गुजरे, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। महिला का पति गुजरात में मजदूरी करता है। जननी से अस्पताल ले जाने के बाद पता चला कि शंभूबाई को समय से लगभग 15 दिन पहले डिलीवरी हुई। उसे जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। बेटे का जन्म हुआ। नवजात का वजन मात्र डेढ़ किलोग्राम होने से उसे एसएनसीयू में भर्ती किया गया। फिलहाल दोनों स्वस्थ हैं।
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