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मुख्यमंत्री की योजना में उलझे फेल छात्र


दो साल हुए खराब
रुक जाना नहीं, योजना से छात्र परेशान
भोपल, ईएमएस। मध्य प्रदेश सरकार की 'रुक जाना नहींÓ योजना भी छात्रों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। यह योजना दसवीं की परीक्षा में फेल हुए छात्रों को अवसाद में जाने से रोकने के लिए शुरू की गई थी। बताया जा रहा है कि मुख्य परीक्षा में फेल हुए हजारों छात्र इस योजना में राज्य ओपन बोर्ड से दोबारा परीक्षा देकर पास हुए, लेकिन मप्र बोर्ड उन्हें पास नहीं मान रहा। पहले छात्रों का एक साल बिगड़ा था। योजना में शामिल होने से दूसरा साल भी बिगड़ रहा है। अब छात्रों के सामने अगले साल दसवीं की परीक्षा देने के सिवाय कोई रास्ता नहीं है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रिजल्ट से निराश विद्यार्थियों की आत्महत्या के मामले सामने आने के बाद ऐसे छात्रों के लिए योजना लागू की थी।

ऐसी थी योजना
इसमें इन छात्रों को राज्य ओपन बोर्ड के माध्यम से उन विषयों की दोबारा परीक्षा देना थी जिनमें वे फेल हो गए हैं। बताया जाता है कि दूसरी बार की परीक्षा में पास होने पर छात्रों को 11वीं में एडमिशन दे दिया जाएगा। पिछले साल दसवीं की परीक्षा का परिणाम मई-2016 में आया था। इसमें फेल हुए छात्रों के लिए जुलाई-2016 में योजना में परीक्षा आयोजित की गई थी। इसका रिजल्ट अगस्त 2016 में आया था। दसवीं की परीक्षा माध्यमिक शिक्षा मंडल आयोजित करता है, जबकि रुक जाना नहीं योजना में परीक्षा राज्य ओपन बोर्ड ने ली थी। बोर्ड बदलने की स्थिति में सरकार को इस संबंध में आदेश जारी करना होता है, ताकि रिजल्ट लिंक हो सके।

इसलिए हो रही समस्या
योजना लागू करने के बाद सरकार ऐसा करना ही भूल गई। इसी कारण इस योजना में पास हुए छात्रों को मंडल ने न तो 10वीं पास माना और न एडमिशन मिला। सरकार की लापरवाही से हजारों छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। इन छात्रों ने मंडल की सामान्य फीस के मुकाबले तीन गुना फीस जमा कर परीक्षा दी थी।

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