जल्लीकट्टू के समर्थन में एआर रहमान ने रखा उपवास, रजनीकांत भी जनता के समर्थन में उतरे
-सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते तक टाला फैसला
-तमिलनाडु के मरीना बीच पर हजारों लोग जमा
-चेन्नई में बंद, स्कूल, कॉलेज और दफ्तर भी बंद
-प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक जल्लीकट्टू को हटाने के लिए औपचारिक आदेश नहीं आ जाता, वहां से कोई नहीं हिलेगा
चेन्नई।
जल्लीकट्टू जल्द ही तमिलनाडु में धूमधाम से मनाया जाएगा मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम ने शुक्रवार यह घोषणा की है। इसके लिए तमिलनाडु सरकार जल्दी ही अध्यादेश लाने वाली है। इसके ड्राफ्ट को गृह मंत्रालय भेज दिया गया है।
वहीं, कई जनता के विरोध समर्थन के पक्ष में संगीतकार ए आर रहमान ने एक दिन का उपवास रखा। रजनीकांत व उनके दामाद धनुष, कमल हासन उनकी बेटी श्रुति हासन भी जनता संग आईं। गौर हो कि चेन्नई के मरीना बीच पर चार दिन से जमा हुए हजारों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। सीएम ने प्रदर्शन रोकने की अपील की है। इससे पहले पीएम मोदी ने कहा था कि मामला क्योंकि कोर्ट में है इसलिए केंद्र्र सरकार अध्यादेश नहीं ला सकती। तमिलनाडु सीएम ने कहा है कि ड्राफ्ट अध्यादेश तैयार हो चुका है जिसे गृहमंत्रालय भेजा गया है जहां से उसे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी मिलने का बाद राज्य सरकार अध्यादेश का आदेश दे सकती है। अध्यादेश राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ रविवार तक उन्हें वापस मिल जाएगा।
पेटा पर प्रतिबंध की मांग
यही नहीं प्रदर्शनकारियों ने पशु अधिकारों से जुड़ी संस्था पेटा पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इस संस्था का आरोप है कि इस खेल के लिए सांडों को नशीले पदार्थ दिए जाते हैं और कभी कभी उनके चेहरे पर मिर्च भी डाली जाती है ताकि वह मैदान पर आक्रामक हो सकें।
पेटा जाएगी कोर्ट
पेटा ने साफ किया है कि जल्लीकट्टू पर आने वाले अध्यादेश को वह कानूनी चुनौती देंगे
यहां फंसा पेंच
पोंगल के वक्त खेले जाने वाले इस खेल को पशु अधिकार से जुड़े कार्यकर्ताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में बैन लगा दिया था। बाद में तमिलनाडु सरकार ने याचिका दायर की थी जिसमें फैसले की समीक्षा की बात कही गई थी, लेकिन कोर्ट ने उसे भी अस्वीकार कर दिया था।
तमिलनाडु को बनाना होगा विशेष कानून: हाई कोर्ट
मद्रास हाई कोर्ट ने जल्लीकट्टू के आयोजन के लिये शर्तों के साथ विशेष कानून बनाने का केेंद्र और तमिलनाडु की सरकार को निर्देश देने के लिये दायर जनहित याचिका आज खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि वह इस तरह का निर्देश नहीं दे सकती।
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