50 साल पहले से होता कैशलेस लेन-देन
गुवाहाटी। केंद्र सरकार ने नोटबंदी करके कैशलेस को चर्चा में ले आया है। देश के कई हिस्सों में कैशलेस के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं असम का एक गांव ऐसा भी है, जहां 50 वर्षों से भी अधिक समय से कैशलेस लेन-देन किया जा रहा है।
गुवाहाटी से 32 किमी दूर छोटे से कस्बे में असम की तिवा जनजाति के लोग हर साल एक अनोखे व्यापारिक मेले का आयोजन करते हैं जिसमें सारा लेनदेन सिर्फ और सिर्फ कैशलेस होता है। मध्य असम और पड़ोसी मेघालय की जनजाति तिवा असम के मोरीगांव जिले में जनवरी के तीसरे हफ्ते में सालाना तीन दिवसीय मेले जुनबील का आयोजन करती है और इस समुदाय ने पांच से भी ज्यादा सदियों से इस किस्म के लेनदेन की व्यवस्था को बनाए रखा है। मेले का हाल ही में समापन हुआ है। इतिहासकारों के अनुसार, इस मेले का आयोजन 15वीं सदी से होता आया है।
जुनबील मेला विकास समिति के सचिव जरसिंह बोरदोलोई ने बताया कि मेले के दौरान यहां बड़ा बाजार लगता है जहां ये जनजातियां वस्तु विनिमय प्रणाली के जरिये अपने उत्पाद का आदान प्रदान करती हैं।
मेले में शामिल हुए असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि तिवा लोगों के इस चलन से लोगों को सीखना चाहिए। सोनोवाल ने इस मेले के लिए एक स्थायी भूखंड आवंटित किए जाने की घोषणा भी की।
No comments