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3 लाख रुपये होगी आयकर छूट, 1 फरवरी को आएगा बजट


three lakh rebate of income tax limit

नई दिल्ली । केंद्र सरकार नोटबंदी के बाद बने हालात को देखते हुये अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने के लिए प्रत्यक्ष करों में व्यापक फेरबदल कर सकती है। उम्मीद के अनुसार, केंद्र सरकार इस आम बजट में आयकर छूट की सीमा तीन से साढ़े तीन लाख तक कर सकती है। इस बात के संकेत भारतीय स्टेट बैंक की शोध रिपोर्ट ईकोरैप से मिले हैं। वहीं दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राहत देते हुए विपक्षी दलों की याचिका खारिज कर दी है। अब आम बजट एक फरवरी को ही आएगा।
पिछले वित्तीय वर्ष में पेश किए गए बजट में ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया लेकिन संकेत जरूर दिए गए थे। आगामी केंद्रीय बजट 2017 को लेकर भी जानकारों की राय है कि सरकार आयकर की छूट ढाई लाख से बढ़ाकर तीन से साढ़े तीन लाख रुपए कर सकती है। एसबीआई की रिपोर्ट मुख्य आर्थिक सलाहकार और महाप्रबंधक आर्थिक शोध विभाग सौम्या कांति घोष ने तैयार की है।

रिपोर्ट के खास बिंदु
- बैंकों में पांच साल की सावधि के बजाय तीन साल की सावधि जमा पर कर छूट दी जा सकती है।
- धारा 80सी के तहत विभिन्न निवेश और बचत पर मिलने वाली छूट सीमा भी बढ़ाई जा सकती है।
- होमलोन ब्याज पर भी कर छूट सीमा दो लाख से बढ़कर तीन लाख रुपए की जा सकती है।
- धारा 80सी के तहत बचत और निवेश कर छूट सीमा 1.5 लाख से दो लाख की जा सकती है।
- छूट देने से सरकारी खजाने पर 35300 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।
- आय घोषणा योजना (आईडीएस) से करीब 50000 करोड़ रुपये की कर वसूली होगी।
- नोटबंदी से निरस्त देनदारी के तौर पर करीब 75000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने एक फरवरी को आम बजट लाए जाने के केंद्र के फैसले के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि केंद्र का बजट केंद्रीय होता है इसका राज्यों से कोई लेना-देना नहीं है। आप ये भी नहीं बता पाए कि यह कौन से कानून या संविधान के प्रावधान का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता एक उदाहरण देकर बताए कि केंद्र के बजट से किसी राज्य के नागरिक के मन में चुनाव के हिसाब से क्या असर पड़ सकता है? ऐसे तो आप कहेंगे कि राज्य के चुनाव हैं तो केंद्र सरकार ही नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे लोगों के मन में यह होगा कि इसी पार्टी की केंद्र में सरकार है और इस पार्टी को वोट देंगे तो राज्य को फायदा होगा। ऐसे ही बजट को आगे बढ़ाते रहे तो बजट कब आएगा। हर महीने राज्यों में चुनाव आते रहेंगे।
छूट की सीमा दोगुनी हो : ईवाय
कर सलाहकार कंपनी ईवाई के एक बजट पूर्व सर्वेक्षण में 81.42 प्रतिशत लोगों का मानना है कि कॉरपोरेट कर की दर को मौजूदा 30 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत किया जाए और इसमें अधिभार एवं उपकर को अलग रखा जाए। करीब 60 प्रतिशत लोगों का मानना है कि निजी आयकर की सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये प्रति वर्ष करना चाहिए। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इससे आम आदमी के हाथ में ज्यादा पैसा पहुंचेगा और इससे उपभोग एवं मांग में वृद्धि होगी। 'मेक इन इंडियाÓ को गति प्रदान करने के लिए 72 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि सरकार क्षेत्र विशेष के आधार पर प्रोत्साहन और कटौतियां जारी रखेगी। इसके अलावा 36 प्रतिशत लोगों का मानना है कि शीर्ष आयकर की दर को घटाकर 25 प्रतिशत किया जाए जो मौजूदा समय में 10 लाख रुपये से ऊपर की आय पर 30 प्रतिशत है।
कॉरपोरेट टैक्स की दर घटाने की मांग
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने फरवरी, 2015 में अपने दूसरे बजट भाषण के दौरान 1 अप्रैल, 2017 से कर प्रोत्साहनों को धीरे-धीरे खत्म करने और कॉरपोरेट कर की दर को 30 से घटाकर 25 प्रतिशत करने की घोषणा की थी। हाल ही में किए गए एक सर्वे के अनुसार, 53 प्रतिशत लोगों की राय है कि इस बार कॉरपोरेट कर की दरों को कम किया जाएगा। अब पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने जेटली को एक प्रस्ताव भेजा है जिसमें कहा है कि वित्त वर्ष 2017-18 के लिए कॉरपोरेट टैक्स की दर को घटाकर 25 फीसदी कर दें, जिसमें सेस और सरचार्ज भी शामिल हो।

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