भोपाल। प्रदेश में अब अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग सहित विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्द्ध घुमक्कड़ जनजाति के लोगों के डिजिटल जाति प्रमाण पत्र बनाए जाएंगे। राज्य शासन ने आवेदन आने से प्रमाण पत्र जारी होने तक तीन दिन की समयसीमा तय की है। वहीं उन लोगों के जाति प्रमाण पत्र बगैर किसी छानबीन के बनाए जाएंगे, जिनके परिवार के किसी सदस्य का पहले भी प्रमाण पत्र बनाया जा चुका है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी कर दिए हैं। आरक्षित वर्ग के सभी लोगों के जाति प्रमाण पत्र अब डिजिटल होंगे। उनके मैन्युअल प्रमाण पत्रों को डिजिटल में परिवर्तित किया जाएगा। सरकार ने इसे लोक सेवा गारंटी कानून में रखते हुए मैन्युअल से डिजिटल प्रमाण पत्र तैयार करने की समयसीमा तीन दिन तय कर दी है।
जबकि नए प्रमाण पत्र बनाने की समयसीमा 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी है। सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि नए प्रमाण पत्र बनाने में देरी न करें। यदि किसी आवेदक के दादा, पिता, चाचा, भाई या बहन का पहले से जाति प्रमाण पत्र बना है, तो ऐसे मामलों में आवेदक की जाति और निवास को लेकर छानबीन जरूरी नहीं है। सरकार ने ऐसे मामलों में आवेदक के परिवार के सदस्यों के आधार पर बगैर जांच-पड़ताल प्रमाण पत्र जारी करने को कहा है। इस मामले में सरकार का तर्क है कि आवेदक के परिवार के सदस्यों का प्रमाण पत्र बनाते समय छानबीन हो चुकी है, ऐसे में फिर से छानबीन की जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों में आवेदक को परिवार के सदस्य के जाति प्रमाण पत्र की स्वयं के द्वारा सत्यापित प्रतिलिपि आवेदन के साथ लगाना होगी।
मध्यप्रदेश में अब एससी-एसटी के डिजिटल जाति प्रमाण पत्र बनेंगे
Reviewed by News Day Today
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August 18, 2018
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