डीएनए न्याय का सबसे बड़ा आधार : डीसी सागर
- पृथ्वी से चन्द्रमा तक की लंबाई के आठ हजार बार चक्कर जितना लंबा है एक मानव शरीर का डीएनए
- प्रदेश के न्यायाधीशों से मुखातिब हुए एडीजी दिनेश सागर
- सागर बोले, न्यायपालिका, पुलिस और वैज्ञानिक समन्वय से करें कार्य
- अपराधियों को न्यायपालिका से दण्डित कराने में सहयोग करें अफसर
दीपक राय, भोपाल...
मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी एवं एफएसएल के संयुक्त तत्वाधान में प्रशिक्षण एवं विचार आदान प्रदान हेतु तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन हुआ जिसमें मम्र राज्य के उच्चतर न्यायिक सेवा के 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में, मुख्य अतिथि एवं वक्ता एडीजी तकनीकी सेवाएं दिनेश चंद्र सागर रहे एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश सागर एसके शर्मा अध्यक्ष रहे। एफएसएल सागर के निदेशक डॉ. हर्ष शर्मा ने भी मंच से अपने विचार रखे। कार्यशाला में एडीजी सागर ने वैज्ञानिक संबोधन दिया, यह संबोधन डीएनए साक्ष्य पर केन्द्रित रहा। सागर ने पावर पाईंन्ट प्रजेन्टेशन के माध्यम से ना केवल मानव डीएनए का प्रारंभिक परिचय दिया बल्कि उसकी मूल संरचना में 'ए-टी-सी-जीÓ के विशिष्ट संयोजनों को समझाया। उन्होंने बताया कि अपराधिक प्रकरणों के प्रदर्शों से डीएनए को निकाल कर अलग करने की एवं उनके परीक्षण के अलग अलग चरणों जैसे पीसीआर, एसटीआर, आटोसोमल और वाई क्रोमोसोम विधि जैसी जटिल वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को भी सरल, सटीक और रोचक तरीके से न्यायाधीशों को समझाया।
साथ ही, एडीजी सागर ने इन्दौर के बच्ची के बलात्कार के सनसनीखेज प्रकरण में, म.प्र. एफएसएल द्वारा डीएनए परीक्षण के आधार पर, आरोपी को रिकॉर्ड समय में सजा दिलाए जाने का विशेष रूप से उल्लेख किया और अंतिम फैसले में डीएनए रिपोर्ट के उल्लेख को भी शब्दश: दिखाते हुए, न्यायाधीशों से प्रभावी चर्चा की।
सागर ने मानव डीएनए की संरचना के संबंध में अचंभित करने वाले कई रोचक तथ्य समझाते हुए बताया कि एक मानव शरीर में स्थित 75 खरब कोशिकाओं में प्रत्येक में 2 मीटर डीएनए उपस्थित है। इन संरचनाओं की लम्बाई इतनी है कि ये प्रथ्वी से चन्द्रमा के आठ हजार बार और पृथ्वी से सूरज के चार सौ बार चक्कर लगाने के लिए पर्याप्त होंगी। डीएनए की इतनी मात्रा मे से परीक्षण के लायक डीएनए को निकाल लेना, भूसे के ढेर में से एक सुई को खोजने के समान जटिल काम है जिसके लिए डीएनए प्रयोगशाला के आधुनिकतम उपकरणों और प्रशिक्षित वैज्ञानिकों की क्षमता की आवश्यकता होती है। इस परिपेक्ष्य में उन्होने मप्र एफएसएल की डीएनए यूनिट की सराहना करने बताया कि प्रदेश की यह प्रयोगशाला किसी भी स्तर पर, देश विदेश की किसी भी प्रयोगशाला से कम नही है।
सागर ने मप्र न्यायिक सेवा के प्रति आभार जताते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर जब हम मप्र न्यायिक व्यवस्था की तुलना करते है तो निश्चित ही हम पाते है कि दूसरे प्रदेशों की तुलना में मप्र की न्यायिक संस्था में अधिक विश्वास है एवं पुलिस, वैज्ञानिक एवं न्यायिक संस्था के कर्मियों के समन्वयिक प्रयासों और अथक परिश्रम के कारण इतनी मात्रा में प्रकरणों का निराकरण संभव हो पा रहा है। डॉ हर्ष शर्मा ने वैज्ञानिक साक्ष्य की महत्ता को समझाते हुए कहा कि मनुष्य झूठ बोल सकता है, लेकिन वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर निकले निष्कर्ष सदैव सत्य ही होते है, इसलिये आज के इस तकनीकी और वैज्ञानिक युग में समय आ गया है कि अधिक से अधिक मात्रा में ऐंसे संस्थानों का लाभ लेकर उचित न्याय प्रदान किया जाये। उन्होंने अपने सभी सहयोगियों द्वारा किये जा रहे अथक परिश्रम की सराहना करते हुये भविष्य में अपनी विश्सवनीयता प्रतिबद्धता को बनाये रखते हुये अपने कार्यों को इसी तरह से आगे भी संपादित करते रहने में जोर दिया है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ज्योत्सना पाण्डे ने किया। इस कार्यक्रम में समन्वयक डॉ राज श्रीवास्तव, एवं अमित सिंह सिसोदिया, सागर ने योगदान दिया।




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