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सगे रिश्तेदारों ने खून देने से मना किया, नर्स और लेब टेक्निशियन ने रक्त देकर बचाई महिला की जान



  • विदिशा जिलेे के गंजबासौदा के राजीव गांधी अस्पताल में महिला कर्मियों ने पेश की इंसानियत की मिसाल

हरीश शाक्य, लाइव न्यज, भोपाल...
 ऐसा अक्सर सुनने में आता है कि सरकारी अस्पतालों में लापरवाही होती है। डॉक्टर, नर्स आदि स्टॉफ मरीजों की मदद नहीं करते, लेकिन यह खबर सबसे अलग है । विदिशा जिले के शासकीय राजीव गांधी जनचिकित्सालय में पदस्थ नर्स और लेब टैक्निशियन ने इंसानियत की मिसाल पेश कर दी। घटना 4 जुलाई की है राजीव गांधी जनचिकित्सालय में ऐसा ही मामला प्रकाश में आया जिसमें प्रसव के उपरांत एक महिला को खून की कमी हो गई और उसके सगे परिजनों और रिश्तेदारों ने ही उसे खून देने से मना कर दिया। ऐसे में शासकीय राजीव गांधी जनचिकित्सालय की एक नर्स और लैब टेक्नीशियन सामने आई और उन्होंने अपना खून देकर महिला की जान बचा ली। बाद में उस महिला को उच्च स्तरीय उपचार के लिए भोपाल रैफर कर दिया गया। अगर समय पर महिला को खून उपलब्ध नहीं कराया जाता तो शायद उसकी मौत हो जाती। नगर के वार्ड क्रमांक 3 में रहने वाले गणेशराम की धर्मपत्नी सीमा बाई को प्रसव पीड़ा उपरांत उसके परिजनों द्वारा उपचार के लिए शासकीय राजीव गांधी जनचिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। जहां महिला चिकित्सकों की देखरेख में उसका सामान्य प्रसव हो गया। लेकिन इस बीच महिला की तबियत अचानक बिगड़ गई और चिकित्सकों ने जांच उपरांत उस महिला को खून की बॉटल चढ़ाने का निर्णय लिया। लेकिन तीन चार बोतलें खून की चढ़ाने के उपरांत भी जब महिला को और अधिक खून की बोतल की जरूरत हुई तो चिकित्सकों ने उसके परिजनों से अपना खून देने का अनुरोध किया। लेकिन महिला के परिजन सकपका गए और उन्होंने खून देने से मना कर दिया। यह स्थिति देखकर चिकित्सालय प्रबंधन महिला की हालत में सुधार लाने के लिए खून की बोतल का इंतजाम करने में जुट गया। लेकिन कहीं से भी खून का इंतजाम नहीं हो पाया। बाद में प्रसूति वार्ड इंचार्ज रेखा पांडे और लैब टैक्नीशियन कृष्णा शाक्य ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए स्वयं खून देकर उस महिला की जान बचा ली। इसके बाद प्रभारी चिकित्सक डॉ. प्रमोद सिंह दीवान ने महिला को उच्च स्तरीय उपचार के लिए भोपाल भेजने का निर्णय लिया और प्रायवेट वाहन मुहैया कराकर लैब टैक्निशियन कृष्णा शाक्य और नर्स सागोरिका  के साथ उसे भोपाल भेजा गया। क्योंकि उस समय 108 एम्बूलेंस क्षेत्र में गई हुई थी और अन्य कोई वाहन उपलब्ध नहीं था। ज्ञात हो कि इन दिनों शासकीय राजीव गांधी जनचिकित्सालय में प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते चिकित्सकों, विशेषज्ञ चिकित्सकों, उपकरणों आदि की कमी बनी हुई है। लेकिन इसके बावजूद भी चिकित्सालय प्रबंधन मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने का भर्सक प्रयास कर रहे है।
दीपक राय, ०५ जुलाई

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