चित्रकूट में लगभग चार हज़ार लोगों ने योगाभ्यास किया
चित्रकूट 21 जून 2018..
रिषि मुनियों की तपोभूमि, प्रभु राम की कर्मभूमि और राष्ट्र्रिषि नानाजी की विकास रचना स्थली चित्रकूट में अर्न्तराष्ट्र्ीय योग दिवस पर आयोजित अभिनव कार्यक्रमों के कारण तपोस्थली चित्रकूट का नाम योग के शीर्ष केन्द्रों के रूप में स्थापित हो गया है। आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर चित्रकूट में आयोजित योग के कार्यक्रमों में लगभग चार हजार लोगों ने योगाभ्यास किया। सुरेंद्र पाल ग्रामोदय विद्यालय और महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विस्वविद्यालय में पृथक पृथक आयोजनों में संत ,महात्मा,तीर्थ यात्रा में आये श्रद्धालु भी सम्मलित हुए। सामूहिक योग कार्यक्रम ग्रामोदय विस्वविद्यालय, उद्यमिता पीठ, आरोग्यधाम, जानकी महल,सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट,प्रमोद वन, रामायणी कुटी,वनवासी राम मंदिर नयागांव, भरत मंदिर राम घाट,सरस्वती शिशु मंदिर सीतापुर, जगतगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विस्वविद्यालय सीतापुर, संतोसी अखाड़ा, गायत्री शक्ति पीठ, कामदगिरि प्रमुख द्वार राम मुहल्ला, भागवत धाम खोही के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। मध्यप्रदेश के महामहिम राज्यपाल के निर्देश पर महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विस्वविद्यालय में योगाभ्यास का अतिरिक्त कार्यक्रम सम्पन हुआ। चित्रकूट में सम्पन्न योग कार्यक्रम में जनभागीदारी का अदभुत दर्शन मिला। रात्री छटने के साथ योग प्रदर्शन स्थल पर लोगो का जूटना शुरू हो गया था।
आज प्रातःकालीन बेला में विश्वभर में आयोजित योगाभ्यास, प्राणायाम, आसन,ध्यान,सूर्यनमस्कार आदि विभिन्न कार्यक्रम चित्रकूट की पावन धरा में भी सम्पन्न हुये। मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश की सीमापर बसे संयुक्त चित्रकूट की संस्थाओं एवं संत-महात्माओं,महंतो,छात्र,छात्राओं, सामान्यजनों की भागीदारी के साथ सुरेन्द्रपाल उच्चतर माध्यमिक ग्रामोदय विद्यालय में भव्य और अनुशासित सामूहिक योग का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम राष्ट्र्रिषि नाना जी देशमुख के द्वारा स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव डा. अभय महाजन के सदप्रयासों एवं समन्वयन के साथ चित्रकूट की 16 संस्थाओं और संत-महात्माओं के साझीदारी के मध्य संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश के महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति के विशेष निर्देश पर महात्मा गॉंधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के विवेकानंद खुला सभागार में संपन्न हुआ। दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव डा. अभय महाजन, महात्मा गॉंधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेश चन्द्र गौतम, चित्रकूट के पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार आदि ने योग के महत्व एवं उपयोगिता पर प्रकाश डाला। योगाभ्यास का अनुशासन संचालन डा. तुषारकंात शास्त्री ने किया। संयुक्त समन्वयन प्रो. आई.पी.त्रिपाठी एवं कुलसचिव डा. अजय कुमार का रहा। इस दौरान डा. अभय महाजन ने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिक चित्रकूट में सामूहिक योग की अभिनव परम्परा से प्रभावित है। सबकी इच्छा है कि प्रत्येक दिन योगाभ्यास का कार्यक्रम संचालित किया जाय। डा. अभय महाजन सभी राय से अपने को जोडते हुये कहा कि हमारा प्रयास होगा कि महात्मा गॉंधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, दीनदयाल शोध संस्थान,सदगुरू सेवा संघ ट्र्स्ट नियमित रूप से योगाभ्यास की समुचित व्यवस्था करे।
अर्न्तराष्ट्र्ीय योग दिवस के कार्यक्रमों का प्रारम्भ योगाभ्यास के प्रदर्शन से हुआ। विवेकानंद सभागार में संपन्न कार्यक्रमों में विश्वविद्यालय परिवार के लोगों ने योगाभ्यास किया। अन्य संस्थाओं के लोग भी सम्मिलित हुए। प्रातः 7 बजे से 8 बजे के मध्य ओम का उच्चारण आसन,प्राणायाम,सूर्यनमस्कार आदि हुआ। सी.एम.सी.एल.डी.पी. भवन में योगासन प्रतियोगिता हुई जिसमें 12 पुरूष संवर्ग और 13 महिला संवर्ग के प्रतिभागी सम्मिलित हुये। योगासन प्रतियोगिता के संयोजक डा. जितेन्द्र शर्मा ने बताया कि योगासन प्रतिभागियों ने सूर्य नमस्कार,शलभ आसन,पवन मुक्तासन,शशांक आसन, पाद हस्तासन में भाग लिया। प्रतियोगिता में स्थान अर्जित करने वालो को विश्वविद्यालय द्वारा पुरूष्कृत किया जायेगा। भारतीय आर्य परम्परा में योग विषय पर राष्ट्र्ीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार के संयोजक डा. जितेन्द्र शर्मा ने विषय प्रवर्तन करते हुये योग विद्या के विविध आयामों पर प्रकाश डाला।
डा. शर्मा ने भारतीय आर्य परम्परा में योग विद्या का महत्व प्रस्तुत करते हुये शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिये योग की अनिवार्यता पर जोर दिया। अध्यक्षीय उदबोधन में कुलपति प्रो. नरेशचन्द्र गौतम ने योग की प्रासंगिकता एवं आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुये कहा कि योग व्यक्ति को स्वस्थ रखने एवं मानवीयता को जागृत करने का सशक्त माध्यम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने योग के महत्व को पूरे विश्व को समझाया और सभी को अधिकृत तौर पर अपनाने का माध्यम भी दिया। डा. शशीकांत त्रिपाठी ने छात्र,छात्राओं के जीवन में प्रत्याहार धारणा एवं ध्यान की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। डा. कुसुम सिंह ने नाथ साहित्य के विशेष संदर्भ में दृढ योग की परम्परा, विकास एवं महत्व को प्रतिपादित किया। डा. नीलम चौरे ने विद्यार्थी जीवन में यम-नियम के महत्व पर प्रकाश डाला।
डा. अमरजीत सिंह ने स्वस्थ जीवन के लिये उपयोगी आसन एवं प्राणायाम की विधियों पर प्रकाश डाला। डा. रमेशचन्द्र त्रिपाठी ने प्राणायाम के स्वरूप,प्रकार एवं महत्व को समझाया। डा. विनोद सिंह ने शारीरिक शिक्षा एवं खेल के आयाम के रूप में योग को बताते हुये कहा कि योग का विद्यार्थी जीवन में विशेष योगदान है। डा. अभय वर्मा ने योग विद्या के ऐतिहासिक पक्ष का विवेचन करते हुये योग की प्राचीनता पर प्रकाश डाला। डा. देवेन्द्र पाण्डेय ने सफल प्रबंधन होने के लिये योग अपनाने की सलाह दी। उन्होने कहा कि योग से मानसिक तनाव कम होता है। डा. आंजनेय पाण्डेय ने योग प्रदर्शन में उपयुक्त प्रौद्यौगिकी सृजित करने एवं अपनाने की सलाह दी। कार्यक्रम के प्रधान संयोजक प्रो. आई.पी.त्रिपाठी ने सेमीनार की सराहना करते हुये कहा कि ऐसे आयोजनो के माध्यम से हमारा प्रयास होगा कि हम योग को जन-जन तक पहुचायें। योग विद्या के विविध आयाम विषय पर निवंध प्रतियोगिता संपन्न हुई। इसीक्रम में योग विद्या को लेकर भाषण, संवाद एवं परिचर्चा का आयोजन हुआ, जिसमे छात्र-छात्राओं ने बढचढ कर हिस्सा लिया। विश्वविद्यालय योग दिवस के दौरान संपन्न समस्त प्रकार की प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठ स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को पुरूष्कृत करने का भी निर्णय लिया। संचालन डा. जितेन्द्र शर्मा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. विनोद सिंह ने किया।
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