किसानों की आत्महत्या के आंकड़ों में उलझे केन्द्रीय मंत्री अनंत, न अध्यक्ष बता पाए और न बाकी नेता
भोपाल. केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री व मप्र भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रभारी अनंत कुमार राज्य में किसानों की आत्महत्या के आंकड़ों को लेकर उलझ गए। आपातकाल को काला दिवस बताने जनता के बीच पहुंचे केंद्रीय मंत्री से पूछा गया कि मंदसौर गोलीकांड क्या किसानों के लिए भी आपातकाल था? इसके जवाब में उन्होंने कर्नाटक के कांग्रेस शासन में हुई 3800 किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा पेश किया। साथ ही कहा कि मप्र में तो किसानों को 35 हजार करोड़ रुपए वितरित किए गए हैं। जब उनसे मप्र में किसानों की मौतों की संख्या बताने के लिए कहा गया तो पहले उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह से पूछा, फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैठे अन्य नेताओं से जानकारी लेने की कोशिश की।
आखिरकार अंदाजा लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार में 600 किसानों ने आत्महत्या की। यहां बता दें कि एनसीआरबी की रिपोर्ट की मानें तो 2014-15 में ही किसान और खेती में लगे मजदूरों को मिलाकर मप्र में 2488 लोगों ने आत्महत्या की। अनंतकुमार ने बाद में दावा किया कि देश में भाजपा शासित राज्यों की तुलना में कांग्रेस के राज्यों में ज्यादा किसान आत्महत्या कर रहे हैं। हालांकि यह बहुत दुखद है। आत्महत्या किसी की नहीं होनी चाहिए। मैं यहां आकड़ों की बात करने नहीं आया। कर्नाटक में विधानसभा के फ्लोर पर जवाब मिला था। एनसीआरबी के आंकड़े नहीं हैं। मप्र में जब भाजपा की सरकार आई थी, उससे पहले हर साल 1600 किसान आत्महत्या करते थे। बहरहाल, आपातकाल को लेकर अनंतकुमार ने कहा कि कांग्रेस के मूल में ही लोकतंत्र नहीं है, इसीलिए वंशवाद हावी है। यही वजह थी कि 1975-77 के बीच लोकतंत्र और स्वतंत्रता का हरण कर जेपी और मोरारजी जैसे नेताओं को भी जेल में डाल दिया गया था। मीडिया से बात करने के बाद अनंतकुमार सांसद राकेश सिंह के साथ मुख्यमंत्री से भी मिले।
कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्षों की व्यवस्था पर अनंत कुमार का कटाक्ष
कांग्रेस में कार्यकारी अध्यक्ष की व्यवस्था पर अनंत कुमार ने कहा कि बैसाखियां तो दो ही दी जाती हैं, लेकिन कांग्रेस में चार दी गई हैं। इन चारों के बारे में तो राहुल गांधी से ही पूछना चाहिए। क्या अगले चुनाव में कांग्रेस मुख्यमंत्री के लिए भी चार उम्मीदवार खड़े करेगी? मध्यप्रदेश में एक बार फिर कांग्रेस बुरी तरह हारेगी और शिवराज सिंह के नेतृत्व और राकेश सिंह की अगुवाई में भाजपा बड़ी जीत का चमत्कार करेगी। मप्र में कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि वह पहले भी लाई थी। अब भी लाई है, लेकिन समर्थन हमेशा भाजपा को ही मिला।
आखिरकार अंदाजा लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार में 600 किसानों ने आत्महत्या की। यहां बता दें कि एनसीआरबी की रिपोर्ट की मानें तो 2014-15 में ही किसान और खेती में लगे मजदूरों को मिलाकर मप्र में 2488 लोगों ने आत्महत्या की। अनंतकुमार ने बाद में दावा किया कि देश में भाजपा शासित राज्यों की तुलना में कांग्रेस के राज्यों में ज्यादा किसान आत्महत्या कर रहे हैं। हालांकि यह बहुत दुखद है। आत्महत्या किसी की नहीं होनी चाहिए। मैं यहां आकड़ों की बात करने नहीं आया। कर्नाटक में विधानसभा के फ्लोर पर जवाब मिला था। एनसीआरबी के आंकड़े नहीं हैं। मप्र में जब भाजपा की सरकार आई थी, उससे पहले हर साल 1600 किसान आत्महत्या करते थे। बहरहाल, आपातकाल को लेकर अनंतकुमार ने कहा कि कांग्रेस के मूल में ही लोकतंत्र नहीं है, इसीलिए वंशवाद हावी है। यही वजह थी कि 1975-77 के बीच लोकतंत्र और स्वतंत्रता का हरण कर जेपी और मोरारजी जैसे नेताओं को भी जेल में डाल दिया गया था। मीडिया से बात करने के बाद अनंतकुमार सांसद राकेश सिंह के साथ मुख्यमंत्री से भी मिले।
कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्षों की व्यवस्था पर अनंत कुमार का कटाक्ष
कांग्रेस में कार्यकारी अध्यक्ष की व्यवस्था पर अनंत कुमार ने कहा कि बैसाखियां तो दो ही दी जाती हैं, लेकिन कांग्रेस में चार दी गई हैं। इन चारों के बारे में तो राहुल गांधी से ही पूछना चाहिए। क्या अगले चुनाव में कांग्रेस मुख्यमंत्री के लिए भी चार उम्मीदवार खड़े करेगी? मध्यप्रदेश में एक बार फिर कांग्रेस बुरी तरह हारेगी और शिवराज सिंह के नेतृत्व और राकेश सिंह की अगुवाई में भाजपा बड़ी जीत का चमत्कार करेगी। मप्र में कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि वह पहले भी लाई थी। अब भी लाई है, लेकिन समर्थन हमेशा भाजपा को ही मिला।

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