विज्ञप्ति प्रकाशन के पूर्व बेच दी सरकारी उद्योग विभाग की जमीन
- सूचना के अधिकार आवेदन के तहत सामने आया बड़ा गड़बड़झाला
भोपाल/उज्जैन। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र उज्जैन के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमो को सार्वजनिक किए बिना ही सरकारी जमीन का आवंटन कर दिया गया। समाचार पत्रों में सूचना और विज्ञप्ति प्रकाशन में 7 दिन की देरी की गई। जिस दिन विज्ञप्ति प्रकाशित हुई उसके एक दिन पहले ही पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर 3 प्लाट अपने ख़ास लोगो से घुस लेकर महाप्रबंधक ने बेच दिए। पूरा मामला ऑनलाइन आवेदन व आवंटन का था लेकिन इसमें भी सेंधमारी करने वाले अधिकारी के खिलाफ जिला कलेक्टर व वरिष्ठ अधिकारी कार्यवाही नही कर रहे। इससे परेशान आरटीआई कार्यकर्ता ने भोपाल में अपील करने व आर्थिक अपराध ब्यूरो व न्यायालय की शरण मे जाने का निश्चय किया है। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेंद्र शर्मा ने बताया कि मामला उज्जैन जिले की बाँधका इंडस्ट्रियल एरिया घट्टिया का है। यहां 3 प्लाट सरकारी लीज पर आवण्टित करने के लिए बनी योजना पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर किये जाने थे। जिला व्यापार व उद्योग केंद्र के अधिकारियों ने इसके लिए सबसे पहले पूर्व में हुए आवेदन को बाकायदा पत्र लिखकर साइड से हटवाया उसके बाद नोटशीट चलाकर जरूरी खाना पूर्ति कर ली। नियमानुसार इसमे पहले आओ पहले पाओ योजना थी। अधिकारियों ने अपने लोगो को फायदा पहुचने के लिए विज्ञपति प्रकाशन नोट शीट में 6 तारीख को दर्ज किया। इसमे 4 दिवस पूर्व विज्ञपति प्रकाशन बताया जा सके। लेकिन अखबार में विज्ञपति 11 तारीख को प्रकाशित की विज्ञप्ति 11 को छपी। लेकिन 4 लोगो ने आवेदन 10 तारीख को ही कर दिए। और आवेदन स्वीकार भी कर लिए गए। जबकि आवेदन के लिए जरूरी कागज की तैयारी में कम से कम 3 दिन का समय चाहिए। वरिष्ठ अधिकारी को जब इसकी शिकायत की गई तब उन्होंने स्वीकार किया कि उज्जैन जिले का नाम ऊपरोक्त वेबसाइड पर कूल 204 प्लाट में कही भी नही है। इसमें क्रमश: 33 34 35 नंबर पर बैतूल जिले का नाम था। बाद में 23 तारीख को शिकायत के बाद इस क्रमांक पर उज्जैन जिले का नाम दर्ज कराया गया। 12 जनवरी को लिए गए ऑनलाइन प्रिंट आवेदक के पास है जिसमे बैतूल का नाम दर्ज है
सार्वजनिक की जाने वाली सूचना को निकालने के लिए आरटीआई के सहारा लेना पड़ा
इस मामले का सच आरटीआई में ली गयी जानकारी के बाद उजागर हुआ। लेकिन इसमें कई तथ्य लोकसूचना अधिकारी ने नही दिए जिसकी अपील की गई है। इसमे जयहिंद चावड़ा नामक व्यक्ति 70 साल से अधिक उम्र के है। पूर्व में भी ये सरकारी जमीन उद्योग लगाने के नाम पर लेकर बेच चुके है। ओर वर्तमान में जो प्लाट मिला है उस पर अब तक कोई निर्माण शुरू नही हुआ है।
आरटीआई कार्यकर्ता लड़ रहा लड़ाई
आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेन्द्र शर्मा ने बताया कि इस योजना में आवेदन करने वाले उज्जैन जिले के अलावा अन्य मध्यप्रदेश: के जिले कयी जगह संदिग्ध लोग है। जो दो से अधिक बार लाभ ले चुके है। इसकी जांच की जानी चाहिये। शर्मा ने कहा कि आरटीआई में मिली जानकारी से स्पष्ट है कि सूचना प्रकाशन को रोका गया ताकि कुछ लोगो को लाभ मिल सके। भोपाल संचालनालय व आर्थिक अपराध ब्यूरो को शिकायत करेंगे। जरूरत हुई तो जांच करवाने के लिए हाई कोर्ट जाएंगे।


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