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गर्मी से बचने के घरेलू उपाय और होम्योपैथी


प्रो. डॉ राजेंद्र सिंह राजपूत। 
तेज धूप ने परेशान करना शुरू कर दिया है। गर्मी में हमारे शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है, इसलिए जितना हो सके गर्मी से बचने की कोशिश करनी चाहिए। घर से निकलते समय हमेशा सिर सूती कपड़े, टोपी से ढंक लें और  घर से निकलने से पहले पानी पी कर ही निकलें।घरेलू उपायों को आजमा कर भी हम गर्मी के प्रकोप से बच सकते है।
सादा पानी आपकी त्वचा को हमेशा तरोताजा रखता है। आप अगर बहुत थकान महसूस कर रहे हैं तो पानी के छीटों से आप फ्रेश महसूस करेंगे ।
खीरे के जूस को आप चेहरे पर लगाएं, यह प्राकृतिक मॉइस्चराइजऱ की तरह काम करता है। इससे चेहरे पर ठंडक महसूस होगी और आप सनबर्न की समस्या से भी  बचे रहेंगे।
पिसी हुई चंदन, तुलसी और गुलाब आदि नेचुरल चीजें लगाने से गर्मी में राहत मिलती है। धूप से आने के कुछ घंटों बाद मुल्तानी मिट्टी और चंदन पाउडर लगाने से आपकी त्वचा को ठंडक महसूस होगी।
घमौरियां हो जाने पर नीम और तुलसी का पेस्ट लगाना फायदेमंद होता है। गुलाब की पत्तियों को पानी में भिगोकर उस पानी से चेहरा धोने पर गर्मी के मौसम में त्वचा मुलायम बनी रहती है।
चेहरे पर पीसी हुई चंदन और खीरे के जूस के साथ दो-तीन बूंद ग्लिसरीन की बूंदें और गुलाब जल मिलाकर उसका लेप लगाने पर भी राहत मिलती है।
खाने-पीने का रखें खास ध्यान
गर्मी के मौसम में खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पेट की खराबी और अधिक तैलीय व मसालेदार खाद्य-पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए। खानपान की गड़बड़ी से पाचन-क्रिया तुरंत प्रभावित होती है। इससे अनेक बीमारियां हो सकती हैं। इस मौसम में सबसे ज़्यादा दूषित जल और पेय पदार्थों का  संक्रमण फैलता है । उल्टिदस्त, जी मिचलाना, लू लगने, त्वचा पर फफोले होना, काले चकत्ते पडऩा या डंक जैसी पित्ती उभरना जैसी जनस्वास्थ्य समस्यायें प्राय: देखी जाती है।
गर्मी में अधिक शुष्कता के कारण शरीर में जल की मात्रा कम हो जाती है। इसकी पूर्ति के लिए बार-बार जल और जलीय पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
इस मौसम में दही, मौसमी ताजे फल जैसे संतरा, पपीता, स्ट्रॉबेरी, ग्रेप का जूस ज्यादा से ज्यादा पीये। ये हेल्दी होने के साथ-साथ शरीर को अंदर से ठंडा रखने में सहायक होते हैं।
होम्योपैथिक दवाइयां आपको गर्मियों के मौसम में स्वस्थ रहने में मदद करेंगी
हम सभी जानते हैं कि गर्मी का मौसम कितना खतरनाक हो सकता है। गर्मी में सिरदर्द बहुत आम समस्या होती हैऔर अक्सर यह पहला संकेत होता है कि कुछ तो गड़बड़  है। होम्योपैथिक दवाइयां गर्मी के रोगो से निजात दिलाने में सक्षम हैं। होम्योपैथिक उपचारों के लिए कुछ सहायक मुख्य नोट्स दिए गए हैं जो आपके सिरदर्द, सनबर्न और अन्य लक्षणों को कम कर सकते हैं।
बेलडोना- यह गर्मी के लिए एक अच्छी दवा है यदि आप फैली हुई शिराओं से पीडि़त हैं, टपकन वाले सिरदर्द,  पसीने से उबलने के पश्चात कोई लक्षण आये हैं तो आपको तुरंत इस दवा की एक खुराक लेनी चाहिए। सिर पर एक ठंडा तौलिया लपेटकर भी आप  सुखद महसूस कर सकते हैं।
ब्रायोनिया - आप इसे कपाल में होने वाले सिरदर्द में जो चलने फिरने से बढ़ता हो, उपयोग कर सकते हैं।
फेरम फोस - यह होम्योपैथिक उपाय शारीरिक कमजोरी, थकान और अन्य समान लक्षणों के साथ गर्मी से संबंधित सिरदर्दों को राहत देता है।
लैकेसिस - गर्म चमक, गर्म पसीना, गर्म भारी सिरदर्द और गर्मी के बाद आने वाली थकान, इस दवा के साथ सभी का बहुत अच्छा इलाज हो सकता है।
पल्साटिला - यदि आप 'जैसे' चोट लगने पर दु:खता है वैसे वाले धड़कते सिरदर्दों से जिसमें दबाने से आराम हो, पीडि़त हैं तो पल्साटिला आपके लिए दवा है।
 केन्थरिस- चमकती हुई लाल त्वचा,  स्पर्श करने पर गर्म और बहुत संवेदनशील।  सूर्य के प्रकाश के कारण जले हुए की तरह धूप की कालिमा के साथ फफोले। काटने या डंक जैसा तीव्र, तीखा और जलन युक्त दर्द।
अर्टिका यूरेन्स- सूर्य प्रकाश में लम्बे समय तक रहने के कारण अगर दर्द में कांटेदार या खुजली की अनुभूति होती है। लालरंग के चकत्ते जैसे कि जला हुआ हो और खुजली तीव्रता से हो । डंक और खुजली वाली पित्ती में यह बहुत उपयोगी है।
बेलाडोना- तेज सन बर्न, गर्म और लाल त्वचा, के साथ थपकन वाला सिरदर्द। शीशे के समान आँखें और फैली हुई पुतलियां, भ्रांतचित्त मनोदशा।
ग्लोनाइन - लू लगने के साथ तेज, फटने लायक सिर दर्द, चक्कर आना और मानसिक भ्रम की स्थिति। व्यक्ति को हो सकता है, मतली और उल्टी।
आर्सेनिक - लू लगना साथ ही मतली और उल्टी। बेचैनी और कमजोरी
नेट्रम सल्फ - सूरज की रोशनी के संपर्क से सिर दर्द। गर्म मौसम के साथ मतली।
एपिस मेलफिका- कीट के काटने और डंक का उपचार होम्योपैथि से हो सकता है। अगर एक व्यक्ति को एलर्जी विष का एक चुभने कीट, या अगर एक काटने है से एक जहरीला मकड़ी, आपातकालीन चिकित्सा उपचार की जरूरत है एक उपयोगी उपाय अगर एक काटने या मधुमक्खी डंक का कारण बनता है झोंके, निविदा सूजन है कि है गुलाबी या लाल और गर्म को छूने के लिए। प्रभावित क्षेत्र डंक और जलता है। ठंड के प्रयोग से आराम मिलता है।
लीडम पाल - सूजन का विस्तार काटने से कुछ दूरी तक दिखाई देता है, अक्सर दर्द युक्त स्थान नीला पड़ जाता है।अगर सूजा हुआ हिस्सा ठंडा लगता है लेकिन बर्फ या ठंडे पानी से राहत मिलती है।
इन दवाइयों के साथ, सुनिश्चित करें कि आप गर्मी से दूर रहें, बहुत सारे पानी और इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय जैसे-तरबूज़, खरबूज,खीरा, नींबू शकर चुटकी भर नमक पीयें और एक ताज़ा स्नान भी करें।
इस गर्मी में अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखकर गर्मी की छुट्टी का पूरा मज़ा ले सकते हैं।
(लेखक एमडी (होम), एमपीएच, पीएचडी हैं 
और  शा होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, आज़मगढ़ में पदस्थ हैं)

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