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जल्द कम हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, एमपी के वित्त मंत्री जयंत मलैया ने दिए संकेत

भोपाल. मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया ने पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने के संकेत दिए हैं। भास्कर से चर्चा में उन्होंने बताया कि शुक्रवार को ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत में 3 डालर की कमी आई है। जल्द ही इसका असर भारत में भी देखने को मिलेगा। उन्होंने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर सहमति जताई। साथ ही ये भी कहा है कि इसमें प्रदेश सरकार अपने हित जरूर ध्यान में रखेगी।
- बता दें कि मध्य प्रदेश महाराष्ट्र के बाद दूसरा प्रदेश है, जिसने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की वकालत की है। पिछले दिनों महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सबसे पहले पेट्रोल-डीजल की कीमत कम करने के लिए इस पर जीएसटी लगाने का समर्थन किया था। हालांकि इसके लिए सभी राज्यों की सहमति की जरूरत होगी।
- वित्त एवं वाणिज्यकर मंत्री जयंत मलैया ने कहा कि जीएसटी काउंसिल में यदि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का प्रस्ताव आता है तो हम तैयार हैं। लेकिन, जीएसटी काउंसिल
को ही यह काम करना होगा, राज्य अपनी सहमति दे सकता है। कर्नाटक चुनाव के बाद से पेट्रोल-डीजल के दामों में रोजाना बढ़ोतरी हो रही है। इससे पूरे देश में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की बहस शुरू हो रही है।
आज भोपाल में 14 पैसे और डीजल 16 पैसे महंगा मिलेगा
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को कच्चे तेल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए। यानी पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की एक उम्मीद जगी है। शनिवार को लगातार तेल की पेट्रोल में भोपाल में पेट्रोल 14 और डीजल 16 पैसे प्रति लीटर और महंगा बिकेगा।
10 फीसदी टैक्स घटाती है तो सस्ता हो जाएगा
- एक दिन पहले नीति आयोग ने राज्य सरकारों को 10 से 15 फीसदी टैक्स कम करने की सलाह दी थी। यदि मप्र सरकार इस सलाह को मानकर पेट्रोल-डीजल की मौजूदा कीमतों पर 10 फीसदी टैक्स घटाती है तो पेट्रोल 4.86 रु. और डीजल 5.18 रुपए प्रति लीटर सस्ता हो जाएगा। इससे सरकार का राजस्व करीब 838 करोड़ रुपए घट जाएगा। दिलचस्प ये है कि सरकार पहले ही मौजूदा वित्तीय वर्ष में इस टैक्स से 1600 करोड़ रु. कमा चुकी है, जो कि पिछले साल की उसकी आय से 16% ज्यादा है।
सरकार के राजस्व पर आएगा संकट
- पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी लगाने में सबसे बड़ी बाधा सरकार के राजस्व में आने वाली कमी है। जिम्मेदार अधिकारियों के अनुसार, यदि पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी लगता है तो केंद्र और राज्य सरकार के राजस्व में काफी कमी आ जाएगी। इसका हल खोजे बिना पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना मुश्किल है। वित्त मंत्री जयंत मलैया से जब टैक्स कम करने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि सरकार इस पर विचार नहीं कर रही। नीति आयोग के कहने भर से टैक्स में कमी नहीं की जाएगी, केंद्र सरकार को भी देखना पड़ेगा।

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