इंदौर.आंबेडकर जयंती पर शनिवार को महू में सरकार का समारोह यूं तो बाबा साहेब को श्रद्धांजलि देने और उनके प्रति कृतज्ञता जताने के लिए हुआ, लेकिन मंच पर हुए भाषणों में कांग्रेस पर शब्दबाण चले। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत दोनों ने कहा कि कांग्रेस ने ही आंबेडकर को हराने के लिए पूरी ताकत लगाई।
राष्ट्रपति रामनाथ काेविंद से पहले सीएम और मंत्री गेहलोत ने अपने भाषण में कांग्रेस पर निशाना साधा। कहा कि कांग्रेस कभी नहीं चाहती थी कि आंबेडकर संसद पहुंचे। आंबेडकर ने मुंबई और भंडारा से लोकसभा चुनाव लड़ा था। तब
जवाहरलाल नेहरू को उनके खिलाफ प्रचार करने के लिए मैदान में उतार दिया था। नेहरू ने बड़ी सभाओं में आंबेडकर के खिलाफ प्रचार किया था। उन्हीं के कारण आंबेडकर चुनाव हारे थे। वहीं, महू विधायक और भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने डॉ. आंबेडकर की तुलना भगवान शिव से कर दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह शिव ने जहर पिया और अमृत बांटा, ठीक उसी तरह आंबेडकर ने तिरस्कार, छूत-अछूत का अपमान सहा, लेकिन बदले में देश के सभी वर्गों के लिए संविधान दिया।
रेशम बाई ने साथ में किया भोजन, लेकिन पता ही नहीं था कि राष्ट्रपति कौनकार्यक्रम समाप्ति के बाद राष्ट्रपति और राज्यपाल ने 15 चुनिंदा व्यक्तियों के साथ भोजन किया। राज्यपाल के पास हरसोला निवासी रेशमबाई को बैठाया गया था। भोजन समाप्त होने के बाद जब रेशमबाई से पूछा कि आपके पास जो लोग बैठे थे, वह कौन हैं तो वह बोलीं- मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
मंच पर पीएम का फोटो नहीं होने पर लोगों में चर्चामंच पर पीछे तरफ पोस्टर लगा हुआ था जिसमें आंबेडकर, राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री का फोटो लगा हुआ था, लेकिन प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी का फोटो नहीं था। लोगों में इसकी चर्चा हुई। स्थानीय विधायक विजयवर्गीय काे भी पोस्टर में स्थान नहीं मिला।
पंचतीर्थ भी तीर्थदर्शन योजना में शामिलसीएम ने घोषणा की कि आंबेडकर की स्मृति से जुड़े पंचतीर्थ को भी मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में शामिल किया गया जाएगा। यानी, वरिष्ठजनों को सरकारी खर्च पर यहां की यात्रा कराई जाएगी।
भूपेंद्र आर्य बोले-आरक्षण हमारा हथियारभाजपा नेता भूपेंद्र आर्य ने कहा कि आज जो दलित विधायक हमारे साथ खड़े हैं, वो डॉ. आंबेडकर के कारण ही हैं। डॉ. आंबेडकर के द्वारा देश को दिया गया आरक्षण ही हमारा हथियार है।
नहीं जुटी ज्यादा भीड़लगभग दो लाख अनुयायी शामिल होने का अनुमान था। भीड़ पिछले वर्षों के मुकाबले बहुत कम थी। सड़कों पर लोग आसानी आ-जा रहे थे, जबकि पहले जयंती पर आयोजन स्थल पर पैर रखने की जगह भी नहीं बचती थी।
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