राज्यमंत्री व प्रमुख सचिव जैसा रुतबा चाहते हैं कुलपति
दीपक राय की रिपोर्ट, भोपाल...
- 10 मई को राज्यपाल के सामने रखेंगे प्रस्ताव
- वर्तमान प्रोटोकॉल में दिया गया स्टेटस नहीं आ रहा पंसद
मध्यप्रदेश में एक जमाने में कुलपतियों के रुतबे हुआ करते थे। उनके वाहन लाल बत्तियों से सजे-धजे रहते थे, लेकिन वक्त के साथ-साथ उनसे सभी सुविधाएं छीन ली गईं। अब कई सालों बाद कुलपतियों के मन में फिर वीआईपी बनने का सपना खुदबुदा रहा है। वे राज्यमंत्री व प्रमुख सचिव जैसी सुविधाएं चाहते हैं। इसी क्रम में कुलपतियों ने आवाज भी उठाने की तैयारी कर ली है। राज्यपाल की अध्यक्षता में 10 मई को होने वाली विश्वविद्यालयों की समन्वय समिति की बैठक में एक प्रस्ताव रखा जा रहा जा रहा है। इस प्रस्ताव में कुलपति यह मांग रखेंगेकि उन्हें प्रमुख सचिव से ऊंचा दर्जा दिया जाये। विश्वविद्यालयों की स्थाई समिति के अध्यक्ष प्रो. एसएस पांडेय कहते हैं कि कुलपतियों की सर्वसम्मति से यह निर्णय लेकर इसे समन्वय समिति की बैठक के एजेंडे में शामिल किया गया है। बैठक में एडमिशन के नियम समेत 22 मुद्दों पर चर्चा होगी। वर्ष 2016 में भी कुलपतियों ने यह मांग रखी थी, लेकिन वह सपना धरा का धरा रह गया। फिलहाल कुलपतियों को प्रोटोकॉल में 33वें स्थान का दर्जा मिला हुआ है। कई कुलपति दबे स्वर में स्वीकारते हैं कि कि वर्तमान समय में कोई भी उन्हें मीटिंग में उपस्थित रहने के लिए कह देता है। इसलिए हम चाहते हैं कि हमारा दर्जा बढ़ाकर पांचवें स्थान पर किया जाए। वे चाहते हैं मुख्य सचिव के बाद उनका नंबर आए। यानी उनका दर्जा प्रमुख सचिव से ऊंचा हो। इनका कहना है कि अभी जो दर्जा उन्हें मिला हुआ है, इससे अनुशासन बनाने में कठिनाई होती है। जरूरत पडऩेे पर वे किसी अधिकारी को निर्देश नहीं दे सकते। अभी तमाम बैठकों में कुलपतियों को हर कोई बुला लेता है।
राज्यपाल से करेंगे मांग
पिछले साल राजभवन में हुई समन्वय समिति की बैठक में इस मुद्दे पर अनौपचारिक चर्चा हुई थी। अब कुलपति इस संबंध में राज्यपाल को लिखित में मांग करेंगे। ताकि उच्च स्तर पर उनकी मांग पूरी हो सके। इधर, उच्च शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कुलपतियों को दर्जा देने की बात सामान्य प्रशासन विभाग के ऊपर निर्भर है।
तब कुलपतियों का होता था रुतबा, मिली थी लाल बत्ती
पहले भी थे पांचवें स्थान पर
कुलपतियों का कहना है कि पांच छह साल पहले उन्हें पांचवे स्थान का दर्जा प्राप्त था। लेकिन धीरे-धीरे कर इनका दर्जा 33वें स्थान पर पहुंच गया। बीयू के पूर्व कुलपति प्रो. आईएस चौहान बताते हैं कि उनके कार्यकाल के समय वे लाल बत्ती लगाने के लिए पात्र थे। उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा मिला हुआ था। उनका कहना है कि यदि कुलपतियों को यह दर्जा मिलता है तो वे कार्य करने में अधिक सक्षम होंगे।
डॉ. संगीता शुक्ला ने 2016 में कहा था कि कुलपति का अपना एक सम्मान होता है। वह खोता जा रहा है। इसलिए चाहते हैं कि पहले वाला दर्जा लौटाया जाए। ताकि प्रदेश के कुलपति भी सशक्त होकर छात्रों के लिए काम कर सकें। अभी कई कठिनाई होती हैं, जिसमें कुलपति चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते। भोज विश्व के पूर्व कुलपति तारिक जफर ने तब कहा था कि किसी भी कुलपति को गाड़ी में लाल बत्ती लगाने का शौक नहीं है। हम चाहते हैं कि मुख्य सचिव के बाद हमारा दर्जा हो। ताकि विश्वविद्यालय से संबंधित कार्रवाई में किसी अधिकारी को बुलाना हो, चर्चा करना हो तो उसे निर्देश देकर बुला सकें। अभी कुलपति को हर कोई निर्देश देना चाहता है। वहीं, उस वक्त उच्च शिक्षा मंत्री रहे उमाशंकर गुप्ता ने कहा था कि अभी तक कुलपति द्वारा की जा रही यह मांग मेरी जानकारी में नहीं आई है। इसलिए इस संबंध में कुछ नहीं कहूंगा। वहीं, वर्तमान उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया इस मामले पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।


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