JNKVV - धान की चार नवीन किस्में विकसित कर अर्जित की राष्ट्रस्तरीय उपलब्धि
- कृषि मंत्रालय भारत सरकार ने धान की चार नवीन किस्मों को किया अधिसूचित
दीपक राय, भोपाल...
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के द्वारा धान की चार नवीनतम किस्मों को कृषि मंत्रालय भारत सरकार की सेन्ट्रल वैरायटी रिलीज़ कमेटी ने प्रमाणीकरण के पश्चात् दिनांक 8 मार्च 2018 को अधिसूचित किया है। कुलपति डॉं. प्रदीप कुमार बिसेन ने बताया कि अपनी स्थापना के अल्पसमय मात्र चार वर्षांे में ही कृषि महाविद्यालय बालाघाट के वैज्ञानिकों द्वारा अहर्निश प्रयासों से उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में विकसित इन 4 प्रजातियों के विकास से मध्यप्रदेश विभाजन के पश्चात् अब तक जहां छत्तीसगढ़ द्वारा विकसित धान प्रजातियों का देश के धान उत्पादन क्षेत्र में प्रमुख योगदान रहा है वहीं कृषि महाविद्यालय बालाघाट के द्वारा विकसित इन उच्च गुणवत्ता युक्त धान की प्रजातियों के माध्यम से देश के धान उत्पादन क्षेत्र में न केवल जनेकृविवि द्वारा विकसित प्रजातियों की हिस्सेदारी बढ़ेगी अपितु इन प्रजातियों से खाद्यान्न सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।नीय मंत्री, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग म.प्र. शासन श्री गौरीशंकर बिसेन जी के अथक प्रयासों से स्थापित कृषि महाविद्यालय बालाघाट के वैज्ञानिकों ने कम समय में धान की चार प्रजातियां क्रमशः जे.आर.बी.-1, उन्नत चिन्नौर, उन्नत जीराशंकर एवं जे.आर.-81 को विकसित कर प्रदेश एवं देश के कृषकों हेतु उत्कृष्ट सौगात प्रदान की है। उल्लेखनीय है कि कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन जी की विशेष अभिरूचि व प्रोत्साहन तथा वर्तमान कुलपति एवं तत्कालीन अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय बालाघाट डॉं. प्रदीप कुमार बिसेन के कुशल मार्गदर्शन में अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में बासमती के समतुल्य पहचानी जाने वाली स्वादिष्ट एवं सुंगधित उन्नत चिन्नौर व उन्नत जीराशंकर जिसकी औसत उपज 30-32 क्विटंल प्रति हैक्टेयर है कृषि वैज्ञानिक डॉं. जी.के. कौतू, डॉं. उत्तम बिसेन, डॉं. नरेश बिसेन एवं डॉं. अमित शर्मा के प्रयासों से विकसित की गई। इसी प्रकार डॉं. उत्तम बिसेन, डॉं. वी.एन. तिवारी एवं डॉं. शिवरतन द्वारा विकसित धान प्रजाति जे.आर.बी.-1 जो 112 से 125 दिन में तैयार होती है तथा पोहे हेतु उपयुक्त इस किस्म की औसत उपज 50-55 क्विटंल प्रति हैक्टेयर है। साथ ही डॉं. जी.के. कौतू, डॉं. उत्तम बिसेन एवं डॉं. नरेश बिसेन द्वारा विकसित सभी क्षेत्रों हेतु उपुयक्त व भोजन में स्वादिष्ट किस्म जे.आर.-81 मध्यम अवधि में तैयार होकर 55-60 क्विटंल प्रति हैक्टेयर औसत उपज प्रदान करती है। कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन जी ने मुरझड़ कृषि महाविद्यालय बालाघाट एवं विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अर्जित इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुये इसे बालाघाट जिले, जनेकृविवि एवं मध्यप्रदेश हेतु अत्यंत गौरवशाली निरूपित किया है। जनेकृविवि के अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉं. पी.के. मिश्रा, कुलसचिव श्री ए.के. इंगले, संचालक अनुसंधान सेवाएं डॉं. धीरेन्द्र खरे, संचालक विस्तार सेवाएं डॉं. (श्रीमति) ओम गुप्ता, अधिष्ठाता कृषि अभियांत्रिकी संकाय डॉं. आर.के. नेमा, संचालक प्रक्षेत्र डॉं. शरद तिवारी एवं समस्त कृषि वैज्ञानिकों व कर्मचारियों ने इन नवीन धान प्रजातियों के विकसित करने हेतु बधाई एवं शुभकामनायें प्रेषित की हैं।
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