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अपराध न्याय तंत्र का जज्बा ऐंसा रखें कि जरायम जमीं दोज हो जाए : ADG SAGAR



  • प्रदेश के न्यायाधीशों से हुये रूबरू होते हुए बोले एडीजी दिनेश सागर 
  • न्यायिक सेवा देश में अग्रणी मप्र
  • वैज्ञानिक साक्षी होगा न्याय का प्रथम आधार
  • वैज्ञानिक भी सीखेंगें न्याय प्रणाली की बारिकियां 

दीपक राय, भोपाल...
वर्तमान भौतिक और तकनीकी युग के समाज में अपराधियों द्वारा सुनियोजित और योजनाबद्ध तरीके से ऐसे अपराध किये जा रहे है जिससे कि बिना तकनीक और विज्ञान का सहारा लिये ऐसे अपराधों का ना तो उचित अन्वेषण संभव और ना ही पीडि़त को उचित न्याय दिलाने और अपराधों की रोकधाम में समाज को संदेश देने की मंशा ही पूरी हो सकती है। ऐंसी परिस्थिति में उचित और वैज्ञानिक तरीके से किये जाने वाले अनुसंधान में एफएसएल वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका है और उनके द्वारा किये गये वैज्ञानिक तरीके से किये गये अन्वेषण के आधार पर जब न्यायालय किसी उचित निष्कर्ष पर पहुचता है तभी हम समाज में साबित कर पाते है कि कोई भी निर्दोष सजा का भागीदार नहीं होगा और कोई भी दोषी जेल की सलाखों से बाहर नहीं रह पायेगा। यह बातें एडीजी डीसी सागर ने कहीं। वे मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी एवं एफएसएल के संयुक्त तत्वाधान में तीन दिवस का प्रशिक्षण एवं प्रशिक्षण विचार आदान प्रदान हेतु तीन दिवसीय कार्यशाला में अपनी बात रख रहे थे। कार्यशाला में राज्य के उच्चतर न्यायिक सेवा के 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दिनेश चंद्र सागर (तकनीकी सेवाएं) रहे। अध्यक्षता एसके शर्मा जिला एवं सत्र न्यायाधीश सागर ने की। संयोजन एफएसएल सागर के संचालक डॉ हर्ष शर्मा ने किया। सागर ने कहा िइस वैज्ञानिक और उचित अन्वेषण के संक्रिया में एक छोटे से छोटे कर्मचारी से लेकर एक बड़े से बड़े दायित्ववान प्राधिकारी के सदप्रयासों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता उक्त संदर्भ में सागर ने ऐसेे छोटे से छोटे दायित्वान कर्मियों के लिये एक शेर के साथ उत्साहवर्धन किया कि 'आने ही वाली है वह सहर, सूरज बना रहा हूं दिये जोड जोड़ कर।Ó सागर ने मप्र न्यायिक सेवा के प्रति आस्था व्यक्त करते हुये उदगार व्यक्त किया कि राष्ट्रीय स्तर पर जब हम मप्र न्यायिक व्यवस्था की तुलना करते है तो निश्चित ही हम पाते है कि दूसरे प्रदेशों की तुलना में मप्र की न्यायिक संस्था में अधिक विश्वास है। राष्ट्रीय स्तर पर लंबित प्रकरणों में से जहां राष्ट्र के अन्य प्रदेशों मेे निराकृत प्रकरणों का प्रतिशत 12.6 है वहीं मप्र में 20.9 प्रतिशत है जिससे यह दर्शित हेाता है कि पुलिस वैज्ञानिक चिकित्सक एवं न्यायिक संस्था के कर्मियों के समन्वयिक प्रयासों और अथक परिश्रम के कारण इतनी मात्रा में प्रकरणों का निराकरण संभव हो पा रहा है। सागर ने उत्साहवर्धित लहजें मे यह भी अभिव्यक्त किया कि हमारे समन्वित प्रयास इस प्रकार से हो जिससे कि अधीनस्थ न्यायालय ठोस एवं वैज्ञानिक आधारों पर निर्णय प्रदान करे ताकि ऐंसे निर्णयों को उच्च न्यायालय भी अनुमोदित करें। जिला न्यायाधीश एसके शर्मा ने अभिव्यक्त किया कि तीन दिन की कार्यशाला में एफएसएल सागर के दक्ष विशेषज्ञों द्वारा दी गयी जानकारी से निश्चित तौर पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे न्यायिक अधिकारीगण लाभांवित होंगे और वर्तमान में बढ़ती हुई तकनीकी एवं वैज्ञानिक सहभागिता के वातावरण में उससे संबंधित तकनीक के आधार पर निष्कर्षित साक्ष्य सामग्री का आश्रय लेकर न्यायिक अधिकारी उचित निर्णय पारित कर सकेंगे, जिससे कि समाज में जो न्यायिक संस्थाओं के प्रति लोगों का भरोसा और विश्वास है वह कायम रहेगा।
उन्होंने सही समय पर न्याय देने के लिये पुलिस और वैज्ञानिकों से इस सहयोग की अपेक्षा की है कि अन्वेषण के साथ तैयार किये गये प्रतिवेदन अविलंब न्यायालयों को प्रेषित हों। संयोजक डॉ हर्ष शर्मा निदेशक ने वैज्ञानिक साक्ष्य की महत्ता को प्रतिपादित करते हुये व्यक्त किया कि मनुष्य झूठ बोल सकता है, लेकिन वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर निकले निष्कर्ष सदैव सत्य ही होते है और सत्य होंतें है इसलिये आज के इस तकनीकी और वैज्ञानिक युग में समय आ गया है कि अधिक से अधिक मात्रा में ऐंसे संस्थानो का लाभ लेकर उचित न्याय प्रदान किया जाये उन्होंने अपने सभी सहयोगियों द्वारा किये जा रहे अथक परिश्रम की सराहना करते हुये भविष्य में अपनी विश्सवनीयता प्रतिबद्वता  को बनाये रखते हुये अपने कार्यों को इसी तरह से आगे भी संपादित करते रहने में जोर दिया है। कार्यशाला को न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों में से डॉ अनिल सिंह, डॉ राज श्रीवास्तव, डॉ स्वाति श्रीवास्तव, डॉ ज्योत्सना पांडे, डॉ प्रशांत भटट, डॉ प्रमोद नागर, डॉ एके बडोन्या, डॉ एसके वर्मा, डॉ पंकज, डॉ हीरक रंजन दास, संबोधित किया। प्रतिभागियों की ओर से  गंगाचरण दुबे एडीजे एवं वंदना राज पांडे एडीजे ने अपने विचार व्यक्त करते हुये एफएसएल संस्था को और अधिक प्रभावशाली बनाने के सुझाव दिये। समन्वयक डॉ राज श्रीवास्तव, न्यायाधीश श्री अमित सिंह सिसोदिया, सागर सीजेएम संजय चौहान, का अभूतपूर्व योगदान रहा। 

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