चित्रकूट ने रचा इतिहास, देश की इकलौती गौ शाला जहां सुरक्षित हैं देशी नस्ल
- देशी नस्लों की गायों के संरक्षण के लिए किया जा रहा सराहनीय कार्य
- 410 गायों से प्रतिदिन मिल रहा 4000 हजार लीटर दूध
- 10 से 15 गौसेवकों को मिल रहा सालभर रोजगार
- 11 वर्षों के कठिन परिश्रम की वजह आत्मनिर्भर हुई गौशाला
- 18 लाख रुपये की आय सिर्फ पंचगव्य से हो रही
- वैज्ञानिक डॉ. राकेश शर्मा सहित गौशाला की टीम ने किया सराहनीय कार्य
तरुण चतुर्वेदी, चित्रकूट से ....
भारतीय गायों का जिक्र पुराणिक ग्रंथों में किया गया है। इनका दूध, घी और पंचगव्य बेहद लाभकारी होता है। देशी गायों की प्रजाति लुप्त होने की कगार पर हैं। क्योंकि आज जबकि देश में देशी नस्लों की गायों की अनदेखी की जा रही है। लोग पशुपालन से दूर होते जा रहे हैं। गौ सेवा की बात करने वाली भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय भी विदेशी नस्लों की गायों का दूध बेच रहे हैं। ऐसे में चित्रकूट ने विकास की नई इबारत रची है। विकास की दृष्टि से पिछड़े क्षेत्र चित्रकूट में देशी नस्लों की गायों का संरक्षण किया जा रहा है। यह कार्य दीन दयाल शोध संस्थान द्वारा किया जा रहा है। चित्रकूट के आरोग्य धाम में न सिर्फ गौ पालन का काम किया जा रहा है, बल्कि पूरे भारत की गायों की सभी प्रमृख नस्लों को संरक्षित और विकसित करने का काम किया जाता है। यहां पर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, हरियाणा,आन्ध्र पदेश, केरल, समेत सभी प्रदेशों की कुल 14 नस्लों की गायों का संरक्षण किया जा रहा है। यह कार्य कई वर्षों से चल रहा है।
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| TARUN CHATURVEDI |
इन नस्लों का संरक्षण
संरक्षित की जाने वाली नस्लों में साहीवाल, गिरी,राठी, लाल, सिन्धी, हरियाणा, कांकरेच, ओंगोल, थारपारकर, कन्धार, मालवी, वेचू, नागौरी, किल्लारी नस्लों के नाम सामिल है।
मुख्यमंत्री चौहान कर चुके सम्मानित
संस्थान को इस विशेष कार्य के लिए सन 2012 में मध्य प्रदेश गौ संरक्षण एवं संवर्धन बोर्ड भोपाल और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वौरा भी सम्मानित किया गया है।
आय में जबरदस्त इजाफा
वर्तमान में गौशाला में 410 गायें हैं, जिनसे लगभग 4000 हजार लीटर प्रतिदिन दूध का उत्पादन किया जाता है। जिससे संस्थान की आर्थिक आय बढ़ती है। यहां पर 10 से 15 गौसेवकों को वर्ष भर के लिए रोजगार मिल रहा है। गौवशाला के गौ वैज्ञानिक डॉ. राकेश शर्मा ने बताया की हमारी गौशाला अपने 11 वर्षों के कठिन परिश्रम की वजह से अब पूर्ण रूप से आत्म निर्भर हो चुकी है। अब हमारी गौशाला को किसी विशेष अनुदान की जरूरत नहीं है।
समाज के लिए अनुकरणीय गौशाला
गौशाला पंच गव्य और उससे बनने वाले उत्पाद से ही एक वर्ष में 18 लाख रुपये की आय प्राप्त कर रहे हैं। शालग्राम जागन्नाथ गौशाला के संस्थापक लक्ष्मी कान्त द्विवेदी ने बताया कि दीन दयाल शोध संस्थान में संचालित गौ विज्ञान के प्रकल्प न सिर्फ देखने लायक है, बल्कि समाज के लिए अनुकरणीय है कि कैसे गाय हमारे समाज के लिए अर्थशास्त्र , समाज शास्त्र और धर्मशास्त्र की तरह उपयोगी है।



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