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पारित हुआ बिल..रेप करने वालो को को फांसी दी जायेगी


-मध्य प्रदेश विधानसभा अनिश्चित काल के लिए स्थगित
-सहकारी बैंकों में होंगी राजनीतिक नियुक्तियां
- पेंच के पानी के मामले पर गर्भगृह के पास विधायक ने किया हंगामा
- आमंत्रण पत्र का राजनीतिकरण को लेकर हुआ हंगामा


भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में 'दंड विधि संशोधन' विधेयक सर्वसम्मति से पारित हो गया। अब यह राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जायेगा। अगर बिल को मंजूरी मिल जाती है तो यह विधेयक कानून बन जायेगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बार-बार अपनी सभाओं में दुष्कर्मियों को फांसी की सजा देने की बात करते थे। इसके बाद ही यह बिल शक्ल ले पाया। यह बिल कानून में तब्दील हो जाता है तो मध्य प्रदेश देश का एकमात्र राज्य होगा जहां पर दुष्कर्मियों को फांसी की सजा दी जाएगी। इस विधेयक में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार पर फांसी की सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही किसी भी महिला से गैंगरेप पर भी आरोपियों को फांसी की सजा दी जायेगी। बिल को राज्य के कानून मंत्री रामपाल सिंह ने सदन में पेश किया। विधेयक पर चर्चा के बाद इसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।

यह है बिल के प्रावधान
12 साल तक की किशोरी से दुष्कर्म पर फांसी
किसी भी महिला से सामूहिक दुष्कर्म पर फांसी
विवाह करने का झांसा देकर सेक्स करने पर 3 साल कैद की नई धारा जोड़ी
दुष्कर्म के मामलों में मृत्युदंड या न्यूनतम 14 साल के कठोर कारावास या मृत्युपरांत आजीवन कारावास
12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म की स्थिति में विधेयक में मृत्युदंड या न्यूनतम 20 साल के कठोर कारावास या मृत्यु तक आजीवन कारावास


इसलिए तय किया 12 साल का मानक
विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 12 साल का मानक इसलिए तय किया गया क्योंकि इस उम्र की बच्चियों को इस बात का आभास ही नहीं होता कि उन्हें क्यों बरगलाया जा रहा है। दुर्भाग्य से ऐसे 98 फीसदी मामलों में दोषी या तो कोई रिश्तेदार होता है या कोई और करीबी। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वे सभी दुष्कर्मियों के लिए फांसी के हिमायती हैं।

आगे क्या?
विधानसभा से पास इस विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा, ताकि भारतीय दंड संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता में संशोधन हो सके। इसके बाद यह कानून बन जायेगा।

दुष्कर्मी आदमी नहीं पिशाच है : शिवराज
सदन के नेता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिल पर चर्चा में कहा कि मासूमों संग दुष्कर्म करने वालों को जीने का अधिकार नहीं है। 98 प्रतिशत मामलों में परिचितों द्वारा दुष्कर्म किया जा रहा है। ऐसे रिश्तेदारों धब्बा हैं। मुझे मालूम है कि इस विधेयक से देश भर में बहस छिड़ जाएगी, लेकिन मैं मानता हूं कि जो छोटी लड़कियों से दुष्कर्म करते हैं वो आदमी नहीं पिशाच हैं और उन्हें जीने का कोई हक नहीं। देश को बहस करने दीजिए, मध्य प्रदेश ने बहस छेड़ दी है।

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