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राम मंदिर बनेगा या मस्जिद.. सुनवाई आज से... पढ़ें पूरी खब



  •  सुप्रीम कोर्ट आज से शुरू करेगा विवादित ढांचे पर सुनवाई
  •  भाजपा नेता भोपाल में बोले- हमारे तर्क सबसे ताकतवर है
  •  साल से 20 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट पहुंची

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट अयोध्या के विवादित ढांचे मामले की सुनवाई मंगलवार से शुरू करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने को कहा था, लेकिन यह नहीं हो सका। 6 दिसंबर को विवादित ढांचा ढहाए जाने की 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह विवाद 164 साल पुराना है। गौरतलब है कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 15 साल बाद भाजपा की सरकार लौटी है, जिसने अयोध्या आंदोलन को तेज किया था। 7 साल पहले 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन 3 बराबर हिस्सों में बांट दी थी। रामलला की मूर्ति वाली जगह रामलला के लिए, सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े और बाकी हिस्सा मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुन्नी वक्फ बोर्ड ने 14 दिसंबर 2010 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका के बाद 20 अन्य याचिकाएं भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुईं। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को हाईकोर्ट के आदेश पर स्थगन जारी किया था। लेकिन सुनवाई शुरू नहीं हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में 7 मुख्य जज बदले जा चुके हैं। सातवें मुख्य जज जेएस खेहर ने इस साल 11 अगस्त को पहली बार पिटीशन्स लिस्ट बनाई थी।

दो समुदायों के 3 जज करेंगे सुनवाई
मुख्य जज दीपक मिश्रा
वर्तमान मुख्य जज दीपक मिश्रा हाल ही में 3 तलाक खत्म करने का  फैसला दे चुके हैं। सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने जैसे फैसला भी मिश्रा ने ही दिया।

जस्टिस अब्दुल नाजिर
तीन तलाक पर फैसला देने वाली पीठ में जस्टिस नाजिर भी शामिल थे। इन्होंने तीन तलाक प्रथा में दखल गलत बताया था। निजता को मौलिक अधिकार करार दिया था।

जस्टिस अशोक भूषण
दिल्ली की केजरीवाल सरकार और उप राज्यपाल के बीच जारी अधिकारों की जंग के विवाद पर सुनवाई कर रहे हैं।


किसकी ओर से कौन वकील
सुन्नी वक्फ बोर्ड :  कपिल सिब्बल और राजीव धवन
रामलला पक्ष : हरीश साल्वे


भोपाल में सुब्रह्मण्यम स्वामी बोले - हम निश्चिंत हैं
अयोध्या मामले के एक याचिकाकर्ता व भाजपा नेता सुब्रहमण्यम स्वामी सोमवार को भोपाल में थे। वे बोले- मैंने देखा है कि हमारा तर्क क्या है और हमारे जो प्रतिद्वंदी हैं उनके तर्क में कोई दम नहीं है। इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक बार हार गए हैं। अब उसकी अपील में आए हैं कोई नई बात नहीं रखी अपनी पिटीशन में इसलिए हमारा कोर्ट में जितना निश्चित है ऐसा मैं मानता हूं।

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