पत्रकारिता लोकतंत्र का दिल, तो विधायिका, कार्यपालिका हैं हाथ-पांव : वैदिक
समाज-सरकार की दशा-दिशा और मीडिया की भूमिका विषय पर आयोजित सेमीनार में जुटे प्रदेशभर के पत्रकार
भोपाल। पत्रकारिता सबसे शक्तिशाली है ये लोकतंत्र का ह्रदय है और ह्रदय कभी आराम नही करता। यह बात अंतर्राट्रीय ख्यातिप्राप्त पत्रकार डॉ. वेद प्रताप वैदिक ने कही। वे राजधानी के नार्मदीय भवन सभागार में जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा समाज-सरकार की दशा-दिशा और मीडिया की भूमिका विषय पर आयोजित राष्ट्रीय मीडिया सेमीनार में बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ राधावल्लभ शर्मा ने की। जबकि विशेष अतिथि प्रख्यात पत्रकार कमल दीक्षित थे। सेमीनार में राजधानी सहित प्रदेश भर से पत्रकार और प्रबुद्धजन शामिल हुए।
श्री वैदिक ने कहा कि पत्रकारिता का एक-एक शब्द वेद में लिखे हुए शब्द जैसा है। उसके द्वारा लिखे गए एक शब्द को करोड़ों लोग सुनते, देखते और पढ़ते हैं। यदि पत्रकार संगठित हो जाएं तो ये तंत्र उनका मुकाबला नहीं कर सकता। पत्रकारिता सबसे शक्तिशाली है । ये लोकतंत्र का ह्रदय है और ह्रदय कभी आराम नहीं करता। यदि लोकतंत्र की सांस किसी माध्यम में चलती है तो वह पत्रकारिता ही है। यदि लोकतंत्र में सबसे बड़ा कोई पद है तो वह पत्रकार का पद है। पत्रकारों को अपना स्वरूप पहचानने की जरूरत है उसे किसी से डरने की आवश्यकता नहीं है। श्री वैदिक ने कहा कि आज देश में राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक नेतृत्व का अभाव है। ऐसे में पत्रकारों की भूमिका अहम हो जाती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल और तथाकथित बाबा-ढोंगी नूरा-कुश्ती खेल रहे हैं। ये समाज और लोगों का शोषण भी सिर्फ इसलिए कर पा रहे हैं, क्योंकि मीडिया अपनी पत्रकारिता धर्म का सही निर्वाह नहीं कर रही है।
मीडिया में अब बाजारवाद का दौर है : दीक्षित
कार्यक्रम के विशेष अतिथि श्री कमल दीक्षित ने कहा कि समाज की स्थिति 1950 में पूंजी के वितरण के समय से ही असंतुलित है कर्ज की सुलभता से स्थितियां और जटिल बनी हैं और सरकार आज अमीरी और गरीबी की खाई को पाटने की बजाये बढ़ावा दे रही है। आज की मीडिया की बात करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया में आज केवल बाजारवादी लोग आ रहे हैं। मीडिया बाजार का कवच बनने लगा है।
पत्रकार चाहें तो समाज बदल सकते हैं : डॉ शर्माकार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ राधावल्लभ शर्मा ने कहा कि देश की आजादी के 70 साल बाद भी आज हम निजता के अधिकार और तीन तलाक जैसे सामाजिक मुद्दों पर बहस कर रहे हैं। आगे उन्होंने कहा कि पत्रकारों के संकल्प से समाज को बदलने में समय नहीं लगेगा।
इन्होंने स्वगत किया मंच पर उपस्थित अतिथियों का सम्मान संस्था के अध्यक्ष महेश दीक्षित(अध्यक्ष), मनोज वर्मा, सुभाष श्रीवास्तव(उपाध्यक्ष), भूपेन्द्र शर्मा(महासचिव), आदित्य उपाध्याय(सचिव) रविन्द्र जैन, गीत दीक्षित, सुशील शर्मा, समीर वर्मा, गौरव चतुर्वेदी, अंकित जैन, जुबैर कुरेशी, शाकिर नूर, पंकज गुप्ता, विनोद शर्मा, नवीन शर्मा, मनोज विजयवर्गीय, धनराज सिंह, सुशील बिल्लौरे, नितिन रघुवंशी, आशीष गोस्वामी, मो. सादिक खान, श्याम चौरसिया, मीतेश दारानी, अशरार अली, सौरभ शर्मा, हेमंत शर्मा, अनिल जोशी, नवनीत व्यास, मुजाद्दीन खां, सुष्मिता प्रजापति, संदीप शर्मा, अजय उपाध्याय, प्रमोद दीक्षित, वसुधा तिवारी ने किया। आभार प्रदर्शन पत्रकार पकंज गुप्ता ने व्यक्त किए।
भोपाल। पत्रकारिता सबसे शक्तिशाली है ये लोकतंत्र का ह्रदय है और ह्रदय कभी आराम नही करता। यह बात अंतर्राट्रीय ख्यातिप्राप्त पत्रकार डॉ. वेद प्रताप वैदिक ने कही। वे राजधानी के नार्मदीय भवन सभागार में जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा समाज-सरकार की दशा-दिशा और मीडिया की भूमिका विषय पर आयोजित राष्ट्रीय मीडिया सेमीनार में बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ राधावल्लभ शर्मा ने की। जबकि विशेष अतिथि प्रख्यात पत्रकार कमल दीक्षित थे। सेमीनार में राजधानी सहित प्रदेश भर से पत्रकार और प्रबुद्धजन शामिल हुए।
श्री वैदिक ने कहा कि पत्रकारिता का एक-एक शब्द वेद में लिखे हुए शब्द जैसा है। उसके द्वारा लिखे गए एक शब्द को करोड़ों लोग सुनते, देखते और पढ़ते हैं। यदि पत्रकार संगठित हो जाएं तो ये तंत्र उनका मुकाबला नहीं कर सकता। पत्रकारिता सबसे शक्तिशाली है । ये लोकतंत्र का ह्रदय है और ह्रदय कभी आराम नहीं करता। यदि लोकतंत्र की सांस किसी माध्यम में चलती है तो वह पत्रकारिता ही है। यदि लोकतंत्र में सबसे बड़ा कोई पद है तो वह पत्रकार का पद है। पत्रकारों को अपना स्वरूप पहचानने की जरूरत है उसे किसी से डरने की आवश्यकता नहीं है। श्री वैदिक ने कहा कि आज देश में राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक नेतृत्व का अभाव है। ऐसे में पत्रकारों की भूमिका अहम हो जाती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल और तथाकथित बाबा-ढोंगी नूरा-कुश्ती खेल रहे हैं। ये समाज और लोगों का शोषण भी सिर्फ इसलिए कर पा रहे हैं, क्योंकि मीडिया अपनी पत्रकारिता धर्म का सही निर्वाह नहीं कर रही है।
मीडिया में अब बाजारवाद का दौर है : दीक्षित
कार्यक्रम के विशेष अतिथि श्री कमल दीक्षित ने कहा कि समाज की स्थिति 1950 में पूंजी के वितरण के समय से ही असंतुलित है कर्ज की सुलभता से स्थितियां और जटिल बनी हैं और सरकार आज अमीरी और गरीबी की खाई को पाटने की बजाये बढ़ावा दे रही है। आज की मीडिया की बात करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया में आज केवल बाजारवादी लोग आ रहे हैं। मीडिया बाजार का कवच बनने लगा है।
पत्रकार चाहें तो समाज बदल सकते हैं : डॉ शर्माकार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ राधावल्लभ शर्मा ने कहा कि देश की आजादी के 70 साल बाद भी आज हम निजता के अधिकार और तीन तलाक जैसे सामाजिक मुद्दों पर बहस कर रहे हैं। आगे उन्होंने कहा कि पत्रकारों के संकल्प से समाज को बदलने में समय नहीं लगेगा।
इन्होंने स्वगत किया मंच पर उपस्थित अतिथियों का सम्मान संस्था के अध्यक्ष महेश दीक्षित(अध्यक्ष), मनोज वर्मा, सुभाष श्रीवास्तव(उपाध्यक्ष), भूपेन्द्र शर्मा(महासचिव), आदित्य उपाध्याय(सचिव) रविन्द्र जैन, गीत दीक्षित, सुशील शर्मा, समीर वर्मा, गौरव चतुर्वेदी, अंकित जैन, जुबैर कुरेशी, शाकिर नूर, पंकज गुप्ता, विनोद शर्मा, नवीन शर्मा, मनोज विजयवर्गीय, धनराज सिंह, सुशील बिल्लौरे, नितिन रघुवंशी, आशीष गोस्वामी, मो. सादिक खान, श्याम चौरसिया, मीतेश दारानी, अशरार अली, सौरभ शर्मा, हेमंत शर्मा, अनिल जोशी, नवनीत व्यास, मुजाद्दीन खां, सुष्मिता प्रजापति, संदीप शर्मा, अजय उपाध्याय, प्रमोद दीक्षित, वसुधा तिवारी ने किया। आभार प्रदर्शन पत्रकार पकंज गुप्ता ने व्यक्त किए।
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