नोटबंदी के बाद से अब तक की पूरी खबर पढ़े...99 % पैसा बैंकों में लौटा
- नोटबंदी : भारतीय रिजर्व बैंक ने पहली बार जारी किया आधिकारिक आंकड़ा
- 1.3 फीसदी पुराने नोट नहीं हुए जमा
- 98.7 प्रतिशत मुद्रा जमा
- 15.44 लाख करोड़ रुपये बैंकों में हुआ जमा
- 1.3 प्रतिशत मुद्रा कालाधन
- 8900 करोड़ रुपये नहीं हुए जमा
- 7,965 करोड़ रुपये खर्च हुए नोट छापने में
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दीपक राय, मुंबई। 8 नवंबर 2016 की रात से भारत में लागू हुई नोटबंदी (विमुद्रीकरण) के बाद से अब तक 99 प्रतिशत मुद्रा बैंक में जमा हो गई। सिर्फ 1.3 प्रतिशत पुराने नोट ही जमा नहीं हुए। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को नोटबंदी के आंकड़े जारी कर दिए। आरबीआई ने यह भी बताया कि इस दौरान कुल 99 फीसदी नोट वापस आए जिनकी वैल्यू 15.44 लाख करोड़ है। जिसका मतलब साफ है कि नोटबंदी के बाद तंत्र का लगभग सारा पैसा बैंकों में वापस आ गया।? आरबीआई ने वार्षिक रिपोर्ट 2016-17 में बताया गया कि नोटबंदी के बाद 1000 रुपए के 8.9 करोड़ नोट वापस नहीं आए। यानि 8 हजार 900 करोड़ रुपये बैंकों में नहीं पहुंचे। वहीं नोटबंदी के बाद नए नोटों की छपाई पर हुए खर्च के बारे में बताया कि इन्हें छापने में अब तक सरकार के 7,965 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 8 नवंबर को 500 व 1,000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर करने का निर्णय लिया था। जिसके संदर्भ में आरबीआई ने कहा कि नोटबंदी की प्रक्रिया बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण थी। नोटबंदी के बाद से ही सरकार पर इन आंकड़ों के खुलासे को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। जिसपर आरबीआई की तरफ से कई बार बयान भी जारी कर कहा गया था कि इन आंकड़ों के बारे में कोई जानकारी नहीं, लेकिन आखिरकार आज बैंक ने यह आंकड़े जारी कर दिए। आरबीआई ने बताया कि जब नोटबंदी की घोषणा हुई थी तब बाजार में कुल 15 लाख 44 हजार करोड़ की 500 व 1000 रुपये की मुद्रा चलन में थी। इनमें से 15 लाख 28 हजार करोड़ की रकम बैंकों में लौटी है। नोटबंदी के बाद पुराने 1,000 रुपये के कुल 632.6 करोड़ नोटों में से 8.9 करोड़ नोट अब तक नहीं लौटे हैं।
नए नोट छापने में दोगुनी हुई लागत
केंद्रीय बैंक के मुताबिक वित्त वर्ष 2016-17 में 7.62 लाख नकली नोटों का पता चला, जबकि 2015-16 में 6.32 लाख नकली नोट पकड़े गए थे। रिजर्व बैंक ने कहा कि नोटबंदी के बाद नए नोटों की छपाई की लागत दोगुनी होकर 7,965 करोड़ रुपये हो गई, जो 2015-16 में 3,421 करोड़ रुपये थी।
संसदीय समिति ने दी थी रिपोर्ट
बता दें कि नोटबंदी को लेकर संसद की एक समिति ने अपनी ही रिपोर्ट के मसौदे को नए सिरे से तैयार करने पर जोर दिया था। सदस्यों का कहना है कि रिजर्व बैंक ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां नहीं दी। यह भी नहीं बताया गया कि बंद किए गए 500 और 1000 रुपये के नोट कितने थे। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल दो बार समिति के समक्ष उपस्थित हो चुके हैं, लेकिन केंद्रीय बैंक यह नहीं बता पाया कि नोटबंदी के बाद कितने बंद किए गए नोट बैंकों के पास वापस आए हैं।
मोदी के संबोधन से हिल गया था देश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 की रात 8 बजे राष्ट्र के नाम संदेश के दौरान विमुद्रीकरण की घोषणा की थी। 500-1000 रुपए के नोटों को बंद करके 500 और 2000 रुपए के नए नोट निकालने का फैसला किया गया था। इस तरह 4 घंटे में ही देश की 86प्रतिशत यानी 15 लाख करोड़ रुपए की मुद्रा चलन से बाहर कर दी गई थी।
सरकार ने जैसा सोचा, वैसा हुआ नहीं
नोटबंदी के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इससे नकली नोट चलन से बाहर होंगे और कालाधन बंद होगी। लेकिन आरबीआई की रिपोर्ट को देखा जाये तो नतीजे वैसे नहीं आए। क्योंकि बंद हो चुके हजार रुपए के 98.7प्रतिशत नोट तो आरबीआई के पास लौट आए हैं।
इतने नकली नोट मिले
- 2016-17 के वित्त वर्ष में 7,62,072 जाली नोट मिले, 2,56,324 नोट 1000 रुपए के, 317,567 नोट 500 रुपए के थे
- नोटबंदी के बाद आए नए नोट भी नकली बने, इनमें से 500 रुपए के 199 नोट और 2000 के 638 नोट भी नकली मिले
एक नजर में खबर
- 1000 रुपए के 632.6 करोड़ नोटों में से 8.9 करोड़ रुपए जमा नहीं हुए
- 7,965 करोड़ रुपए लगी छपाई की लागत, पिछले साल से दोगुना
- 2016 में नोट छपाई पर 3,421 करोड़ रुपए खर्च हुए थे
- 2017 में नोटों की सप्लाई 37 फीसदी तक बढ़ गई
नोटबंदी के पहले
- 15.4 लाख करोड़ रुपए की के 500 और 1000 की मुद्रा थी चलन में
- 44 प्रतिशत मुद्रा 1000 रुपए की
- 56प्रतिशत मुद्रा 500 रुपए की शक्ल में थी
- 1000 के 670 करोड़ नोट चलन में थे। यह राशि 6.70 लाख करोड़ रुपए है

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