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मध्य प्रदेश में 66523 शिक्षकों की कमी, सिर्फ 1-1 शिक्षकों के हवाले 18 हजार स्कूल

- शिक्षकों की कमी मामले में देशभर में तीसरे नंबर पर प्रदेश
- बिहार और झारखंड देश में सबसे ज्यादा बदहाल
- ओडिशा और सिक्किम में एक भी पद नहीं खाली
- 1 लाख 5 हजार 630 प्राथमिक और माध्यमिक सरकारी स्कूल एक शिक्षक के भरोसे देश में
- 17 हजार 874 स्कूल मध्यप्रदेश में हैं, जहां एक ही शिक्षक नियुक्त है

दीपक राय, भोपाल। विकास के पथ पर अग्रसर होने का दावा करने वाली मध्य प्रदेश सरकार के लिए यह खबर शर्मिंदा करने वाली है। यह रिपोर्ट उस वक्त आई है, जबकि प्रदेश के सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम बेहद निराशाजनक आ रहा है। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूल इन दिनों 66 हजार 523 शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। एडब्ल्यूपीएंडबी एवं पीएबी कार्यवृत्त 2017-18 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए  लोकसभा में जर्नादन सिंह सीग्रीवाल के अतारांकित प्रश्न के जवाब में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने यह जानकारी दी। प्रदेश में 36 लाख 3 हजार 99 पद स्वीकृत हैं। इनमें से राज्य सरकार के द्वारा 1 लाख 84 हजार 171 पद स्वीकृत किए गए हैं, वहीं केंद्र के सर्वशिक्षा अभियान के तहत 1 लाख 78 हजार 928 पद स्वीकृत हैं। इतने पदों के बावजूद 2 लाख 96 हजार 576 शिक्षक ही कार्यरत हैं। इनमें से राज्य सरकार के द्वारा 1 लाख 52 हजार 204 शिक्षक और सर्वशिक्षा अभियान के तहत 1 लाख 44 हजार 372 शिक्षक ही वर्तमान में कार्यरत हैं।

केंद्र भी बराबर का जिम्मेदार
शिक्षकों की कमी के मामले में सिर्फ प्रदेश की शिवराज सरकार ही जिम्मेदार नहीं हैं, क्योंकि केंद्र के सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत सरकार द्वारा स्वीकृत शिक्षकों के पद भी बड़ी संख्या में खाली हैं।

18 हजार* स्कूल में एक-एक शिक्षक
पिछले साल मानसून सत्र में पेश की गई मानव संसाधन विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में करीब 18 हजार स्कूलों में सिर्फ एक-एक शिक्षक पदस्थ हैं। यही नहीं, देश में एक लाख के ऊपर स्कूल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।

3 साल से भर्ती का ऐलान, कोरी घोषणा
प्रदेश की शिवराज सरकार पिछले तीन सालों से ऐलान कर रही है कि सरकारी स्कूलों के लिए 39 हजार शिक्षकों की भर्ती होना है। लेकिन, सरकार अब तक विज्ञापन जारी नहीं कर पायी है। उनका यह ऐलान कोरी घोषणा ही साबित होकर रह गया है।

शिक्षकों की कमी के मामले में चौथे नंबर पर
लगातार पांच बार कृषि कर्मण अवार्ड हासिल कर वाहवाही लूटने वाली शिवराज सरकार शिक्षकों की कमी मामले में देश में चौथे नंबर पर है। उत्तर प्रदेश 2 लाख 24 हजार 327 शिक्षकों की कमी के साथ देश में शीर्ष पर है। वहीं बिहार 2 लाख 3 हजार 934 शिक्षकों की कमी के साथ दूसरे और झारखंड 78 हजार 265 शिक्षकों की कमी के साथ तीसरे स्थान पर है।

ओडिशा, सिक्किम और गोवा सबसे अच्छे
ेदेश के तीन राज्य ऐसे हैं जहां पर सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षकों की कमी नहीं है। ओडिशा, सिक्किम और गोवा के स्कूलों में 100 प्रतिशत शिक्षक कार्यरत हैं।

100 प्रतिशत शिक्षा वाले केरल का कमाल
देश में 100 प्रतिशत साक्षरता वाले राज्य केरल ने भी कमाल किया है। यहां पर राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत 1 लाख 23 हजार 457 शिक्षकों में से सभी 100 प्रतिशत शिक्षक पदस्थ हैं। लेकिन, सर्वशिक्षा अभियान के 1400 पदों में शिक्षकों की कमी बरकरार है।

क्या कहता है शिक्षा का अधिकार कानून
शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के मुताबिक, सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में 30 से 35 बच्चों के लिए एक शिक्षक होना चाहिए। ये शिक्षक बीएड और डीएड प्रशिक्षित होने चाहिए।

चिंताजनक तथ्य 
राज्य        शिक्षकों की कमी
उत्तर प्रदेश      224327
बिहार      203934
झारखंड         78265
मध्य प्रदेश      66523

बयान
सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले करोड़ों बच्चों के लिए यह बहुत दुखदायक है। 66 हजार शिक्षकों की कमी यह प्रदर्शित करती है कि सरकारें शिक्षा के प्रति कितनी संजीदा है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रदेश के बच्चों भविष्य कितना उज्ज्वल है।
- राकेश कुमार मालवीय, सामाजिक कार्यकर्ता

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