बाहुबली भी न तोड़ पाए
नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने नोटबंदी से संबंधित जानकारी न देने के चलते सरकार को खरी-खरी सुनाई है। आयोग ने सभी सरकारी विभागों को निर्देशित किया है कि नोटबंदी से संबंधित बड़े फैसले के पीछे के सभी तथ्यों और वजहों की जानकारी दें। सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्यलु ने फिल्म बाहुबली का जिक्र करते हुए यह भी कहा, नोटबंदी को लेकर फौलादी किले बनाए जाने के ऐसे रवैये को उम्मीद करना बहुत मुश्किल है, जिसे बाहुबली भी न तोड़ पाए। यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), आरबीआई और वित्त मंत्रालय ने नोटबंदी से संबंधित कई जानकारियां सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत नहीं दीं। आचार्यलु ने नोटबंदी के फैसले को लेकर सूचना न देने पर पारदर्शी पैनल की ओर से पहली बार टिप्पणी करते हुए कहा कि सूचना को रोके रखने की किसी भी कोशिश से अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर शंकाएं पैदा होंगी। गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 8 नवंबर को 1000 और 500 के नोट को चलन से बाहर किए जाने का ऐलान किया था। आचार्यलु ने आरटीआई आवेदक रामस्वरूप के मामले पर फैसला सुनाते हुए 2015 की ब्लॉकबस्टर फिल्म बाहुबली का जिक्र किया। उन्होंने कहा, कानून के राज और एक लोकतांत्रिक देश में नोटबंदी जैसे पब्लिक से जुड़े मामले के चारों ओर फौलादी किले बनाने के रवैये को पचा पाना बहुत मुश्किल है, जिसे बाहुबली भी न तोड़ पाए। ऐसे नजरिए को खत्म करने की जरूरत है। रामस्वरूप ने बदली गई टोटल मुद्रा, इसे बदलने वाले लोगों और मुद्रा बदलने के लिए अपना परिचय पत्र मुहैया कराने वाले ग्राहक की संख्या के बारे में पिंटो पार्क एयर फोर्स एरिया के पोस्ट ऑफिस से इन्फॉर्मेशन मांगी थी, लेकिन पोस्टल डिपार्टमेंट ने दावा किया था कि उसके पास इस बारे में पूरी सूचना नहीं है। सूचना आयुक्त आचार्यलु ने पोस्टल डिपार्टमेंट को इन्फॉर्मेशन मुहैया कराने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा, सभी सार्वजनिक तंत्र को हर उस फैसले की सूचना जारी करनी चाहिए, जिससे देश के हर नागरिक पर असर पड़ता है। सभी सार्वजनिक क्षेत्रों की यह नैतिक और सांवैधानिक और सूचना के अधिकार आधारित लोकतांत्रित जिम्मेदारी है कि वह नोटबंदी से जुड़ी हर जानकारी लोगों को दे।

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