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कुलपति डॉं. बिसेन ने रोंपी धान की उन्नत किस्म



  • 15 दिन पहले पकेगी: देगी विपुल उत्पादन
  • पुरानी किस्मों का लेगी स्थान


जबलपुर, 02 जुलाई। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉं. प्रदीप कुमार बिसेन ने खेतों में उतरकर भोरवेला में विवि की राष्ट्रीय बीज परियोजना प्रक्षेत्र में पूजन-अर्चन के साथ धान की नई उन्नत किस्म जे.आर.-81 की रोपाई (ट्रान्सप्लान्टिग) की। जनेकृविवि के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह उन्नत किस्म जहां 15 दिन पहले ही पकेगी और विपुल उत्पादन देगी, वहीं पुरानी किस्मों का स्थान लेकर कृषकों में भारी लोकप्रिय होगी। विश्वविद्यालय के इतिहास में प्रथम बार कुलपति के रूप में डॉं. बिसेन ने खरीफ मौसम में बुवाई की शुरूआत कर एक प्रेरणास्पद कार्य को अंजाम दिया। इस दौरान विवि के अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉं. पी.के. मिश्रा, संचालक अनुसंधान सेवाएं डॉं. धीरेन्द्र खरे, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डॉं. आर.एम. साहू, प्रभारी अधिकारी एवं प्रमुख वैज्ञानिक डॉं. आर.एस. शुक्ला, डॉं. मनोज श्रीवास्तव, पौध प्रजनक डॉं. जी.के. कौतू आदि उपस्थित रहे।

प्रमुख वैज्ञानिक डॉं. आर.एस. शुक्ला और पौध प्रजनक डॉं. जी.के. कौतू ने बताया कि खरीफ मौसम में धान की खेती हेतु बुवाई कार्य प्रारंभ होने का यह उपयुक्त समय है। इस समय धान की नई किस्म जे.आर.-81 का ट्रान्सप्लान्टिग प्रारंभ करने का कार्य विवि के कुलपति डॉं. बिसेन द्वारा सुबह पूजा-अर्चन कर भारतीय परम्परा के अनुसार प्रथम पौधे का रोपण कर बुवाई का कार्य प्रारंभ किया गया है।
धान की रोपाई के शुभारंभ के साथ ही कुलपति ने द्वारा प्रक्षेत्र में चल रही अन्य अनुसंधान परियोजनाओं का भी अवलोकन किया तथा उचित मार्गदर्षन और दिषानिर्देष दिये। इस खुषगवार मौसम के दौरान विवि के अनेक कृषि वैज्ञानिक और कर्मचारी उपस्थित थे।

क्या है खास इस किस्म में-
1. जे.आर.-81 किस्म- मध्यम खेती, लम्बी, 120 दिन में पककर तैयार होती है। उपज 50-55 क्ंिव./हेक्टेयर आती है।
2. ये किस्म पुरानी किस्मों के स्थान में उत्तम उपज, कम समय व अधिक लाभ प्रदान करती है।

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