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कृषकगण कृषि की उन्नत तकनीक अपनायें- डॉ. बिसेन



  • जनेकृविवि ने घुण्डी सराई गॉंव गोद लेकर कृषि यंत्र बांटे


जबलपुर, 30 जुलाई। जवाहरलाल नेहरू कृषि विष्वविद्यालय स्थित कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय जबलपुर की अखिल भारतीय समन्वित कृषि मौसम अनुसंधान परियोजना के तहत डिंडौरी जिले के जन जातीय कल्याण केन्द्र वरगांव (षहपुरा) में मौसम आधारित कृषि पर कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें जनेकृविवि के कुलपति डॉं. प्रदीप कुमार बिसेन ने जनजाति कृषकों के समग्र विकास के लिये डिंडौरी के शहपुरा स्थित आदिवासी घुण्डी सराई गांव के कृषकों को विभिन्न उन्नत कृषि यंत्रों का वितरण किया और तकनीकी सहायता का वचन देकर गांव को कृषि विज्ञान केन्द्र डिंडौरी के माध्यम से अंगीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने सीमित भूमि एवं संसाधनों से भरपूर उत्पादन के निये कृषकों का मार्गदर्षन करते हुये धरती माता के अच्छे स्वास्थ्य के लिये मिट्टी परीक्षण एवं गौमाता के उत्तम स्वास्थ्य के लिये चारा उत्पादन की आवष्यकता बताई। इस दौरान कुलपति डॉं. बिसेन और कृषि वैज्ञानिकों ने औषधियों पौधों का वृक्षारोपण भी किया। कृषकों को आदिवासी उपयोजना, नीकरा और कृषि मौसम परियोजना के तहत स्प्रिंकर सेट, स्प्रेयर, हैण्ड व्हील हो, उन्नत चूल्हे, वर्मी वेड और चारा अनुसंधान परियोजना की ओर से हायब्रिड नेपियर घासकी कलमें आदि वितरित की गईं। यहां कार्यक्रम में 250 आदिवासी कृषक लाभान्वित हुए। कार्यक्रम के विषिष्ट सत्र में विष्वविद्यालय के प्रबंध प्रमण्डल के सदस्य एवं सेवानिवृत्त कृषि वैज्ञानिक डॉ. इदनानी ने कृषि उत्पादन की आर्थिक विवेचना की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी राजकुमार मटाले ने कृषकों से उन्नत कृषि तकनीक अपनाने का आग्रह किया और भारत सरकार द्वारा ग्राम विकास हेतु चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी।
मौसम परियोजना प्रभारी डॉ. पी.बी. शर्मा ने भारत सरकार के मौसम विज्ञान विभाग से प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को जारी मौसम पूर्वानुमान बुलेटिन के आधार पर कृषि कार्य योजना की जानकरी दी। विवि के शस्य विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गिरीष झा ने कृषकों से उपज एवं आय में वृद्धि के उपायों पर चर्चा की। कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय के सिंचाई परियोजना के प्रमुख वैज्ञानिक डॉं. मनोज अवस्थी ने जल उत्पादन के तकनीकी बिन्दुओं पर चर्चा की। चारा अनुसंघान परियोजना प्रभारी डॉं. ए.के. मेहता ने मक्का एवं राजमूंग चरी के उत्पादन की तकनीक बताई। डॉ. श्रीकृष्ण बिलैया ने हायब्रिड नेपियर घास उत्पादन हेतु मार्गदर्षन किया। डॉ. मनीष भान ने मौसम आधारित कार्ययोजना के तकनीकी बिन्दुओं पर चर्चा की। अतिथि वक्ता के रूप में पषु पालन महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आर.पी.एस. बघेल ने दुधारू पषुओं के पालन के प्रमुख बिन्दुओं पर संदेष दिया। कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आर.के. नेमा ने कहा कि तकनीकी समन्वय से ही कृषि विकास संभव है।

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