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अब आप भी बन सकते हैं आईएएस, UPSCपास करना जरूरी नहींं



  • प्रतिभाशाली लोगों के लिए सरकार ने बदले नियम
  • 30 जुलाई के पहले करना होगा आवेदन
  • 40 वर्ष कम से कम उम्र और 15 वर्ष का निजी अनुभव जरूरी
  • 2005 से अटके फैसले पर मोदी सरकार ने लगाई मुहर

दीपक राय, भोपाल...
अंग्रेजों के समय से चली आ रही लालफीताशाही पर लगाम कसने के लिए मोदी सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। अब आईएएस, आईपीएस जैसे अधिकारी बनने के लिए अब यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा पास करना जरूरी नहीं होगा। सरकार के एक फैसले के बाद अब प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले वरिष्ठ अधिकारी भी सरकार का हिस्सा बन सकते हैं। लैटरल एंट्री के जरिए सरकार  यह लोग सरकारी अफसर बन पाएंगे। रविवार को इन पदों पर नियुक्ति के लिए डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल ऐंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) के लिए विस्तार से गाइडलाइंस के साथ अधिसूचना जारी की गई।

हमेशा से बदलाव चाहते थे मोदी
सरकार बनने के तुरत बाद से ही प्रधानमंत्री मोदी ब्यूरोक्रेसी में लैटरल एंट्री के के हिमायती रहे हैं। इसलिए सरकार अब इसके लिए सर्विस रूल में जरूरी बदलाव भी करेगी। डीओपीटी की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार मंत्रालयों में जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर नियुक्ति होगी। इनका टर्म 3 साल का होगा और अगर अच्छा प्रदर्शन हुआ तो 5 साल तक के लिए इनकी नियुक्ति की जा सकती है।

40 वर्ष से अधिक उम्र वालों को मौका
लेटरल एंट्री से अफसर बनने के लिए आवेदन के लिए अधिकतम उम्र की सीमा तय नहीं की गई है, जबकि न्यूनतम उम्र 40 साल है। वेतन केंद्र सरकार के अंतर्गत जॉइंट सेक्रटरी वाला होगा। सारी सुविधा उसी अनुरूप ही मिलेगी। इन्हें सर्विस रूल की तरह काम करना होगा और दूसरी सुविधाएं भी उसी अनुरूप मिलेंगी। मालूम हो कि किसी मंत्रालय या विभाग में जॉइंट सेक्रटरी का पद काफी अहम होता है और तमाम बड़े नीतियों को अंतिम रूप देने में या उसके अमल में इनका अहम योगदान होता है।

भर्ती की प्रक्रिया ऐसे होगी
इस भर्ती का आधार सिर्फ इंटरव्यू होगा और कैबिनेट सेक्रेटरी के नेतृत्व में बनने वाली कमिटी इनका इंटरव्यू लेगी। योग्यता के अनुसार सामान्य ग्रेजुएट और किसी सरकारी, पब्लिक सेक्टर यूनिट, यूनिवर्सिटी के अलावा किसी प्राइवेट कंपनी में 15 साल काम का अनुभव रखने वाले भी इन पदों के लिए आवेदन दे सकते हैं। आवेदन में योग्यता इस तरह तय की गई है कि उस हिसाब से कहीं भी 15 साल का अनुभव रखने वालों के सरकार के टॉप ब्यूरोक्रेसी में डायरेक्ट एंट्री का रास्ता खुल गया है।

10 मंत्रालयों में मिलेगा काम
सरकार ने फिलहाल सिर्फ 10 मंत्रालयों में इन अफसरों को नियुक्ति देने का मन बनाया है। ये 10 मंत्रालय और विभाग हैं- फाइनैंस सर्विस, इकनॉमिक अफेयर्स, ऐग्रिकल्चर, रोड ट्रांसपोर्ट, शिपिंग, पर्यावरण, रिन्यूअबल एनर्जी, सिविल एविएशन और कॉमर्स। इन मंत्रालयों और विभागों में नियुक्ति कर विशेषज्ञता के हिसाब से ही पोस्टिंग होगी।

2005 में आई थी प्रशासनिक सुधार की रिपोर्ट
लेकिन अब मोदी सरकार ने लिया निर्णय
ब्यूरोक्रेसी में लैटरल ऐंट्री का पहला प्रस्ताव 2005 में ही आया था, जब प्रशासनिक सुधार पर पहली रिपोर्ट आई थी, लेकिन तब इसे सिरे से खारिज कर दिया गया। फिर 2010 में दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गई, लेकिन पहली गंभीर पहल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद हुई। पीएम मोदी ने 2016 में इसकी संभावना तलाशने के लिए एक कमिटी बनाई, जिसने अपनी रिपोर्ट में इस प्रस्ताव पर आगे बढऩे की अनुशंसा की।

अफसरशाही नहीं चाहती थी ऐसा हो
सूत्रों के अनुसार ब्यूरोक्रेसी के अंदर इस प्रस्ताव पर विरोध और आशंका दोनों रही थी, जिस कारण इसे लागू करने में इतनी देरी हुई। अंतत: पीएम मोदी के हस्तक्षेप के बाद मूल प्रस्ताव में आंशिक बदलाव कर इसे लागू कर दिया गया। हालांकि पहले प्रस्ताव के अनुसार सेक्रेटरी स्तर के पद पर भी लैटरल ऐंट्री की अनुशंसा की गई थी, लेकिन सीनियर ब्यूरोक्रेसी के विरोध के कारण उसे टाल दिया गया।

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