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230 भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी के मामले कोर्ट में चलाने की नहीं मिल रही अनुमति

भोपाल। मध्यप्रदेश में लोकायुक्त पुलिस द्वारा 230 सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के रिश्वत और अनुपातहीन संपत्ति सहित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच पूरी कर ली है।इन अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ अदालत में प्रकरण चलाने के लिए सरकार के विभागों के पास तीन महीने या इससे भी ज्यादा का समय हो गया है लेकिन आज तक अनुमति नहीं मिली है। जबकि इस संबंध में लोकायुक्त पुलिस द्वारा मुख्य सचिव को भी पत्र लिखा जा चुका है।
सूत्रों के मुताबिक लोकायुक्त पुलिस ने जिन मामलों की जांच पूरी कर अभियोजन स्वीकृति के लिए राज्य शासन को प्रकरण भेजे हैं, उनमें सबसे ज्यादा राजस्व के 71 हैं। इनके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग और पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग के 26, सहकारिता के 25, वन विभाग के 11 मामलों में लोकायुक्त पुलिस को अभियोजन स्वीकृति का इंतजार है।
लोकायुक्त पुलिस को जिन 230 मामलों में अभियोजन स्वीकृति की प्रतीक्षा है उनमें से राजस्व, सामान्य प्रशासन, सहकारिता, पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग के ही 159 प्रकरण हैं। पुलिस के तीन महीने से ज्यादा पुरानी अभियोजन स्वीकृति का एकमात्र मामला है जो सतना के एक उप निरीक्षक का है।
थेटे की अभियोजन स्वीकृति का इंतजार
सूत्र बताते हैं कि आईएएस रमेश थेटे के खिलाफ भी लोकायुक्त पुलिस ने जांच पूरी कर ली है लेकिन लोकायुक्त पुलिस को उनके मामले में अभी तक अभियोजन स्वीकृति नहीं दी गई है। अभियोजन स्वीकृति के इन मामलों में सबसे ज्यादा पुराना मामला बालाघाट के सहायक आदिवासी आयुक्त आनंद मिश्रा का है जिसमें उनके खिलाफ पद के दुरुपयोग का अपराध दर्ज था। 2013 में दमोह के एक मुख्य कार्यपालन अधिकारी आरके मिश्रा के खिलाफ भी लोकायुक्त पुलिस जांच पूरी कर चुकी है जिसकी अभियोजन स्वीकृति उस समय भेज दी गई थी।
तीन सालों की लंबित है अभियोजन स्वीकृति
2015- 59
2016- 72
2017- 43
मुख्य सचिव को पत्र लिखा
लोकायुक्त पुलिस द्वारा विभिन्न् विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जांच पूरी होने के बाद अभियोजन स्वीकृति के लिए लिखा जाता है। तीन महीने में स्वीकृति मिल जाना चाहिए लेकिन ऐसे 230 मामलों में स्वीकृति नहीं मिली है। इसके लिए लोकायुक्त विशेष पुलिस स्थापना ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा है।
- राजेंद्र सिंह, सचिव, लोकायुक्त संगठन मप्र

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